अचानक पैसे चाहिए, खासकर मेडिकल इमरजेंसी में लोग इधर-उधर उधार के लिए भागने लगते हैं, ऐसी स्थिति में प्री-अप्रूव्ड पर्सनल लोन का विकल्प सामने आता है, क्योंकि कम डॉक्यूमेंट्स में तुरंत लोन मिल जाता है.
दरअसल, स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती लागत और हर साल करीब 12-15% की मेडिकल इंफ्लेशन बढ़ने से लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ रही है. ऐसे में पर्याप्त हेल्थ इंश्योरेंस न होने पर कई परिवारों को पर्सनल लोन पर निर्भर रहना पड़ता है. प्री-अप्रूव्ड पर्सनल लोन के बारे में Paisabazaar के CEO संतोष अग्रवाल ने पूरी जानकारी दी है. उन्होंने बताया कब, कैसे और कहां से लेना चाहिए?
आम पर्सनल लोन के लिए आवेदन के बाद मंजूरी का इंतजार करना पड़ता है. यानी लोन मिलेगा या नहीं. इस चक्कर में काफी वक्त निकल जाता है. ऐसे समय में प्री-अप्रूव्ड पर्सनल लोन काफी उपयोगी साबित होते हैं. क्योंकि फटाफट मिल जाता है.
प्री-अप्रूव्ड पर्सनल लोन का कैसे करें यूज?
बैंक और NBFC आमतौर पर अपने मौजूदा ग्राहकों को प्री-अप्रूव्ड पर्सनल लोन ऑफर करते हैं. ऐसे मामलों में लोन राशि अक्सर कुछ ही घंटों में, कई बार तुरंत ही खाते में ट्रांसफर हो जाती है. प्री-अप्रूव्ड ऑफर में पात्रता की जांच पहले से हो चुकी होती है, जिससे लोन प्रक्रिया आसान हो जाती है. इससे क्रेडिट मिलने की निश्चितता बढ़ती है, साथ ही आसान डिजिटल प्रक्रिया और कम समय में लोन डिसबर्सल का लाभ मिलता है.
यह विकल्प लोगों इधर-उधर से कर्ज लेने, क्रेडिट कार्ड पर महंगे लोन लेने या अपने लॉन्ग-टर्म निवेशों को समय से पहले तोड़ने से भी बचा सकता है. प्री-अप्रूव्ड लोन में उधारकर्ताओं को पहले से ही मंजूर लोन राशि और नियम और शर्तों की जानकारी मिल जाती है, जिससे वे बेहतर निर्णय ले पाते हैं और जल्दबाजी में गलत फैसले लेने से बच सकते हैं.
ऐसे लोन की ब्याज दरें ग्राहकों के सिबिल स्कोर के आधार पर तय की जाती है. इसलिए आमतौर पर यह ऑफर चुनिंदा मौजूदा ग्राहकों को उनकी अच्छी क्रेडिट हिस्ट्री के आधार पर आकर्षक दरों पर दिया जाता है.
जिम्मेदारी से उपयोग और जोखिम से जुड़े पहलू
इमरजेंसी की स्थिति में तुरंत फैसला लेना जरूरी होता है, लेकिन लोन लेते समय सावधानी बरतना भी उतना ही महत्वपूर्ण है. सबसे पहले अपनी वास्तविक जरूरतों का आकलन करें और केवल उतनी ही राशि का लोन लें जितनी आपको जरूरत हो.
किसी भी ऑफर को स्वीकार करने से पहले अपनी आय की स्थिरता और मौजूदा देनदारियों को ध्यान में रखते हुए भुगतान क्षमता का वास्तविक आकलन करें.
इसके साथ ही, लोन की कुल लागत को समझना भी जरूरी है. प्रोसेसिंग फीस, लेट पेमेंट पेनल्टी, प्रीपेमेंट या फोरक्लोजर चार्ज जैसे शुल्क आपके लोन की कुल लागत को बढ़ा सकते हैं. इसलिए जिस बैंक या NBFC से आपके पहले से संबंध है, वहां उपलब्ध प्री-अप्रूव्ड ऑफर्स देखें, फिर तुलना करें और सोच-समझकर विकल्प चुनें.
लोन की अवधि भी एक अहम पहलू है, कम अवधि वाले लोन की EMI ज्यादा होती है, लेकिन कुल ब्याज कम देना पड़ता है. वहीं लंबी अवधि के लोन की EMI कम रहती है, लेकिन कुल ब्याज लागत ज्यादा होती है. इसलिए हमेशा ऐसा रीपेमेंट प्लान चुनें जो आपकी वित्तीय क्षमता और कैश फ्लो के अनुरूप हो.
हाल ही में, ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां तुरंत पैसे की जरूरत होने पर लोगों ने अनियमित प्लेटफॉर्म से लोन लिया और बाद में भारी ब्याज या धोखाधड़ी के शिकार हो गए. ऐसी स्थिति से बचने के लिए हमेशा RBI द्वारा विनियमित बैंक और बड़े NBFC से ही लोन लेना चाहिए.