हमारे देश में सोने-चांदी से लोगों का भावनात्मक रिश्ता रहा है, शादी में ज्वेलरी खरीदी जाती है, त्योहार में सोना-चांदी खरीदना शुभ माना जाता है. लेकिन सोने-चांदी का एक दूसरा पहलू भी है. भारत में सोना केवल निवेश या ज्वेलरी का माध्यम नहीं है, बल्कि यह देश की अर्थव्यवस्था खासकर विदेशी मुद्रा भंडार और चालू खाता घाटे को भी प्रभावित करता है.
दरअसल, भारत अपनी सोने की खपत का बड़ा हिस्सा आयात करता है और इसका भुगतान अमेरिकी डॉलर में किया जाता है, इसलिए सोने के अधिक आयात से डॉलर की मांग बढ़ती है और अपना रुपया कमजोर हो जाता है. इसी कड़ी में डॉलर बचाने और अर्थव्यवस्था को स्थिर करने के लिए सरकार को समय-समय पर आयात शुल्क में बदलाव करना पड़ता है. केंद्र सरकार ने पहली बार सोने-चांदी पर इम्पोर्ट ड्यूटी नहीं बढ़ाई है, इससे पहले भी कई मौकों पर सोने की खरीदारी पर लगाम लगाने के लिए सरकार को इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ानी पड़ी थी.
आजादी के बाद डॉलर बचाने के लिए भारत सरकार ने 1962 और 1968 में 'गोल्ड कंट्रोल एक्ट' लागू किया था, जिससे लोगों के सोना रखने पर कड़ी पाबंदी लगा दी गई. वहीं साल 1990 के आर्थिक संकट के समय जब भारत के पास केवल कुछ ही हफ्तों का विदेशी मुद्रा भंडार बचा था, तब सरकार ने 1990 में इस कानून को खत्म कर आयात शुल्क की एक सरल व्यवस्था शुरू की थी. उस समय 250 रुपये प्रति 10 ग्राम शुल्क लगाया गया.
मनमोहन सरकार में कई बार बदलाव
साल 2012 में मनमोहन सरकार के दौरान सोने पर कई बार आयात शुल्क बढ़ाए गए थे. साल- 2012 के बजट में तत्कालीन वित्त मंत्री ने शुल्क को 2% से बढ़ाकर 4% किया. उसके बाद साल 2013 में जब रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा और चालू खाता घाटा (CAD) बेकाबू होने लगा, तो सरकार ने महज एक साल के अंदर कई बार आयात शुल्क बढ़ाए. सबसे पहले जनवरी- 2013 में सोने पर आयात 4% से बढ़ाकर 6% कर दिया गया. फिर जून 2013 में इसे बढ़ाकर 8% कर दिया गया. महज दो महीने बाद अगस्त- 2013 डॉलर बचाने के लिए सोने पर आयात शुल्क को बढ़ाकर रिकॉर्ड 10% कर दिया गया. साथ ही '80:20 नियम' लागू किया गया, जिसमें आयात किए गए सोने का 20% हिस्सा निर्यात करना अनिवार्य था.
2019 में भी सोने पर बढ़ा था आयात शुल्क
फिर लंबे समय तक 10% पर रहने के बाद जुलाई 2019 के बजट में सोने पर आयात शुल्क बढ़ाकर 12.5% कर दिया गया. सरकार का तर्क था कि देश के धनी लोग द्वारा खरीदे जाने वाले सोने पर अधिक टैक्स लगाकर डॉलर बचाया जा सकता है.
हालांकि उसके बाद साल 2021 के बजट में इसे घटाकर 7.5% (प्रभावी रूप से 10.75%) किया गया था. लेकिन जुलाई 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण डॉलर की मजबूती और रुपये की गिरावट को देखते हुए सरकार ने इसे फिर से बढ़ाकर 15% (12.5% बेसिक ड्यूटी + 2.5% सेस) कर दिया.
इसके बाद जुलाई 2024 में मोदी सरकार ने तस्करी रोकने और ज्वेलरी उद्योग को राहत देने के लिए शुल्क को 15% से घटाकर 6% कर दिया था. जिससे देश में सोने की कीमतें घट गईं. लोग जमकर खरीदारी करने लगे.
लेकिन एक बार फिर अब वैश्विक संकट की वजह से भारत का आयात बिल तेजी से बढ़ने लगा है, इसे रोकने के लिए सरकार ने 13 मई 2026 को सोने पर प्रभावी आयात शुल्क को फिर से बढ़ाकर 15% कर दिया है. इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के लोगों से अगले एक साल तक सोना-चांदी नहीं खरीदने की अपील की है.