प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि हाल ही में उठाए गए कुछ नए कदमों के कारण रुपये में स्थिरता आएगी और देश में विदेशी मुद्रा आने का रास्ता आसान होगा.
मनमोहन सिंह ने कहा कि ऐसे उपायों में जापान के साथ 50 अरब डॉलर के लेन-देन वाला समझौता शामिल है.
रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में आयोजित जी-20 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के बाद स्वदेश लौटने के दौरान प्रधानमंत्री ने संवाददाताओं से कहा कि ब्रिक्स देशों के बीच 100 अरब डॉलर रिजर्व मुद्रा रखे जाने से संबंधित एक ड्राफ्ट तैयार किया गया है. उन्होंने कहा कि ब्रिक्स के पांचों देशों, ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका ने 50 अरब डॉलर की पूंजी वाले एक विकास बैंक के लिए भी सहमति जताई है.
प्रधानमंत्री ने जापान के साथ मौजूदा 15 अरब डॉलर की मुद्रा के लेन-देन को बढ़ाकर 50 अरब डॉलर किए जाने के निर्णय का भी जिक्र किया.
उन्होंने संसद में पारित कई आर्थिक कानूनों का भी जिक्र किया, जिसमें कंपनी नियम विधेयक, भूमि अधिग्रहण विधेयक और पेंशन सेक्टर में विदेशी पूंजी के आगमन की इजाजत दिए जाने से संबंधित कानून शामिल हैं. प्रधानमंत्री ने कहा, 'ये आर्थिक कानून भी आत्मविश्वास में इजाफा करने में मददगार साबित होंगे और हमें चालू खाता घाटा को 4.8 फीसदी से ऊपर जाने से रोकने का प्रयास करना होगा. वर्तमान चालू खाता घाटे को बरकरार रखने के लिए हम जो कुछ भी कर सकते हैं, उसे करना होगा.'
उन्होंने कहा कि इस बीच वे व्यापार व निवेश संबंधों को विस्तार देने के लिए वाशिंगटन, मास्को, बीजिंग और ब्रूनेई के दौरे पर जाएंगे. इन यात्राओं के दौरान हमारा लक्ष्य सिर्फ इन कुछ देशों से अपने कारोबारी संबंधों को बढ़ाना नहीं होगा, बल्कि हमारा प्रयास दुनिया के साथ अपने कारोबारी संबंधों को मजबूत करने पर रहेगा.
प्रधानमंत्री ने कहा, 'अमेरिका दौरे पर जाने से पहले यदि हम कुछ उचित कदम उठाने में कामयाब रहे, तो मुझे पूरा विश्वास है कि वे पूंजी प्रवाह के लिए वातावरण बनाने में प्रभावी साबित होंगे.'