भारत के नए ग्रेच्युटी नियम के तहत कर्मचारियों को 5 साल के बजाय सिर्फ 1 साल में ही लाभ मिल सकता है, लेकिन हर किसी को 1 साल में इसका लाभ नहीं मिलेगा. नए लेबर कोड के तहत नियम बदल गया है. आइए जानते हैं किन कर्मचारियों को इसका लाभ मिलेगा और आप इसके लिए योग्य हैं कि नहीं? (Photo: ITG)
भारत में ग्रेच्युटी कर्मचारियों को मिलने वाला एक खास लाभ है, जो पांच साल की रेगुलर सर्विस करने पर दिया जाता है. लेकिन हाल ही में लेबर कोड्स में हुए बदलावों के कारण अब कॉन्ट्रैक्ट वाले कर्मचारी भी सिर्फ एक साल की सेवा के बाद इसका लाभ उठा सकते हैं. यह कर्मचारी के नौकरी छोड़ने पर कंपनी द्वारा दी जाने वाली एक आर्थिक मदद है, लेकिन सख्त नियमों के कारण कई कर्मचारियों को ये लाभ नहीं मिल पाता है. (Photo: Pixabay)
सालों तक एक नियम ने लाखों कर्मचारियों को ग्रेच्युटी से वंचित रखा है. कर्मचारियों को ग्रेच्युटी पाने के लिए कंपनी में कम से कम पांच साल लगातार काम करना अनिवार्य था. इस नियम से पहले, 4 साल और 11 महीने बाद भी नौकरी छोड़ने पर ग्रेच्युटी के नाम पर कुछ नहीं दिया जाता था. ऐसे में इस नियम ने सालों तक कर्मचारियों को एक बड़े लाभ से वंचित रखा था. (Photo: Pixabay)
अब नए लेबर कोड के तहत यह स्थिति बदल गई है. अब कुछ कर्मचारियों को केवल 1 साल की सेवा के बाद ही ग्रेच्युटी मिल सकती है. सामाजिक सुरक्षा कानून के तह लाया गया यह बदलाव आधुनिक नौकरियों के तौर-तरीकों को दिखाता है. (Photo: Pixabay)
किसे मिलेगा ये लाभ
सबसे बड़ा सवाल है कि 1 साल पर ग्रेच्युटी किसे दिया जाएगा. नए नियम के तहत कॉन्ट्रैक्ट और संविदा कर्मचारी, जो 1 साल या 2 साल के लिए नौकरी पर रखे जाते हैं, उन्हें आर्थिक सपोर्ट देने के लिए यह नियम लाया गया है. अब उनको ग्रेच्युटी का नुकसान नहीं होगा. 1 साल की नौकरी छोड़ने के बाद वे ग्रेच्युटी के लिए योग्य हो जाएंगे. यह पहले सिर्फ रेगुलर और लंबे समय तक काम करने वाले कर्मचारियों के लिए ही था. (Photo: Pixabay)
इस नियम में एक पेंच
स्थायी या रेगुलर कर्मचारियों को इस बदलाव में शामिल नहीं किया गया है. अगर आप नियमित पद पर हैं, तो आपके लिए पुराना 5 साल का नियम अभी भी लागू होता है. इससे विवाद खड़ा हो गया है, और विशेषज्ञ यह सवाल उठा रहे हैं कि यह लाभ सभी कर्मचारियों को क्यों नहीं दिया जा रहा है? (Photo: Pixabay)
काम करने के हिसाब से कैलकुलेशन
नए नियम का मतलब यह नहीं है कि एक साल बाद पूरा भुगतान कर दिया जाएगा. इसके बजाय, ग्रेच्युटी का कैलकुलेशन आनुपातिक रूप से की जाएगी यानी आपके काम करने की अवधि के आधार पर. इसलिए, एक साल काम करने वाले कर्मचारी को पांच साल काम करने वाले कर्मचारी से कम ग्रेच्युटी मिलेगी, लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि अब उन्हें खाली हाथ नहीं लौटना पड़ेगा. (Photo: File/ITG)
एक और खास बदलाव
अब आपके कुल वेतन का कम से कम 50% मूल वेतन + 50 फीसदी महंगाई भत्ता होना चाहिए. चूंकि ग्रेच्युटी की गणना इसी घटक पर की जाती है, इसलिए उच्च मूल वेतन का मतलब है कि अधिक ग्रेच्युटी भुगतान, भले ही आपका कुल सीटीसी समान रहे. (Photo: File/ITG)