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सेनवैट क्रेडिट मामले में 16 बीमा कंपनियां जांच के घेरे में

वित्त मंत्रालय कार कंपनियों और बीमा कंपनियों के बीच गलत तरीके से 1,200 से 2,500 करोड़ रुपये का सेनवैट क्रेडिट लेने के लिए किए गए करार की जांच कर रहा है. मंत्रालय ने इस मामले में 16 बीमा कंपनियों को सम्मन जारी किया है.

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वित्त मंत्रालय कार कंपनियों और बीमा कंपनियों के बीच गलत तरीके से 1,200 से 2,500 करोड़ रुपये का सेनवैट क्रेडिट लेने के लिए किए गए करार की जांच कर रहा है. मंत्रालय ने इस मामले में 16 बीमा कंपनियों को सम्मन जारी किया है.

सेनवैट क्रेडिट योजना के तहत विनिर्माता या सेवाप्रदाता कच्चे माल पर किए गए उत्पाद शुल्क भुगतान में क्रेडिट की सुविधा ले सकता है.16 बीमा कंपनियों को जारी सम्मन के तहत इस मामले की जांच केंद्रीय उत्पाद खुफिया महानिदेशालय की चेन्नई क्षेत्रीय इकाई कर रही है. ये कंपनियां गलत तरीके से कार डीलरों के बोगस बीजक पर सेनवैट क्रेडिट लेने के लिए मोटर वाहन बीमा पालिसियां उपलब्ध करा रही हैं. जांच में यह बात सामने आई है कि कार कंपनियों ने बीमा कंपनियों के साथ करार किया जिससे उन्हें तरजीही कार बीमा कंपनी (पीआईसी) नियुक्त किया जा सके

इन कंपनियों ने अपने कार डीलरों को यह भी निर्देश दिया कि वे अपनी बीमा पालिसियां सिर्फ पीआईसी को बेचे. मंत्रालय के बताया है कि इस तरह की पीआईसी बीमा पालिसी के मूल्य का दो से तीन प्रतिशत कमीशन कार कंपनियों को देती हैं. इसके अलावा कार डीलरों को ये 15 से 45 प्रतिशत तक कमीशन देती हैं.

इनपुट: भाषा

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