जेवर की जमीन पर सिर्फ एयरपोर्ट ही नहीं बन रहा, बल्कि वहां के किसानों की किस्मत की नई कहानी भी लिखी जा रही है. मुआवजे के रूप में मिले करोड़ों रुपयों ने रातों-रात गांव के घरों का नक्शा बदल दिया. किसी ने नई गाड़ियां लीं, तो किसी ने शहर में फ्लैट खरीदे. लेकिन सिक्के का दूसरा पहलू भी है यही पैसा अब कई घरों में झगड़े और भविष्य की चिंता की वजह भी बन गया है.
कुछ लोग तो समझदारी से काम ले रहे हैं, पर कुछ के हाथ से रेत की तरह पैसा फिसल भी रहा है. जेवर में जब नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए जमीन का अधिग्रहण शुरू हुआ, तो किसान परिवारों के पास अचानक इतना पैसा आ गया जितना पहले कभी नहीं देखा गया था.
'द टाइम्स ऑफ इंडिया' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दयानतपुर के 70 साल के किसान हंसराज सिंह ने 2019 में अपनी 10 बीघा जमीन दी थी और बाद में प्रोजेक्ट बढ़ने पर 15 बीघा जमीन और बेच दी. उन्होंने बताया, "कुल मिलाकर मुझे करीब 9.5 से 10 करोड़ रुपये का मुआवजा मिला." उन्होंने इस रकम का लगभग 30% हिस्सा वापस खेती में ही लगाया और यहां से करीब 18 किलोमीटर दूर करौली गांव में 28 लाख रुपये प्रति बीघा के हिसाब से जमीन खरीदी. इसके साथ ही उन्होंने यमुना एक्सप्रेसवे के किनारे एक रिहायशी प्लॉट खरीदा और कुछ पैसा निवेश व घर की स्थिरता के लिए अलग रख दिया. उनके बेटे नौकरीपेशा हैं और उन्होंने बताया कि उनका खर्च अब भी काफी नपा-तुला ही है.
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किसानों ने बढ़ाया अपना खेती का कारोबार
जेवर के किसान समुदाय के एक बड़े हिस्से ने इसी सोच को अपनाया है. भले ही गांवों में मुआवजे का भारी-भरकम पैसा आया. कुछ मामलों में तो 10 करोड़ रुपये से भी ज्यादा, लेकिन कई परिवारों ने तुरंत फिजूलखर्ची करने से परहेज किया.
थार और फॉर्च्यूनर जैसी गाड़ियां धीरे-धीरे आईं, रातों-रात नहीं. अधिकारियों का अनुमान है कि करीब 50-60 किसानों को 5 करोड़ रुपये से अधिक मिले, और जैसे-जैसे अधिग्रहण बढ़ा, कुछ मामलों में तो यह रकम 20 करोड़ रुपये के पार निकल गई.
रोही के रहने वाले अजीत ने अपने मुआवजे का इस्तेमाल खेती छोड़ने के बजाय अपना आधार बढ़ाने के लिए किया. उन्होंने बताया, "रोही में मेरी अभी भी चार बीघा पुश्तैनी जमीन है, जो एयरपोर्ट की सीमा से लगी है. यह जमीन मेरे पिता की थी. मैंने वहां एक नया घर बनाया है और अब अपने परिवार के साथ वहीं रहता हूं." उन्होंने अलीगढ़ में और जमीन खरीदी और खेती जारी रखी, साथ ही एक घर और गाड़ी में भी निवेश किया. इस आर्थिक बदलाव ने शिक्षा के विकल्पों को भी प्रभावित किया है. अजीत ने बताया कि उनकी बेटियां उच्च शिक्षा ले रही हैं, उनमें से एक बीए और दूसरी बीबीए कर रही है. उनका कहना है कि एयरपोर्ट बनने के बाद उन्हें नौकरियां मिल जाएंगी.
दूसरे किसानों ने भी कुछ इसी तरह के फैसले लिए. 12 बीघा जमीन के बदले करीब 2.4 करोड़ रुपये पाने वाले हरिंदर सिंह ने नौकरी के प्रस्ताव के बजाय नकद पैसे को चुना. रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने खेती जारी रखने को प्राथमिकता दी क्योंकि यही उनका पेशा था. उन्होंने नौकरी के बदले 5 लाख रुपये का अतिरिक्त मुआवजा लिया और उस रकम का बड़ा हिस्सा फिर से कृषि भूमि में निवेश कर दिया. रिपोर्ट में कहा गया है कि उन्होंने लगभग 2 करोड़ रुपये में बुलंदशहर में 60 बीघा जमीन खरीदी, करीब 20 लाख रुपये घर बनाने में खर्च किए और बाकी के 20 लाख रुपये बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) कर दिए.
फरवरी 2026 में इंडिया टुडे ने रिपोर्ट किया था, एयरपोर्ट प्रोजेक्ट के लिए लगभग 12,000 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया गया, जिससे कई परिवारों के पास इतना पैसा आ गया जितना उन्होंने पहले कभी नहीं देखा था. इस अचानक आए बदलाव ने उनके खर्च करने के तरीकों को पूरी तरह बदल दिया.
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