मई के अंत में और जून की शुरुआत में कुछ समय के लिए दिखाई दिया कि महाराष्ट्र में कोविड-19 महामारी का असर स्थिर हो रहा है. मुंबई में जो केस तेजी से बढ़ रहे थे उनकी रफ्तार धीमी हो गई. महाराष्ट्र के अन्य शहरों में नए केस आ थे लेकिन राज्य में कुल वृद्धि दर कम हो रही थी. लेकिन पिछले कुछ हफ्तों से वो गणनाएं फिर उलटी हो गईं क्योंकि कोरोना वायरस को फैलने के लिए नई दिशाएं मिल गईं.
महामारी की शुरुआत से, या कम से कम मार्च के मध्य के बाद से, महाराष्ट्र में लगातार भारत में सबसे अधिक केस सामने आए हैं 11.2 करोड़ आबादी के साथ महाराष्ट्र देश में उत्तर प्रदेश के बाद दूसरा सबसे बड़ा राज्य है. महाराष्ट्र में बीमारी की शुरुआत पुणे से हुई और फिर इसने मुंबई में तेजी से पैर पसारे. 23 जुलाई तक, महाराष्ट्र में 3,37,607 कुल पुष्ट केस थे. स्पेन में कुल केस 2,67,551 और ब्रिटेन में 2,96,377 थे. अगर महाराष्ट्र एक देश होता, तो यह दुनिया में आठवें सबसे ज्यादा केस वाला देश होता. लेकिन 23 जुलाई को महाराष्ट्र में जो नए केस आए वो स्पेन और ब्रिटेन को भी मिलाकर ज्यादा थे. 23 जुलाई को महाराष्ट्र में 10,576 नए केस सामने आए. जबकि स्पेन में इनकी संख्या 1357 और ब्रिटेन में 560 रही.

अपनी आबादी के अनुपात में, महाराष्ट्र में केसों की संख्या अपेक्षाकृत कम बनी हुई है. सभी प्रभावित देशों की तुलना में इसकी संक्रमण दर अधिक है. सबसे प्रभावित देशों में महाराष्ट्र की तुलना में अधिक संक्रमण दर है. महाराष्ट्र में स्पेन और ब्रिटेन को मिलाकर भी तुलना में बड़ी आबादी है, इसलिए क्या ऐसी तुलना करना अनुचित है? महाराष्ट्र स्पेन और ब्रिटेन की तुलना में हर दिन अधिक नए केस और मौतें रिपोर्ट कर रहा हो सकता है. लेकिन दोनों यूरोपीय देशों ने जितने टेस्ट किए हैं, महाराष्ट्र ने उनकी तुलना में 10 प्रतिशत से भी कम टेस्टिंग की है.

23 जुलाई को, महाराष्ट्र में 10,000 से अधिक नए केस सामने आए और 280 मौतें रिपोर्ट हुईं, इसी दिन स्पेन में 1,300 से अधिक नए केस आए और दो मौतें हुईं. वहीं ब्रिटेन 600 से कम नए केस रिपोर्ट हुए और 80 मौतें हुईं. महाराष्ट्र में कुल मौतों का आंकड़ा 12,556 हैं जो स्पेन और ब्रिटेन से कहीं कम है. स्पेन में 28,426 और ब्रिटेन में 45,501 मौतें हुई हैं.
हालांकि, महाराष्ट्र ने हर दस लाख की आबादी पर 14,000 से कम टेस्ट किए हैं; वहीं स्पेन ने दस लाख की आबादी पर 1.35 लाख और बिटेन ने 2.04 लाख टेस्ट किए हैं.
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महाराष्ट्र की समस्या सिर्फ केसों की ऊंची संख्या नहीं है. समस्या ये है कि महाराष्ट्र जैसे चाहता था, वैसे केसों की वृद्धि को धीमा करने में सक्षम नहीं हुआ है. मार्च के अंत में, तमिलनाडु में केस महाराष्ट्र की तुलना में तेजी से बढ़ रहे थे. तमिलनाडु महाराष्ट्र के बाद सबसे ज्यादा केसों वाला राज्य है. लेकिन मई के मध्य तमिलनाडु में केस वृद्धि धीमी हो गई है. स्थिति यह है कि अब दोनों राज्यों में केस दोगुने होने में लगने वाले समय में बहुत कम अंतर है. दूसरी ओर, महाराष्ट्र पिछले महीने के दौरान अपनी केस वृद्धि दर में ज्यादा बदलाव नहीं कर पाया है. दोनों राज्यों में, केस दोगुने होने की अवधि 24 दिनों से कम है, जबकि राष्ट्रीय औसत 20 दिनों से कम का है.
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राज्य-स्तरीय औसत सही तस्वीर नहीं पेश करते. महाराष्ट्र के केस तेजी से बढ़ रहे हो सकते हैं, लेकिन केसों के सामने आने की भौगोलिक संरचना नाटकीय रूप से बदल गई है. अब तक राज्य में अधिकतर केसों के लिए नौ नगर निगम जिम्मेदार रहे हैं. इन निगमों में एक मुंबई में, दो पुणे जिले में और छह ठाणे जिले में हैं. लेकिन यह स्थिति लगातार बदल रही है. पिछले महीने केसों की बढ़ती हिस्सेदारी पुणे जिम्मेदार रहा. जबकि नए केसों की संख्या में ठाणे की हिस्सेदारी घट रही है.

शेष महाराष्ट्र (मुंबई, पुणे और ठाणे के अलावा) के कुल केसों का हिस्सा 20 मई के बाद से अब दोगुना हो गया है. यह हिस्सा 20 मई को 16 फीसदी था जो 20 जुलाई को बढ़कर 31 प्रतिशत हो गया. इसी अवधि में नए केसों में शेष महाराष्ट्र की हिस्सेदारी भी 13 प्रतिशत से बढ़कर 44 प्रतिशत हो गई.
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महाराष्ट्र के लिए सबसे अधिक चिंता का विषय राज्य के ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों की केसों में बढती हिस्सेदारी है. 20 जुलाई को, महाराष्ट्र के 27 नगर निगमों के बाहर से एक चौथाई नए केस सामने आए, जो कोल्हापुर, सोलापुर और अकोला के ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों से थे. अभी दो महीने पहले तक ये क्षेत्र महाराष्ट्र के नए केसों में केवल 4 प्रतिशत से थोड़ा अधिक हिस्सा दिखा रहे थे. राज्य के ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के कुल केसों की हिस्सेदारी 20 मई को 6 प्रतिशत से बढ़कर 20 जुलाई को 17 प्रतिशत से अधिक यानि तीन गुना हो गईं.
तीन बड़े शहरों पर ही फोकस रखने का खामियाजा अब महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों मे भी केसों की वृद्धि में देखने को मिल रहा है.