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नवाब मलिक के संगीन आरोप, समीर वानखेड़े के तल्ख तेवर, उलझता जा रहा है पूरा मामला

ये कहानी इतनी पेचीदा है कि एक तरफ समीर उसे उलझा रहे हैं तो वो उलझती नहीं, और दूसरी तरफ नवाब उसे सुलझा रहे हैं तो वो सुलझती नहीं. हालांकि पिछले करीब 2 महीने से उलझते-सुलझते ये कहानी अब सिर्फ उन दो लफ्ज़ों पर आकर टिक गई है. जो ये तय करेगी कि समीर, दाऊद हैं या वानखेड़े.

नवाब मलिक और समीर वानखेड़े में फिर ठनी नवाब मलिक और समीर वानखेड़े में फिर ठनी

सच का वो कैसा आईना है, जो दिन के उजाले में धुंधली सी तस्वीर दिखाता है, झूठ की वो कैसी दीवार है जो गिराए गिरती नहीं. ये कैसा झूठ और सच का खेल है जो सुलझाए नहीं सुलझता. ये सच, ये झूठ, ये आईना, ये दीवार, ये इनकार और ये इकरार. सब, सिर्फ एक नाम से जुड़ा है. समीर वानखेड़े माफ कीजिएगा समीर दाऊद सही कहें तो समीर दाऊद वानखेड़े.

इन तीन लफ्ज़ों की कहानी इतनी पेचीदा है कि एक तरफ समीर उसे उलझा रहे हैं तो वो उलझती नहीं, और दूसरी तरफ नवाब उसे सुलझा रहे हैं तो वो सुलझती नहीं. हालांकि पिछले करीब 2 महीने से उलझते-सुलझते ये कहानी अब सिर्फ उन दो लफ्ज़ों पर आकर टिक गई है. जो ये तय करेगी कि समीर, दाऊद हैं या वानखेड़े. वो कागज हैं समीर का बर्थ सर्टिफिकेट, स्कूल का लीविंग सर्टिफिकेट और उनका मैरिज सर्टिफिकेट.

बकौल नवाब मलिक ये कागज़ी दस्तावेज़ इस बात की गवाही दे रहे हैं कि समीर वानखेड़े, असल में समीर दाऊद वानखेड़े हैं, वो जब पैदा हुए तो मुसलमान थे, जब स्कूल गए तो मुसलमान थे और जब शबाना कुरैशी से उन्होंने शादी की तो भी वो मुसलमान ही थे. समीर को दाऊद यानी मुसलमान साबित करने के पीछे नवाब मलिक की ये जद्दोजहद महज़ इस बात के लिए है क्योंकि वो ये साबित करना चाहते हैं कि समीर वानखेड़े ने दलित कोटे से जो नौकरी हासिल की है, वो फर्ज़ीवाड़े का नतीजा है. जबकि दूसरी तरफ समीर वानखेड़े, उनकी बहन, उनकी दूसरी बीवी और पर्दे के पीछे से कुछ सियासी लोग नवाब मलिक को झूठा बताकर, समीर को दलित हिंदू साबित करना चाहते हैं.  

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समीर वानखेड़े या समीर दाऊद वानखेड़े दलित हिंदू हैं या फिर मुसलमान इसे समझने के लिए हमें थोड़ा पीछे जाना पड़ेगा लेकिन उससे पहले नवाब मलिक ने समीर के मुसलमान होने की जो ताज़ा निशानी पेश की है, उसे बारीकी से देखने की ज़रूरत है.

मुंबई के दादर का सेंट पॉल हाईस्कूल, जहां से एनसीबी के डॉयरेक्टर समीर वानखेड़े ने प्राइमरी एजूकेशन हासिल की. उनके स्कूल छोड़ने के सर्टिफिकेट में समीर वानखेड़े का नाम वानखेड़े समीर दाऊद लिखा है, उसके फौरन नीचे की तरफ रिलीजन यानी मज़हब के कॉलम में लिखा है मुस्लिम. इसके बाद उनका नाम वडाला के सेंट जॉसेफ हाईस्कूल में लिखाया गया, यहां के भी स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट में समीर का नाम वानखेड़े समीर दाऊद लिखा है और रिलीजन मुस्लिम लिखा है. 

इसके अलावा इसमें उनकी डेट ऑफ बर्थ भी लिखी हुई, 14 दिसंबर 1979. इससे पहले एनसीपी नेता और मौजूदा महाराष्ट्र सरकार में मंत्री नवाब मलिक समीर वानखेड़े का निकाहनामा भी पेश कर चुके हैं, जिससे ये साफ होता है कि शबाना कुरैशी से शादी के वक्त तक समीर वानखेड़े ना सिर्फ मुसलमान थे बल्कि नमाज़ रोज़ा करने वाले परहेज़गार मुसलमान थे.

