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Mohali Blast: छोटे धमाके से बड़ा पैगाम देने की कोशिश है मोहाली ब्लास्ट, इनसे जुड़े हो सकते हैं तार

खुफिया एजेंसियों के मुताबिक पंजाब के अलग-अलग इलाकों में हाल की कई आतंकी घटनाएं इस बात का इशारा दे रही हैं कि देश के बाहर बैठे कुछ लोग पंजाब में सोए हुए खालिस्तान को एक बार फिर से जगाने की कोशिश कर रहे हैं.

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मोहाली धमाके के पीछे लश्कर-ए-खालसा संगठन का नाम आ रहा है मोहाली धमाके के पीछे लश्कर-ए-खालसा संगठन का नाम आ रहा है
स्टोरी हाइलाइट्स
  • नए आतंकी संगठन पर है हमले का शक
  • RPG हमले में बड़ी साज़िश की आशंका
  • सामने आया आतंकी संगठन 'लश्कर-ए-ख़ालसा' का नाम

कई बार कुछ आतंकी हमले नुकसान पहुंचाने के लिए नहीं बल्कि पैगाम पहुंचाने के लिए अंजाम दिए जाते हैं. खुफिया और सुरक्षा एजेंसियां मोहाली में हुए हमले को इस नजर और नजरिए से देख रहे हैं. खुफिया एजेंसियों के मुताबिक पंजाब के अलग-अलग इलाकों में हाल की कई आतंकी घटनाएं इस बात का इशारा दे रही हैं कि देश के बाहर बैठे कुछ लोग पंजाब में सोए हुए खालिस्तान को एक बार फिर से जगाने की कोशिश कर रहे हैं.

छोटा धमाका भी बड़ा शोर कर सकता है, ये बात मोहाली में पंजाब इंटेलिजेंस की बिल्डिंग में हुए धमाके से साबित होती है. धमाका जिस वक्त और जिस तरह से किया गया, उससे एक बात साफ थी धमाका करने वाला कोई बहुत बड़ा नुकसान नहीं करना चाहता था. अगर उसका इरादा नुकसान करने का होता, तो वो शाम छह बजे दफ्तर बंद होने के बाद नहीं बल्कि छह बजे से पहला करता. अब ऐसे में सवाल ये है कि धमाका छोटा हो या बड़ा, जोखिम तो रहता ही है पकड़े जाने का. तो फिर इतना बड़ा जोखिम लेकर इतना छोटा धमाका क्यों किया? 

तो इस सवाल का जवाब जानने के लिए हाल के वक़्त की कुछ हलचल और इन चेहरों और नामों को पढ़ना और समझना जरूरी है-
- वधावा सिंह, चीफ़, बब्बर खालसा
- रंजीत सिंह नीटा, चीफ़, खालिस्तान ज़िंदाबाद फ़ोर्स 
- भाई लखबीर सिंह रोडे, इंडियन सिख यूथ फेडरेशन 
- परमजीत सिंह पंजवड़, खालिस्तान कमांडो फ़ोर्स
- गुरपतवंत सिंह पन्नू, सिख फॉर जस्टिस

ये वो नाम हैं, जिनकी मंशा और इरादा बस एक है सोए हुए ख़ालिस्तान की आवाज़ को फिर से जगाना. पंजाब में ख़ालिस्तान आंदोलन को फिर से शुरू करना. और बस इनकी इसी साज़िश का एक मोहरा भर है पंजाब इंटेलिजेंस बिल्डिंग में हुआ धमाका. ये धमाका दरअसल एक पैग़ाम है कि ख़ालिस्तान पंजाब में फिर से करवट लेने की कोशिश में है. ख़ालिस्तान को ज़िंदा करने की कोशिश में लगे इन पांचों में से एक गुरपतवंत सिंह पन्नू को छोड़ दें, तो बाक़ी चार पाकिस्तान में पनाह लिए हुए हैं. 

ये चारों पाक ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई के इशारे पर ही काम करते हैं, जबकि गुरपतवंत सिंह अमेरिका से ऑपरेट कर रहा है. हालांकि इन पांच नामों के अलावा तीन और नाम और चेहरे हैं जो लगातार पंजाब को बेचैन कर रहे हैं. ये तीनों वो लोग हैं, जो कल तक पंजाब में मामूली गैंगस्टर थे. लेकिन फिर सरहद पार जाने और ख़ालिस्तान से जुड़े नेताओं के संपर्क में आने के बाद ये भी उसी रास्ते पर चल पड़े हैं. 

ये तीन नाम हैं-
- गैंगस्टर हरविंदर सिंह संधू उर्फ रिंदा
- जयपाल भुल्लर
- दिलप्रीत बावा

हालांकि इंटेलिजेंस बिल्डिंग में हुए जिस धमाके को शनिवार रात तक पंजाब पुलिस एक हादसा बता रही थी अब वही पंजाब पुलिस इस धमाके के पीछे ख़ालिस्तानी समर्थकों के अलावा इन गैंगस्टर की भूमिका की भी जांच कर रही है. जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, पंजाब पुलिस को अपनी शुरुआती ग़लती का अहसास भी हो रहा है. उन्हें अंदाज़ा हो चुका है कि ये धमाका एक हादसा नहीं बल्कि इसके पीछे एक बड़ी साज़िश है. 

साज़िश, पंजाब में ख़ालिस्तान के फिर से पैर पसारने की. अगर साज़िश बड़ी ना होती, तो पंजाब इंटेलिजेंस बिल्डिंग पर ग्रेनेड लॉन्चर से हमला ना हुआ होता. उस ग्रेनेड लॉन्चर से जिसका कनेक्शन पाकिस्तान और रूस से जाकर जुड़ रहा है. एक कश्मीर छोड़ दें, तो पूरे भारत में किसी भी आतंकी हमले में शनिवार से पहले ग्रेनेड लॉन्चर का इस्तेमाल नहीं किया गया था.

ख़तरा एक और भी है, पंजाब इंटेलिजेंस बिल्डिंग पर एक ही ग्रेनेड लॉन्च किया गया था. इसे देखते हुए इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि हमलावरों के पास ऐसे कई ग्रेनेड लॉन्चर हो सकते हैं. लिहाज़ा जल्द से जल्द उनकी शिनाख्त करना, उन्हें ढूंढना और पकड़ना बहुत जरूरी है. हाल की आतंकी हलचल को देखते हुए पंजाब में इंटेलिजेंस और सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम बेहद ज़रूरी हो गए हैं. 

 

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