क्या आपका घर बदलती जलवायु की 'मार' झेलने के लिए तैयार है. मार्च की गर्मी ने यह साफ कर दिया है कि अब घर खरीदते समय 'लोकेशन' और 'बजट' ही काफी नहीं हैं. अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या आपका घर 45 डिग्री की गर्मी में आपको बिना भारी-भरकम एसी बिल के सुकून दे सकता है. एक दौर था जब घर की पहचान उसके मार्बल और इंटीरियर से होती थी, लेकिन आज के 'क्लाइमेट चेंज' वाले दौर में घर की असली पहचान उसका 'थर्मल इंसुलेशन' है.
आजतक रेडियो के कार्यक्रम 'प्रॉपर्टी से फायदा' (PSF) में सस्टेनेबल होम एक्सपर्ट श्रेया श्रीवास्तव कहती हैं- 'सस्टेनेबल घर केवल एक ट्रेंड या फैंसी नाम नहीं है. यह एक ऐसी डिजाइन फिलॉसफी है, जो घर के निर्माण से लेकर उसके विनाश तक प्रकृति को नुकसान नहीं पहुंचाती, इसे 'जीरो एनर्जी बिल्डिंग' भी कहा जा सकता है. '
यह भी पढ़ें: बैंक-बिल्डर गठजोड़ की जांच करेगी CBI, सुप्रीम कोर्ट के आदेश से बायर्स को कितनी राहत?
इको-फ्रेंडली घर जरूरत
सस्टेनेबल या इको-फ्रेंडली घर ऐसे होते हैं, जिसका मुख्य लक्ष्य 'जीरो कार्बन फुटप्रिंट' प्राप्त करना है. इसका अर्थ है कि घर के निर्माण से लेकर उसके इस्तेमाल और उसके ढहाए जाने तक, पर्यावरण पर कम से कम नकारात्मक प्रभाव पड़े. एक सच्चा सस्टेनेबल घर वह है जो स्थानीय और प्राकृतिक सामग्रियों, जैसे कि मिट्टी (Mud) से बना हो, जिसे नष्ट करने पर वह वापस जमीन में मिल जाए और कोई कचरा या 'लैंडफिल' पैदा न करे.
कैसे काम करते हैं ये घर?
श्रेया कहती हैं- ' इको-फ्रेंडली घरों की कार्यप्रणाली मुख्य रूप से थर्मल इंसुलेशन और ऊर्जा दक्षता पर आधारित होती है. उदाहरण के लिए, मिट्टी के घरों में प्राकृतिक शीतलन गुण होते हैं, जिससे घर के अंदर और बाहर के तापमान में 10-15 डिग्री सेल्सियस का अंतर हो सकता है. इससे एयर कंडीशनर (AC) और हीटर पर निर्भरता बहुत कम हो जाती है, जो सीधे तौर पर बिजली की खपत और कार्बन उत्सर्जन को घटाता है. इसके अलावा, सोलर पैनल जैसे विकल्पों को अपनाकर ऊर्जा के लिए आत्मनिर्भर बनना भी इसी का एक हिस्सा है. यह सिर्फ निर्माण सामग्री बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि एक व्यापक दृष्टिकोण है जिसमें पानी की बचत, कचरा प्रबंधन और कम कार्बन फुटप्रिंट वाली सामग्रियों को प्राथमिकता दी जाती है.'
चुनौतियां और बदलता नजरिया
श्रेया कहती हैं- 'भारत में सस्टेनेबल घरों को अपनाने के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा 'मानसिकता' है. अक्सर लोग री-यूज़, रिसाइकिल और रिफर्बिश की गई चीजों को छोटा मानते हैं, जबकि ये सस्टेनेबल लिविंग के मूल आधार हैं. इसके अलावा, लोग अक्सर 'एस्थेटिक्स' और 'इको-फ्रेंडली' के बीच भ्रमित रहते हैं, जबकि आज की तकनीक से सुंदर और आधुनिक दिखने वाले ग्रीन होम्स बनाना पूरी तरह संभव है.' हालांकि, बड़े बिल्डर्स के लिए यह अभी भी एक 'निश कॉन्सेप्ट' बना हुआ है, क्योंकि वे इसमें तत्काल भारी मुनाफ़ा नहीं देखते. लेकिन नई पीढ़ी और पर्यावरण के प्रति जागरूक लोग अब इसे एक जिम्मेदारी और बेहतर जीवनशैली के रूप में अपना रहे हैं.
यह भी पढ़ें: रियल एस्टेट का नया पावर सेंटर फरीदाबाद, क्या नोएडा और गुरुग्राम को देगा टक्कर