अपना सपनों का घर खरीदना किसी भी व्यक्ति के जीवन का सबसे बड़ा वित्तीय और भावनात्मक फैसला होता है. लेकिन अक्सर खरीदार तब ठगा सा महसूस करते हैं, जब बिल्डर वादे के मुताबिक समय पर घर का पजेशन नहीं देता. 2016 से पहले रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता की भारी कमी थी, लेकिन रेरा (Real Estate Regulatory Authority) के आने के बाद अब तस्वीर बदल चुकी है.
आज तक रेडियो के खास कार्यक्रम 'प्रॉपर्टी से फायदा' में जॉइंट डायरेक्टर लीगल, रेरा मनमीत कादिरिया ने बताया कि कैसे यह संस्था घर खरीदारों के हितों की रक्षा कर रही है. मनमीत के अनुसार, 2016 से पहले जब रेरा अस्तित्व में नहीं था, तब खरीदारों के सामने कई चुनौतियां थीं. खरीदार को यह तक नहीं पता होता था कि प्रमोटर का ऑफिस कहां है या उसका पैसा कहां निवेश किया गया है. पैसा लगाने के बाद भी घर मिलने की कोई गारंटी नहीं होती थी.
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अब रेरा ने बाजार में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित की है, खरीदार अब यह देखकर निवेश करते हैं कि क्या प्रोजेक्ट रेरा से अप्रूव्ड है. रेरा अप्रूवल का मतलब है कि बिल्डर ने सभी जरूरी कानूनी अनुपालन पूरे कर लिए हैं. होम बायर्स की सबसे बड़ी समस्या समय पर पजेशन न मिलना है. इस पर मनमीत कहती हैं.
'अब प्रमोटर्स के लिए यह अनिवार्य है कि वे रेरा में पंजीकरण के समय पजेशन की एक 'डेफिनेट डेट' दें. उन्हें इस तारीख का सख्ती से पालन करना होता है. बिल्डर के लिए यह अनिवार्य है कि वह बुकिंग के समय ही अलॉटियों को प्रोजेक्ट से जुड़े सभी जरूरी दस्तावेज और जानकारी प्रदान करे. यदि बिल्डर अपने वादे से मुकरता है, तो खरीदार रेरा कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं. अब न केवल होम बायर्स, बल्कि रियल एस्टेट एजेंट्स भी अपनी समस्याओं के लिए रेरा पर भरोसा जता रहे हैं.'
खरीदारों के लिए एक्सपर्ट की सलाह
मनमीत कादिरिया ने जोर देकर कहा कि खरीदारों को घर बुक करते समय जागरूक रहना चाहिए. यह बिल्डर की कानूनी जिम्मेदारी है कि वह आपको पूरी जानकारी दे. यदि कोई प्रमोटर नियम तोड़ता है या पजेशन में अनावश्यक देरी करता है, तो रेरा एक ऐसी बॉडी है, जिसे विशेष रूप से आपकी अनिश्चितताओं और ट्रस्ट इश्यूज को दूर करने के लिए ही बनाया गया है.
मनमीत कादिरिया ने बताया कि अगर बिल्डर नियमों का उल्लंघन करता है, तो खरीदार के पास रिफंड और मुआवजे (Compensation) जैसे कानूनी विकल्प मौजूद हैं. आज की पीढ़ी इसे समझने के लिए चैटजीपीटी जैसे एआई टूल्स की मदद भी ले सकती है ताकि वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो सकें।
हालांकि, उन्होंने कानून के व्यावहारिक पक्ष और चुनौतियों पर भी खुलकर बात की. उन्होंने स्वीकार किया कि रेरा ऑर्डर्स के कार्यान्वयन में सबसे बड़ी बाधा यह है कि वर्तमान में रेरा के पास सिविल कोर्ट जैसी पूर्ण शक्तियां नहीं हैं. इस कमी को दूर करने के लिए सभी राज्यों के रेरा चेयरपर्सन सरकार को एक्ट में आवश्यक संशोधनों और सुधारों के प्रस्ताव भेज रहे हैं. इसका उद्देश्य रेरा को और अधिक सशक्त बनाना है ताकि पजेशन में देरी या आदेशों की अनदेखी होने पर खरीदारों को जल्द से जल्द राहत मिल सके और बिल्डरों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके.