भारत के बैंकिंग क्षेत्र के नॉन-परफॉर्मिंग लोन (एनपीएल) में पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले चालू वित्त वर्ष के शुरुआती नौ महीने में कमी आई है. यह दावा रेटिंग एजेंसी फिच ने किया है. फिच के मुताबिक चालू वित्त वर्ष में दिसंबर तक के 9 महीने के एनपीएल का अनुपात 10.8 फीसदी है जबकि पिछले वित्त वर्ष के आखिर में यह अनुपात 11.15 फीसदी था.
रेटिंग एजेंसी ने नॉन-परफॉर्मिंग लोन के कम होने की वजह भी बताई है. एजेंसी के मुताबिक फिसलन कम होने और बेहतर वसूली से कई बैंकों में गैर-निष्पादित कर्ज कम करने में मदद मिली है. यही नहीं, 21 सरकारी बैंकों में से 14 में प्रोविजनिंग का दबाव कम हुआ है. मध्यम या छोटे आकार के सरकारी बैंक सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं. एजेंसी ने कहा, "जटिल कानूनी प्रक्रियाओं के कारण सिस्टम के 150 अरब नॉन-परफॉर्मिंग लोन (वित्त वर्ष 2018) में कुछ बड़े एनपीएल के समाधान में विलंब हुआ है. इस वजह से वसूली का समय 270 दिनों की निर्धारित समय सीमा काफी लंबा खिंच गया."
बता दें कि बीते आठ दिनों में देश के सबसे बड़ा बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने 6,169 करोड़ रुपये की नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (एनपीए) खातों को नीलाम किया है. इस नीलामी के तहत 22 मार्च को जैल इन्फ्राप्रोजेक्ट्स लिमिटेड, कमाची इंडस्ट्रीज लिमिटेड, पैरेंटल ड्रग्स की परिसंपत्तियों की बोली लगाई गई जबकि 26 मार्च को बैंक इंडिया स्टील, कॉरपोरशन और जय बालाजी इंडस्ट्रीज की बिक्री की प्रक्रिया अपनाई गई.
इसके अलावा 29 मार्च यानि आज एसबीआई की यशस्वी यार्न, सुमिता टेक्स स्पिन, शेखावती पोली यार्न लिमिटेड व शाकुंभरी स्ट्रॉ की परिसंपत्तियां बेचने की योजना है.बीते फरवरी महीने में बैंक ने 250 से ज्यादा अकाउंट को नीलाम करने का ऐलान किया था.ये खाते उन कंपनियों से जुड़े रहे जिन पर 50 करोड़ रुपये तक का बकाया थी.