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ट्रेड डील की धमक भी धड़ाम, शेयर बाजार में फिर कोहराम, इतने बड़े-बड़े दांव... किस काम के?

Indian Market Fall: अमेरिका से ट्रेड डील के बाद उम्मीद थी कि अब बाजार में एकतरफा रैली देखने को मिल सकती है, क्योंकि रिफॉर्म को लेकर कई बड़े कदम उठाए गए, लेकिन बाजार ठंडा पड़ा रहा.

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शेयर बाजार में फिर बड़ी गिरावट. (Photo: ITG)
शेयर बाजार में फिर बड़ी गिरावट. (Photo: ITG)

भारतीय शेयर बाजार (Share Market) को क्या हो गया है? बुरी खबर आई तो उसपर गिरा, रूस-यूक्रेन में युद्ध हुआ तो बाजार गिरा, अमेरिका-ईरान में तनातनी से बाजार गिरा, अमेरिका की वेनेजुअला में एंट्री हुई तो उसपर भी बाजार गिरा. हालांकि इन घटनाक्रमों से वैश्विक बाजारों में भी गिरावट देखने को मिली थी, तो भारत अछूता नहीं रह सकता था. 

लेकिन दुनिया के बाजारों में जब तेजी का माहौल था, तब भी भारतीय बाजार गिर रहे थे, और अब जब एक के बाद एक कई अच्छी खबरें आईं, तो हर किसी को उम्मीद थी कि अब बाजार में एकतरफा रैली देखने को मिल सकती है, क्योंकि रिफॉर्म को लेकर कई बड़े कदम उठाए गए, लेकिन बाजार ठंडा पड़ा रहा. आज हम आपको एक-एक ऐसे कदम के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे बाजार के लिए ट्रिगर पॉइंट माना जा रहा था, लेकिन कुछ भी नहीं हुआ. मानो बाजार को सांप सूंघ गया हो. 

बाजार फिर बेदम क्यों?

दरअसल, कारोबारी हफ्ते के आखिरी दिन यानी 13 फरवरी को निफ्टी करीब 25500 अंक के आसपास बना हुआ है, जनवरी- 2026 में निफ्टी ने 26,373 अंक का ऑल टाइम हाई (All Time High) लगाया था. पिछले 6 महीने में अर्थव्यवस्था से जुड़े कई फैसले लिए गए, लेकिन इन 6 महीनों में निफ्टी ने महज 4 फीसदी की तेजी दिखाई है. 

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पिछले 6 महीने में बड़े फैसले के तौर पर पहला जीएसटी रिफॉर्म का नाम आता है, लेकिन बाजार ठंडा पड़ा रहा. उसके बाद केंद्रीय बैंक आरबीआई ने लगातार ब्याज दरों में कटौती की. लेबर रिफॉर्म को लेकर बड़े कदम उठाए गए. जीडीपी के आंकड़ों में लगातार सुधार देखने को मिल रहे हैं, उसके बाद खुदरा महंगाई दर आरबीआई द्वारा निर्धारित दायरे बनी हुई है.

हाल के दिनों में यूरोपीय संघ (EU) के साथ FTA को भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर बड़ा स्टेप माना जा रहा है, उसके बाद बजट में पूंजीगत खर्च पर जोर दिया गया, फिर बजट के अगले दिन अमेरिका से डील की खबर आ गई. लगा अब कुछ ठीक हो गया है, क्योंकि अमेरिका से ट्रेड को बाजार के लिए सबसे बड़ा टर्निग पॉइंट माना जा रहा था, पिछले 10 महीने से दोनों देशों के बीच इसको लेकर बातचीत चल रही थी. 

अमेरिका से डील के अगले दिन यानी 3 फरवरी को बाजार जोरदार तेजी देखने को मिली, तमाम एक्सपर्टस कहते दिखे कि अब जल्द ही बाजार नया ऑल टाइम बनाने वाला है, लेकिन एक हफ्ते में ही बाजार बेदम हो गया. जहां से बाजार चला था, एक हफ्ते बाद वहीं पर लुढ़क कर पहुंच गया है यानी बाजार के लिए अमेरिका-भारत डील भी ट्रिगर पॉइंट साबित नहीं हो पाया है. 

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अमेरिका से डील होते ही विदेशी निवेशक भी भारतीय बाजार में लौट आए हैं, लेकिन इतने मजबूत फैक्टर्स के बावजूद बाजार तेजी दिखाने का नाम नहीं ले रहा है, इस दौरान तीसरी तिमाही के अच्छे नतीजों को भी बाजार पचा ले गया.  निवेशक टेंशन में हैं कि अब किस चीज का बाजार इंतजार कर रहा है? 

दरअसल, अमेरिका से डील की खबर से पहले NIFTY 50 करीब 25,500 के आसपास था, फिर गिरकर दोबारा वहीं आ गया. आइए जानते हैं कि ऐसा क्यों हो रहा है?

1. कुछ कंपनियों के वैल्यूएशन महंगे
कई बड़ी कंपनियों के शेयर पहले से हाई P/E रेशियो पर ट्रेड कर रहे हैं. जब वैल्यूएशन महंगे हों, तो नई तेजी के लिए या तो बहुत मजबूत कमाई (Earnings) चाहिए या फिर बड़ी विदेशी लिक्विडिटी. फिलहाल अभी दोनों सीमित हैं, इसलिए बाजार दायरे में फंसा है. जीडीपी बढ़ रही है, लेकिन हर सेक्टर की कमाई उसी रफ्तार से नहीं बढ़ी है, कुछ कंपनियों के तिमाही नतीजे औसत रहे.

2. ग्लोबल अनिश्चितता का दबाव
अमेरिका और यूरोप से डील भारत से बेहद बड़ा और सकारात्मक फैसला है, लेकिन दुनिया में अनिश्चितता बनी हुई है, अमेरिकी ब्याज दर नीति, चीन की धीमी अर्थव्यवस्था और भू-राजनीतिक तनाव. विदेशी फंड ऐसे माहौल में पूरी ताकत से जोखिम नहीं लेते.

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3. सीमित सेक्टर में FII की वापसी 
FII का पैसा चुनिंदा सेक्टर, जैसे बैंकिंग और कैपिटल गुड्स में जा रहा है. मिडकैप और स्मॉलकैप में अभी भी दबाव है, क्योंकि निवेशक दांव लगाने से बच रहे हैं. 

ऐसे में निवेशकों के पास इंतजार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है, क्योंकि मौजूदा समय में बाजार गिरने का सबसे बड़ा कारण ग्लोबल सेंटिमेंट को खराब होना है. अमेरिकी टेक कंपनियों में भूचाल मचा है, जिसका असर भारतीय आईटी कंपनियों पर भी देखने को मिल रहे हैं.

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