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हर 30 घंटे में एक अरबपति, हर 33 घंटे में 10 लाख गरीब... कोरोना ने बढ़ाई अमीर-गरीब में खाई

कोरोना वायरस एक ओर जहां तबाही लेकर आई तो दूसरी ओर इसने अमीरों को और अमीर और गरीब को और गरीब कर दिया. ऑक्सफैम की रिपोर्ट के मुताबिक, कोरोना महामारी में 573 नए अरबपति बढ़े, यानी हर 30 घंटे में एक अरबपति बना.

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कोरोना महामारी में अरबपतियों की संपत्ति 42 फीसदी बढ़ गई. (फाइल फोटो) कोरोना महामारी में अरबपतियों की संपत्ति 42 फीसदी बढ़ गई. (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • अरबपतियों के पास 984.95 लाख करोड़ की संपत्ति
  • 2021 में दुनिया के 12.5 करोड़ लोग बेरोजगार हुए
  • इस साल 26.3 करोड़ लोग और गरीब हो जाएंगे

कोरोना जब दुनिया के लिए तबाही लेकर आया, करोड़ों लोगों की नौकरियां छीन लीं, करोड़ों परिवारों की बचत खत्म हो गई, अपना और अपनों का इलाज करवाने के लिए लोगों को कर्ज लेना पड़ा, तब दुनिया में कुछ ऐसे लोग भी थे, जिन्हें इस महामारी से फायदा हो रहा था. कोरोना के दो साल में अरबपतियों ने इतनी कमाई की है, जितना उन्होंने 23 साल में नहीं कमाया था. ये दावा ऑक्सफैम इंटरनेशनल (Oxfam International) की रिपोर्ट में किया गया है. 

ऑक्सफैम इंटरनेशनल ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि दुनिया के अरबपतियों की कोरोना के शुरुआती 24 महीनों में जितनी संपत्ति बढ़ी, उतनी 23 साल में भी नहीं बढ़ी थी.

दुनिया में इस समय 2 हजार 668 अरबपति हैं. ये अरबपति सामूहिक रूप से 12.7 ट्रिलियन डॉलर यानी 984.95 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति के मालिक हैं. इनके पास जितनी संपत्ति है, वो दुनिया की जीडीपी का 14% हिस्सा है. 

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रिपोर्ट की 5 बड़ी बातें...

1. अमीर और अमीर हुआः महामारी आने के बाद दुनिया में 573 अरबपति बढ़ गए. यानी हर 30 घंटे में एक अरबपति बढ़ा. इन अरबपतियों की संपत्ति महामारी के दौर में 42 फीसदी यानी 293.16 लाख करोड़ रुपये बढ़ गई. दुनिया के 3.1 अरब लोगों के पास इतनी संपत्ति नहीं है, जितनी संपत्ति 10 सबसे अमीर लोगों के पास है.

2. गरीब और गरीब हुआः कोरोना महामारी के कारण दुनिया के 99 फीसदी लोगों की कमाई में गिरावट आई है. अकेले 2021 में ही 12.5 करोड़ से ज्यादा लोगों की नौकरियां चली गईं. 2021 में सबसे गरीब 40 फीसदी लोगों की कमाई में गिरावट आ गई. महामारी से पहले औसतन 6.7 फीसदी लोगों की कमाई गिर रही थी.

3. कंपनियां हुईं मालामालः महामारी में दवा कारोबार से जुड़े 40 लोग अरबपति बन गए. मॉडर्ना और फाइजर जैसी कंपनियों ने हर सेकंड 1 हजार डॉलर (77,555 रुपये) का मुनाफा कमाया. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि फार्मा कंपनियों ने सरकारों से जेनरिक प्रोडक्शन के लिए 24 गुना ज्यादा चार्ज लिया. 

4. महिलाएं हुईं बेरोजगारः महामारी से पहले जेंडर पे का अंतर 100 साल में खत्म होने का अनुमान था, लेकिन अब इसमें 136 साल लग सकते हैं. 2020 में पुरुषों की तुलना में महिलाओं के लेबर फोर्स से बाहर होने की आशंका 1.4 गुना ज्यादा थी. 2019 के मुकाबले 2021 में नौकरी करने वाली महिलाओं की संख्या 1.3 करोड़ कम थी. जबकि, कामगार पुरुषों की संख्या 2019 के स्तर पर पहुंच गई.

5. गरीब जियेंगे भी कमः अमीर देशों में रहने वाले लोगों की औसत आय गरीब देशों में रहने वालों की तुलना में 16 साल ज्यादा है. हर साल 56 लाख लोग स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिलने के कारण मर जा रहे हैं. इस हिसाब से हर दिन 15 हजार मौतें. ब्राजील के साउ पोलो के अमीर इलाकों में रहने वाले लोग गरीब इलाकों में रहने वालों की तुलना में 14 साल ज्यादा जियेंगे.

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गरीबी और बढ़ेगी

ऑक्सफैम की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल खाने के सामान की कीमतें 33.6% बढ़ी थी. इस साल भी कीमतों में 23% का उछाल आने की आशंका है. खाने की बढ़ती कीमतों से दुनिया में और गरीबी बढ़ेगी. इस साल 26.3 करोड़ लोग बहुत गरीब हो सकते हैं. इस हिसाब से इस साल हर 33 घंटे में 1 करोड़ लोग और गरीब हो जाएंगे. 

कैसे मिटेगी ये खाई?

ऑक्सफैम ने अमीर और गरीब के बीच ये खाई मिटाने के लिए ज्यादा टैक्स बढ़ाने का सुझाव दिया है. जिन लोगों के पास 5 मिलियन डॉलर की संपत्ति है, उनसे 2% और जिनके पास 50 मिलियन डॉलर की संपत्ति है, उनसे 3% टैक्स लिया जाए. वहीं, जो 1 अरब डॉलर से ज्यादा की संपत्ति के मालिक हैं, उन पर 5% का टैक्स लगाया जाए. टैक्स बढ़ाने से दुनियाभर के अमीरों से हर साल 2.52 ट्रिलियन डॉलर (195.44 लाख करोड़ रुपये) का टैक्स आएगा, जिससे दुनिया के 2.3 अरब लोगों को गरीबी से बाहर निकालने में मदद मिलेगी. दुनियाभर में सभी लोगों तक कोरोना वैक्सीन पहुंचाई जा सकेगी.

 

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