राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता अशोक गहलोत ने बीजेपी पर बड़ा हमला बोला है. उन्होंने देश के मौजूदा माहौल पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि अगर आज इंदिरा गांधी जैसी नेता होतीं, तो धर्म के नाम पर राजनीति करने वाली भाजपा जैसी पार्टी पर तुरंत प्रतिबंध लगा देतीं. गहलोत ने यह भी कहा कि अपने 50 साल के राजनीतिक करियर में उन्होंने देश में ऐसा खतरनाक माहौल पहले कभी नहीं देखा.
जयपुर में 14 जून को एक कार्यक्रम के दौरान देश के मौजूदा हालात पर बोलते हुए उन्होंने देश और लोकतंत्र को बचाने के लिए युवाओं की भूमिका को सबसे अहम बताया. उन्होंने सचेत करते हुए कहा कि आज की युवा पीढ़ी पर सबसे बड़ी जिम्मेदारी है, क्योंकि इतिहास उन्हें कभी माफ नहीं करेगा. आने वाले समय में उनसे जरूर पूछा जाएगा कि जब देश के हालात बिगड़ रहे थे, तब वे क्या कर रहे थे. अगर समय रहते देश को नहीं संभाला गया, तो इसके गंभीर परिणाम युवाओं को ही भुगतने पड़ेंगे और उनका भविष्य खतरे में पड़ जाएगा.
कांग्रेस के गौरवशाली इतिहास को याद करते हुए नेता ने कहा कि यह महात्मा गांधी, पंडित नेहरू, सरदार पटेल, मौलाना आजाद और बाबासाहेब अंबेडकर जैसे दिग्गजों की पार्टी है, जिनके बनाए संविधान के दम पर आज देश आगे बढ़ रहा है. उन्होंने इंदिरा गांधी और राजीव गांधी का उदाहरण देते हुए कहा कि इन नेताओं ने देश की एकता और अखंडता को बनाए रखने के लिए अपनी जान की बाजी लगा दी, लेकिन देश को टूटने नहीं दिया.
सत्तापक्ष को आड़े हाथों लेते हुए गहलोत ने आरोप लगाया कि आज दिल्ली की सत्ता में बैठे लोगों की सोच देश को कमजोर कर रही है और जानबूझकर धार्मिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है. उन्होंने उत्तर प्रदेश का जिक्र करते हुए कहा कि वहां विधानसभा की 403 सीटें होने के बावजूद बीजेपी एक भी मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट नहीं देती. ऐसा करके वे देश को दिखाना चाहते हैं कि वे सिर्फ एक हिंदुत्ववादी पार्टी हैं. उन्होंने मुख्तार अब्बास नकवी और शाहनवाज हुसैन जैसे चेहरों का नाम लेते हुए कहा कि बीजेपी की पैरवी करने वाले इन नेताओं को भी आज दरकिनार कर घर बैठा दिया गया है.
अशोक गहलोत ने कहा कि सत्ता में बैठे लोग संविधान की शपथ लेने के बाद भी खुलेआम धर्म के नाम पर राजनीति कर रहे हैं, जबकि हमारा संविधान हर धर्म, जाति और वर्ग को बराबर का सम्मान देता है. उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री भैरों सिंह शेखावत का एक पुराना किस्सा साझा करते हुए याद दिलाया कि एक दौर वह भी था, जब चुनाव में सिर्फ राम मंदिर का नाम लेने पर हाई कोर्ट में केस हो जाता था और सदस्यता जाने का खतरा मंडराने लगता था. गहलोत ने अफसोस जताते हुए कहा कि आज का दौर बिल्कुल बदल चुका है, जहां चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं और खुलेआम धर्म के नाम पर लोगों को भड़काया जा रहा है. इस बड़े बयान के बाद एक बार फिर सूबे का सियासी पारा पूरी तरह चढ़ गया है.