
पहली ही अच्छी नौकरी (Job) मिल गई है, सैलरी (Salary) ठीक-ठाक है. माता-पिता को हर महीने पैसे के देने के बाद भी मोटी राशि बच जा रही है. अब इस पैसे का क्या करें? देश में अधिकतर लोग ऐसी स्थिति में घर (House) या कार (Car) खरीद लेते हैं. क्या ये उचित फैसला होता है? आज हम बताएंगे, पहली नौकरी से ही अगर अच्छी कमाई हो रही है, तो क्या करें? क्या सबसे पहले घर खरीदना चाहिए, कुछ लोग तो कार के पीछे भागते हैं?
दरअसल, हर इंसान का सपना होता है कि उसका अपना एक घर हो, एक गाड़ी हो.. फिर बाकी की चीजें. लेकिन पहले घर होना चाहिए या गाड़ी? इस फैसले को लेकर लोगों में कंफ्यूजन देखने को मिलता है. खासकर युवा वर्ग जो पहली नौकरी के साथ फैसला लेना चाहते हैं. अगर किसी के बहकावे में आकर युवा गलत फैसले ले लेता है, जिसका सीधा असर फ्यूचर प्लान पर पड़ता है.
नौकरी पकड़ते ही पहले घर या कार?
जानकारों की मानें तो पहली नौकरी के साथ ही जरूरतों के हिसाब से लोगों को फैसला लेना चाहिए. आप काम क्या करते हैं, आपका जॉब प्रोफाइल क्या है? इस आधार पर फैसला लेना चाहिए. अगर आप सबसे पहले घर ले लेते हैं तो फिर उस शहर में एक तरह से बंध कर रह जाएंगे. लोग करियर ग्रोथ की वजह से शुरुआती दौर में एक शहर से दूसरे शहर में शिफ्ट हो जाते हैं. लेकिन पहली नौकरी के साथ ही घर खरीद लेने पर अधिकतर लोग नौकरी बदलने की स्थिति में नहीं रहते हैं. क्योंकि नए शहर में जाकर किराये पर रहना और फिर अपने घर को किराये पर देना वो उचित नहीं समझते.

वहीं पहली नौकरी के साथ ही घर खरीद लेने पर लोग बाकी फैसले नहीं ले पाते. क्योंकि आज के दौर में अगर युवा कम से कम 40 लाख रुपये का घर लेता है, 10 फीसदी डाउन पेमेंट (Down Payment) के बावजूद हर महीने होम लोन (Home Loan) के तौर पर 30 से 35 हजार रुपये चुकाने होंगे. ऐसी स्थिति में वो दूसरे फैसले नहीं ले पाते, क्योंकि कमाई का बड़ा हिस्सा EMI के भुगतान में चला जाता है.
कमाई के इतने हिस्से से ले सकते हैं होम लोन
एक नौकरी-पेशा लोगों को तब घर खरीदना चाहिए, जब उन्हें लगे कि उनकी कमाई का 20 से 25 फीसदी हिस्सा ही होम लोन की EMI में जाएगा. उदाहरण के तौर पर अगर आपकी सैलरी 1 लाख रुपये महीने है तो फिर आप 25 हजार रुपये महीने की EMI भर सकते हैं. लेकिन सैलरी 50 से 70 हजार रुपये के बीच है तो फिर बिल्कुल होम लोन लेकर घर बिल्कुल नहीं खरीदना चाहिए, वो इसके चक्कर में फंसकर रह जाते हैं. बाकी वित्तीय फैसले नहीं ले पाते, वैसे भी किराये पर रहकर आप होम लोन की राशि निवेश कर ज्यादा बड़ा फंड जुटा सकते हैं.
जहां तक गाड़ी की बात है तो कार को कभी भी वैल्थ (Wealth) को तौर पर नहीं आंका जाता है. क्योंकि शोरूम से गाड़ी निकलते ही उसकी कीमत कम हो जाती है, यानी गाड़ी खरीदना कभी भी निवेश नहीं माना जाता है. इसके अलावा मेट्रो सिटी में रह रहे हैं तो कैब की सुविधा का लाभ उठा सकते हैं. अगर घर से दफ्तर ज्यादा दूर नहीं है, तो फिर कार खरीदना फैसला गलत माना जाता है.
एक लाख से कम कमाई पर कार का फैसला गलत
वहीं ऊपर वाला फॉर्मूला यहां भी इस्तेमाल कर सकते हैं. अगर सैलरी एक लाख रुपये महीने है तो 10 फीसदी राशि यानी 10,000 रुपये महीने की EMI पर कार खरीद सकते हैं. लेकिन वित्तीय जानकार ये सलाह देते हैं कि अगर सैलरी एक लाख रुपये के कम हैं तो फिर कार खरीदने का फैसला टाल दें, अगर खरीदना जरूरी ही है तो फिर 2 से 3 लाख रुपये में सेकंड हैंड कार खरीदें, जो कि एक बेहतरीन फैसला होगा.
गौरतलब है कि कुछ लोग पहली नौकरी के साथ ही घर और कार खरीद कर अपने ऊपर EMI की बोझ डाल लेते हैं. जो आगे चलकर बिल्कुल गलत फैसला साबित है. इसलिए जरूरत के हिसाब से फैसले लें. कमाई को आधार बनाकर फैसले लेंगे तो वित्तीय मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है. एक और काम की बात ये है कि पहली नौकरी के साथ ही अगर सेविंग (Saving) की शुरुआत कर देंगे तो 40 साल की उम्र में आप अपने रिटायरमेंट को लेकर आश्वस्त हो जाएंगे.