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हर रोज मिल रहीं नौकरियां, 4 साल में 44 लाख रोजगार देगा ये सेक्टर, सरकार की बड़ी तैयारी

Jobs Alert: रूफटॉप सोलर प्रति मेगावाट (MW) 45 नौकरियां पैदा करता है. इसके विपरीत जमीन पर लगने वाले बड़े मेगा सोलर प्रोजेक्ट्स प्रति मेगावाट केवल 1 नौकरी और विंड (पवन) एनर्जी सिर्फ 0.6 नौकरी पैदा कर पाती है.

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सौलर सेक्टर में रोजगार ही रोजगार. (Photo: ITG)
सौलर सेक्टर में रोजगार ही रोजगार. (Photo: ITG)

भारत के रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है, आने वाले कुछ वर्षों में ये सेक्टर रोजगार के लिए सबसे शानदार विकल्प बनने वाला है. काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (CEEW) और नेचुरल रिसोर्सेज डिफेंस काउंसिल (NRDC India) के एक संयुक्त रिसर्च के मुताबिक देश के क्लीन एनर्जी सेक्टर में छतों पर लगने वाले सोलर पैनल रोजगार पैदा करने के मामले में सबसे बड़ा इंजन बनकर उभरे हैं.

भारत का रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर इस समय दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते बाजारों में से एक है. ग्लोबल वार्मिंग को कम करने के वैश्विक संकल्प और भारत की बढ़ती ऊर्जा की मांग के बीच, यह सेक्टर सिर्फ पर्यावरण के लिहाज से नहीं, बल्कि आर्थिक निवेश, शेयर बाजार और रोजगार के नजरिये से भी सबसे बड़ा हॉटस्पॉट बन चुका है.

रोजगार के बड़े अनुमान
दरअसल, भारत के 500 GW नॉन-फॉसिल फ्यूल क्षमता के लक्ष्य और नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के बल पर साल 2030 तक इस सेक्टर में कुल 44 लाख फुल-टाइम नौकरियां पैदा होने का अनुमान है. इस 44 लाख नौकरियों में से अकेले 43% हिस्सेदारी रूफटॉप सोलर सेक्टर की होगी.

बता दें, पिछले 3 वर्षों में क्लीन एनर्जी सेक्टर में जोड़े गए कुल 6,50,000 कर्मचारियों में से अकेले रूफटॉप सोलर ने 62% कार्यबल को रोजगार दिया. इसके बाद अन्य सेक्टर्स का स्थान रहा. PM-KUSUM के तहत 16.3%, बायोमास पावर के तहत 12.6% और ग्राउंड-माउंटेड सोलर (बड़े सोलर पार्क) के तहत 6% लोगों को रोजगार मिला. 

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रूफटॉप सोलर में इतनी नौकरियां क्यों?
रिसर्च में एक बहुत दिलचस्प तुलना की गई है कि डिसेंट्रलाइज्ड एनर्जी सिस्टम बड़े प्रोजेक्ट्स के मुकाबले कहीं ज्यादा Jobs-Intensive होते हैं. रूफटॉप सोलर प्रति मेगावाट (MW) 45 नौकरियां पैदा करता है. इसके विपरीत जमीन पर लगने वाले बड़े मेगा सोलर प्रोजेक्ट्स प्रति मेगावाट केवल 1 नौकरी और विंड (पवन) एनर्जी सिर्फ 0.6 नौकरी पैदा कर पाती है.

बड़े सोलर पार्क एक ही जगह पर बन जाते हैं, जबकि रूफटॉप सोलर को घर, दुकान और बिल्डिंग में जाकर लगाना पड़ता है. इसके लिए कस्टमर आउटरीच, साइट सर्वे, डिजाइनिंग, इंस्टॉलेशन, ग्रिड कनेक्टिविटी और लगातार मेंटेनेंस के लिए बहुत ज्यादा ग्राउंड स्टाफ की जरूरत होती है.

इस इंडस्ट्रीज में महिलाओं की भागीदारी
सोलर और विंड सेक्टर के कुल वर्कफोर्स में महिलाओं की भागीदारी केवल 11% है. वहीं महिलाओं की सबसे ज्यादा भागीदारी भी रूफटॉप सोलर (15%) में ही देखी गई है. हालांकि, क्लीन एनर्जी में काम करने वाली 61% महिलाएं अभी भी नॉन-टेक्निकल रोल (जैसे HR, अकाउंट्स और एडमिनिस्ट्रेशन) में हैं. 

इसी कड़ी में सरकार की 'पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना' जैसी पहल से देश को एनर्जी सेक्टर  में आत्मनिर्भर बना रही हैं. इसके तहत 1 करोड़ घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाने का लक्ष्य है, जिससे परिवारों को 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली मिलेगी और ग्रिड को अतिरिक्त पावर मिलेगा. सोलर सेल और मॉड्यूल की मैन्युफैक्चरिंग को भारत में ही बढ़ावा देने के लिए कंपनियों को वित्तीय सहायता दी जा रही है ताकि चीन पर निर्भरता कम हो सके. 

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PM-KUSUM योजना के तहत किसानों को सिंचाई के लिए डीजल पंपों की जगह सोलर पंप लगाने के लिए भारी सब्सिडी दी जा रही है.

इस सेक्टर के विस्तार से रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन, केबल्स, इनवर्टर और सोलर कंपोनेंट्स बनाने वाली लिस्टेड कंपनियों (जैसे Tata Power, Borosil Renewables, Sterling & Wilson) के बिजनेस वॉल्यूम में आने वाले सालों में मजबूत विजिबिलिटी बनी रहेगी.

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