भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील (Trade Deal) हो गई है, इस पर देश में राजनीति भी शुरू हो गई है, विपक्ष का आरोप है कि केंद्र सरकार ने अमेरिकी दबाव में ये समझौता किया है, अमेरिका के लिए उन सेक्टर्स के भी दरवाजे खोल दिए गए हैं, जो कि भारतीय हित में नहीं हैं. लेकिन केंद्र सरकार ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताया है, और ये डील देश को आगे लेकर जाएगा. जहां तक कृषि और डेयरी का सवाल है तो ये दोनों सेक्टर्स डील से बाहर हैं.
दरअसल, भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है. यह समझौता ऐसे समय पर सामने आया है, जब वैश्विक व्यापार अनिश्चितताओं, सप्लाई चेन दबाव और भू-राजनीतिक तनावों से जूझ रहा है. ट्रेड डील के तहत मैन्युफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी, फार्मा, कृषि और सर्विस सेक्टर में बाजार पहुंच आसान होने की उम्मीद है. इससे भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में बेहतर अवसर मिल सकते हैं. वहीं अमेरिकी कंपनियों के लिए भारत निवेश का एक बड़ा ठिकाना बनकर उभरेगा.
सरकार का दावा है कि इस ट्रेड डील से रोजगार पैदा होंगे, निवेश में बढ़ोतरी होगी, और आर्थिक विकास को नई दिशा मिलेगी. लेकिन लोगों में अब भी कंफ्यूजन हैं कि कौन-कौन चीजें सस्ती होंगी. किन-किन भारतीय प्रोडक्ट्स पर टैरिफ कम हुए हैं, जिससे निर्यात में बढ़ोतरी होगी,. इसके अलावा वो कौन-कौन से अमेरिकी प्रोडक्ट्स हैं, जिनपर भारत ने टैरिफ या तो कम या फिर जीरो कर दिया है. पूरी डिटेल्स नीचे दी जा रही है.
सवाल- क्या-क्या चीजें सस्ती होने वाली हैं?
जवाब- अखरोट, बादाम और पिस्ता जैसे ड्राई फ्रूट्स अब भारत में सस्ते हो जाएंगे. पहले इन प्रोडक्ट्स पर भारत में 20 फीसदी से लेकर 100 फीसदी तक की आयात ड्यूटी लगती थी. लेकिन अब अधिकतर प्रोडक्ट्स जीरो ड्यूटी पर आयात किए जाएंगे. यानी भारतीय बाजार ये चीजें सस्ती होने वाली हैं. ये ड्राई फ्रूट्स भारत में बेहद कम उत्पाद होते हैं, पहले से अमेरिका समेत दूसरे देशों से आयात किए जाते हैं, अब ट्रेड डील के बाद अमेरिकी ड्राई फ्रूड्स भारत में और सस्ते हो जाएंगे.
सवाल- अमेरिकी कृषि और डेयरी से जुड़े किन-किन सामानों पर कोई छूट नहीं दी गई है?
जवाब- अमेरिका को मांस, पोल्ट्री, डेयरी, सोयाबीन, मक्का, चावल, गेहूं, चीनी, मोटे अनाज, केले, स्ट्रॉबेरी, चेरी, खट्टे फल, हरी मटर, काबुली चना, मूंग, तिलहन, एथेनॉल और तंबाकू जैसे सामानों पर कोई टैरिफ छूट नहीं दी गई है.
सवाल- इन अमेरिकी सब्जियों और फलों पर भी कोई समझौते नहीं.
जवाब- छिलका रहित अनाज और आटा, आलू, प्याज, मटर, बीन्स, खीरा, मशरूम, फ्रोजन सब्जियां, संतरे, अंगूर, नींबू और मिक्स डिब्बाबंद सब्जियां भी भारत नहीं आएंगी.
सवाल- किन-किन डेयरी प्रोडक्ट्स पर भी अमेरिका से कोई समझौता नहीं हुआ है?
जवाब- अमेरिकी दुग्ध उत्पादों में लिक्विड, पाउडर और कंडेंस्ड दूध, क्रीम, योगर्ट, बटर मिल्क, मक्खन, घी, बटर ऑयल, पनीर, व्हे उत्पाद और चीज को भी भारत में एंट्री नहीं मिलेगी.
सवाल- क्या अमेरिकी मसालों पर भारत ने ड्यूटी घटाई है?
जवाब- नहीं... मसालों में काली मिर्च, लौंग, सूखी हरी मिर्च, दालचीनी, धनिया, जीरा, हींग, अदरक, हल्दी, अजवायन, मेथी, सरसों, राई और अन्य पाउडर मसाले भी नहीं आएंगे.
सवाल- भारत और अमेरिका ट्रेड डील आखिर है क्या?
जवाब- यह एक द्विपक्षीय व्यापार समझौता है, जिसके जरिए दोनों देश आपसी व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग को बढ़ाना चाहते हैं. इसका मकसद टैरिफ कम करना, बाजार तक पहुंच आसान बनाना और कंपनियों के लिए नियमों को ज्यादा पारदर्शी बनाना है.
सवाल- मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में क्या-क्या शामिल हो सकता है?
जवाब- स्टील, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, टेक्सटाइल और केमिकल जैसे क्षेत्रों को कवरेज मिल सकता है. भारतीय उत्पादों पर अमेरिकी टैरिफ में कटौती और अमेरिकी कंपनियों को भारत में उत्पादन के लिए बेहतर माहौल देने पर चर्चा हो सकती है.
सवाल- सेमीकंडक्टर और हाई-टेक सेक्टर में क्या समझौता हो सकता है?
जवाब- चिप मैन्युफैक्चरिंग, रिसर्च एंड डेवलपमेंट और सप्लाई चेन सिक्योरिटी को लेकर सहयोग बढ़ सकता है। अमेरिका की टेक्नोलॉजी और भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को जोड़ने की योजना बन सकती है।
सवाल- आईटी, स्टार्टअप और डिजिटल इकोनॉमी को क्या फायदा मिलेगा?
जवाब- आईटी सर्विसेज, क्लाउड, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और फिनटेक को डील में जगह मिल सकती है। डेटा ट्रांसफर, डिजिटल टैक्स और वीजा से जुड़े नियमों को आसान बनाने पर बातचीत संभव है।
सवाल- फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर कैसे कवर होंगे?
जवाब- भारतीय जेनेरिक दवाओं के लिए अमेरिकी बाजार में मंजूरी की प्रक्रिया आसान हो सकती है. मेडिकल डिवाइसेज, वैक्सीन और हेल्थ रिसर्च में साझेदारी बढ़ने की संभावना है.
सवाल- ऊर्जा और ग्रीन सेक्टर का क्या रोल रहेगा?
जवाब- रिन्यूएबल एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन, इलेक्ट्रिक व्हीकल और क्लीन टेक्नोलॉजी में निवेश बढ़ाने पर जोर हो सकता है. इससे भारत के एनर्जी ट्रांजिशन को गति मिलेगी.
सवाल- निवेश, रोजगार और MSME को क्या लाभ होगा?
जवाब- FDI बढ़ने से रोजगार सृजन होगा. MSME को अमेरिकी सप्लाई चेन से जुड़ने का मौका मिल सकता है, जिससे छोटे उद्योगों को भी वैश्विक बाजार मिलेगा.