नवाब मलिक ने समीर वानखेड़े से जुड़े कई दस्तावेज सार्वजनिक किए हैं, जिसमें ये दावा किया गया है कि समीर वानखेड़े एक पैदाइशी मुस्लिम हैं और उन्होंने दलित वर्ग के झूठे कागजातों के सहारे आईआरएस की नौकरी हासिल की है. मलिक ने ये भी दावा किया कि समीर वानखेड़े के पिता भी धर्मांतरण कर मुस्लिम बन गए थे. बकौल नवाब मलिक वो समीर वानखेड़े के धर्म पर सवाल नहीं उठा रहे हैं, बल्कि आईआरएस की नौकरी हासिल करने की वैधता पर सवाल उठा रहे हैं. हालांकि समीर और उनके घरवाले इन सभी आरोपों से इत्तेफाक नहीं रखते हैं.

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इससे पहले नवाब मलिक ने 26 आरोपों वाली एक चिट्ठी भी सार्वजनिक की थी, जिसमें नवाब मलिक का दावा है कि ये चिट्ठी एनसीबी के ही एक अधिकारी ने उन्हें दी है. जिसमें समीर वानखेड़े के खिलाफ संगीन आरोप हैं. 26 इल्जामों की इस लिस्ट में कहा गया है कि केस नंबर 03/2021 में समीर खान को झूठे केस में अरेस्ट करके 200 किलो तंबाकू को गांजा दिखाकर गलत तरीके से केस बनाया गया और वित्तीय लेन-देन का आरोप लगाकर NDPS की धारा 27ए का दुरुपयोग किया गया. 

आपको बता दें कि ये समीर खान नवाब मलिक के दामाद हैं और एनसीबी उन्हें पकड़ चुकी है, हालांकि समीर खान जमानत पर बाहर आ चुके हैं. नवाब मलिक ने इस चिट्ठी को अपने ट्विटर हैंडल पर भी शेयर किया है. उस चिट्ठी में इल्जाम है कि कैसे झूठे मामलों में वानखेड़े बेगुनाहों को फंसाते हैं. 

नवाब मलिक के हमलों की धार तेज होती देख अब समीर वानखेड़े के बचाव में उनका परिवार भी उतर आया है. नवाब मलिक के आरोपों को लेकर समीर वानखेड़े के बचाव में उनती पत्नी क्रांति रेडकर और बहन यास्मीन भी मीडिया के सामने आईं, उन्होंने समीर के पिता का जाति सर्टिफिकेट जारी कर नवाब मलिक के आरोपों को झूठा करार दिया. बहन यास्मीन ने कहा कि समीर वानखेड़े के पूरे गांव का सर्टिफिकेट देख लीजिए, एक इंसान झूठा सर्टिफिकेट बनवा सकता है, पूरा गांव नहीं बनवा सकता. यास्मीन ने नवाब मलिक को चुनौती दी कि अगर उनके पास ऐसे दस्तावेज हैं तो वे कोर्ट क्यों नहीं जाते? वो मीडिया के सामने समय क्यों बर्बाद कर रहे हैं.

अब आते हैं उस सवाल पर कि आखिर नवाब मलिक समीर वानखेड़े के पीछे इस कदर हमलावर क्यों हैं? आज समीर को लेकर महाराष्ट्र में सियासी घमासान मचा हुआ है, लेकिन ये पहली बार नहीं है, जब समीर के किसी एक्शन के रिएक्शन में ऐसा बवाल खड़ा हुआ हो. महज़ 13 साल के करियर में समीर वानखेड़े कई बार विवादों में घिर चुके हैं. खासकर सिनेमा और टीवी जगत की बड़ी-बड़ी हस्तियों को लेकर उनके प्यार की वजह से. समीर पर इल्ज़ाम लगते हैं कि वो सिर्फ सेलेब्रेटीज़ को ही निशाना बनाते हैं ताकि उनकी वजह से वो नाम कमा सकें.

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2008 में अपने करियर की शुरुआत से ही वो ऐसे ऐसे मामलों में ही हाथ डालते आए हैं, जिससे उन्हें सुर्खियां मिले. मसलन इंडियन रेवन्यू सर्विसेज ज्वाइन करने के बाद मुंबई के छत्रपति शिवाजी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हुई उनकी पहली पोस्टिंग में उन्होंने साल 2011 में इंडियन क्रिकेट टीम के वर्ल्ड कप जीतने के बाद मुंबई एयरपोर्ट पर ट्रॉफ़ी को सीज़ कर लिया था. इसी तरह साल 2013 में समीर वानखेड़े ने मशहूर गायक मीका सिंह को भी एयरपोर्ट पर ही रोक लिया था. 

