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यूपीः महाराजगंज के मंदिर में डबल मर्डर, खून से लथपथ मिली पुजारी-पुजारिन की लाश

नेपाल निवासी 68 वर्षीय महिला पुजारी पिछले 25 साल से कारण देवी मंदिर में रहकर पूजा अर्चन करती थी. 23 वर्षीय पुजारी रामरतन मिश्र भी मंदिर में पूजा का कार्य करता था. वह र्महदेईया गांव के ही रहने वाला था.

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मंदिर में डबल मर्डर की सूचना मिलते ही पुलिस के आला अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए मंदिर में डबल मर्डर की सूचना मिलते ही पुलिस के आला अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए
स्टोरी हाइलाइट्स
  • इंडो-नेपाल बॉर्डर के महदेईया गांव की घटना
  • नेपाल की रहने वाली थी 68 वर्षीय पुजारिन
  • महदेईया गांव का ही रहने वाला था पुजारी रामरतन

उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले में दोहरे हत्याकांड से सनसनी फैल गई. जहां एक मंदिर में रहने वाले पुजारी और एक पूजारिन की बेरहमी से हत्या कर दी गई. दोनों की खून से लथपथ लाशें मंदिर परिसर से बरामद की गई हैं.

डबल मर्डर की ये वारदात इंडो नेपाल बॉर्डर के सीमावर्ती थानाक्षेत्र महदेईया की है. जहां नेपाल निवासी 68 वर्षीय महिला पुजारी पिछले 25 साल से कारण देवी मंदिर में रहकर पूजा अर्चन करती थी. 23 वर्षीय पुजारी रामरतन मिश्र भी मंदिर में पूजा का कार्य करता था. वह र्महदेईया गांव के ही रहने वाला था. 

ग्रामीणों के मुताबिक नेपाल धकधईया चेनपुरवा की रहने वाली 68 वर्षीय महिला कलावती देवी पिछले 25 साल से मंदिर में पुजारी के तौर पर रहा करती थी. दोनों का व्यवहार बहुत शालीन था. इन दोनों की हत्या की सूचना मिलते ही जिले के एसपी प्रदीप गुप्ता भी मौके पर पहुंच गए. जांच पड़ताल के लिए फॉरेंसिक टीम और डॉग स्क्वायड को भी मौके पर बुलाया गया.

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इस घटना को लेकर पुलिस ग्रामीणों से पूछताछ कर रही है. लेकिन अभी तक हत्या की वजह का पता नहीं चल पाया है. थाना परसा मलिक पुलिस ने दोनों शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए हैं. पुलिस अब मामला दर्ज कर छानबीन में जुट गई है. दोनों पुजारियों की हत्या से ग्रामीण काफी दुखी हैं.

पुलिस के मुताबिक बीती रात दोनों की हत्या को अंजाम दिया गया. लेकिन हत्या क्यों की गई, इस सवाल का जवाब मिलना अभी बाकी है. अब पुलिस पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हत्यारे कौन हैं? एसपी प्रदीप गुप्ता ने बताया कि मामले की छानबीन की जा रही है. जल्द ही आरोपी पुलिस की गिरफ्त में होंगे.

पांच माह पहले पुजारी को मिला था 14 लाख मुआवजा
मंदिर में रहने वाले पुजारी राम रतन मिश्र के खेत को रोहिन नदी पर बनने वाले बैराज के लिए अधिग्रहित किया गया था. जिसके मुआवजे के रूप में उनसे 14 लाख रुपये मिले थे. वैसे भी उनकी आर्थिक हालत बहुत अच्छी थी. ग्रामीणों के मुताबिक अपने निजी खर्चे से ही उन्होंने मंदिर का निर्माण कराया था. 

 

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