घर खरीदने का सपना देख रहे लोगों के लिए एक बड़ी खबर है. पिछले कुछ सालों से रॉकेट की रफ्तार से भाग रही प्रॉपर्टी की कीमतों पर अब ब्रेक लग गया है. दिल्ली से लेकर मुंबई तक, देश के बड़े शहरों में रियल एस्टेट की चमक फीकी पड़ती दिख रही है.
साल 2024 में जहां मकानों की कीमतें 17 प्रतिशत की दर से बढ़ी थीं, वहीं बीते साल 2025 में यह रफ्तार सुस्त होकर महज 6 प्रतिशत पर सिमट गई. आंकड़ों का यह बदलाव साफ बताता है कि आसमान छूते दामों की वजह से खरीदारों ने बाजार से दूरी बना ली है और वे अब भी सही मौके के इंतजार में बैठे हैं.
ये हैं वो 8 शहर, जहां बदला बाजार का मिजाज
आंकड़ों पर नजर डालें तो मुंबई महानगरीय क्षेत्र (MMR) में बड़ी गिरावट देखी गई है, जहां कीमतों की ग्रोथ 2024 के 18 प्रतिशत से घटकर अब महज 4 प्रतिशत पर आ गई है. पुणे में यह मंदी और भी साफ नजर आती है, जहां 2025 में कीमतों में सिर्फ 1 प्रतिशत की मामूली बढ़त हुई, जबकि एक साल पहले यह आंकड़ा 16 प्रतिशत था. वहीं दिल्ली-एनसीआर, जहां पिछले साल कीमतें 49 प्रतिशत तक आसमान छू रही थीं, वहां भी अब यह रफ्तार थमकर 6 प्रतिशत रह गई है.
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सुस्ती का यह असर गुजरात और बंगाल में भी दिखा है. अहमदाबाद और कोलकाता में भी कीमतों की रफ्तार धीमी होकर क्रमशः 8 प्रतिशत और 6 प्रतिशत पर सिमट गई है. वहीं चेन्नई में पिछले साल की 16 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी के बाद अब कीमतें पूरी तरह स्थिर बनी हुई हैं.
हालांकि, बेंगलुरु और हैदराबाद ने मंदी के इस ट्रेंड को पूरी तरह पलट दिया है. बेंगलुरु 13 प्रतिशत की मूल्य वृद्धि के साथ 2025 में सबसे आगे रहा, जबकि हैदराबाद में भी कीमतों में 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो पिछले साल की 3 प्रतिशत की ग्रोथ के मुकाबले एक बड़ा सुधार है.
3 साल के निचले स्तर पर पहुंची बिक्री
सिर्फ कीमतें ही नहीं, घरों की बिक्री में भी भारी गिरावट दर्ज की गई है. साल 2025 में आवासीय संपत्तियों की बिक्री 12 प्रतिशत तक गिर गई है. पूरे साल में करीब 3.86 लाख घर ही बिके, जो 2022 के बाद का सबसे निचला स्तर है. बिक्री कम होने की सबसे बड़ी वजह घरों का बजट से बाहर होना और निवेश के लिए खरीदारों की घटती दिलचस्पी है. साथ ही, नए प्रोजेक्ट्स की सप्लाई में भी 6 प्रतिशत की कमी आई है, जिससे पता चलता है कि डेवलपर्स अब नए प्रोजेक्ट्स लॉन्च करने के बजाय पुरानी इन्वेंट्री बेचने पर ध्यान दे रहे हैं.
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आंकड़े बताते हैं कि बिना बिके हुए फ्लैट्स की संख्या लगातार बढ़ रही है. खासकर जो घर प्रीमियम या बहुत महंगे हैं, उन्हें खरीदार नहीं मिल रहे हैं. इसके विपरीत, मध्यम आय वाले और छोटे घरों की मांग अभी भी कुछ हद तक बनी हुई है.