यही वजह रही कि करियर के शुरुआती सालों में ही समीर वानखेड़े को एक के बाद एक इनकम टैक्स, एयर इंटेलीजेंस यूनिट और नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी में कई अहम पदों पर पोस्टिंग मिलती चली गई. 2020 में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो में पोस्टिंग मिलने के बाद से तो उनका सारा फोकस फिल्म और टीवी इंडस्ट्री पर आकर टिक गया. इस दौरान कई हस्तियां उनके हत्थे चढ़ीं मसलन अनुराग कश्यप, विवेक ओबरॉय, राम गोपाल वर्मा, रिया चक्रवर्ती, उनके भाई शौविक चक्रवर्ती और अब आर्यन खान.

NCB के जोनल डायरेक्टर समीर वानखेड़े पर ड्यूटी के दौरान फर्जी केस के दम पर वसूली करने, बीवी के नाम पर बेनामी संपत्ति जमा करने, आर्यन खान मामले में 25 करोड़ की डील में शामिल होने जैसे कई संगीन आरोप लग चुके हैं. समीर वानखेड़े के  खिलाफ इंटरनल एंक्वायरी भी चल रही है, लेकिन कहानी में नया मोड़ तब आया जब वानखेड़े पर भ्रष्टाचार और सर्टिफिकेट में फर्जीवाड़े का आरोप लगाते हुए महाराष्ट्र के मंत्री नवाब मलिक इस मामले में कूद गए. 

नवाब मलिक ने उन पर पर दो शादियां करने, नौकरी के लिए धर्म बदलने जैसे कई गंभीर आरोप लगाए हैं. इस मामले की तपिश तब और बढ़ गई जब नवाब मलिक ने इस मामले में उनके परिवार को भी शामिल कर लिया. नवाब मलिक ने समीर वानखेड़े के साथ-साथ उनके पिता ज्ञानदेव वानखेड़े पर भी धर्म बदलने के आरोप लगा दिए. समीर के परिवार ने उनकी दूसरी शादी की बात तो मानी लेकिन धर्म बदलने के आरोपों से इनकार कर दिया. इसके अलावा समीर वानखेड़े खुद सेशन कोर्ट में दिए अपने शपथ पत्र में निजी ज़िंदगी से जुड़े कई तथ्य कोर्ट के सामने रखे. 

समीर वानखेड़े ने बर्थ सर्टिफिकेट और 2006 में शबना कुरैशी से शादी पर जवाब देते हुए कोर्ट में कहा, 'मैं यह व्यक्त करना चाहता हूं कि मेरे पिता ज्ञानदेव काचरूजी वानखेड़े 30 जून 2007 को राज्य आबकारी विभाग, पुणे से वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक के रूप में सेवानिवृत्त हुए हैं. मेरे पिता एक हिंदू हैं और मेरी मां ज़ाहीदा मुस्लिम थीं. मैं सच्ची भारतीय परंपरा में एक समग्र, बहुधार्मिक और धर्मनिरपेक्ष परिवार से ताल्लुक रखता हूं. मुझे अपनी विरासत पर गर्व है. इसके अलावा, मैंने 2006 में विशेष विवाह अधिनियम, 1954 के तहत एक नागरिक विवाह समारोह में डॉ शबाना कुरैशी से शादी की. हम दोनों ने वर्ष 2016 में विशेष विवाह अधिनियम के तहत सिविल कोर्ट के माध्यम से पारस्परिक रूप से तलाक ले लिया. बाद में वर्ष 2017 में, मैंने शियामती क्रांति दीनानाथ रेडकर से शादी की.'

आपको बता दें कि समीर 29 मार्च 2017 को मराठी अभिनेत्री क्रांति रेडकर से शादी की थी, क्रांति गंगाजल जैसी हिंदी फिल्मों में भी काम कर चुकी हैं. इसके अलावा 22 मराठी फिल्मों में वो बतौर अभिनेत्री या फिर फिल्म डायरेक्टर के रूप में काम कर चुकी हैं. भले ही शादी और रिश्ते को लेकर समीर और उनके परिवार ने सभी आरोपों के जवाब दे दिए हों लेकिन उन पर लगे बाकी आरोपों पर अभी भी ससपेंस बना हुआ है. उनके केस में बेहद तेज़ी से नए बदलाव आ रहे हैं. 

 

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