आईटी सेक्टर में छंटनी और नई भर्तियों में आई गिरावट का असर अब देश के रियल एस्टेट मार्केट पर साफ दिखने लगा है. खासतौर पर बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे जैसे शहरों में, जहां घर खरीदने वालों का एक बड़ा हिस्सा सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल्स हैं, वहां बाजार की रफ्तार सुस्त पड़ रही है.
आईटी सेक्टर में बढ़ती अस्थिरता ने मध्यम आय वर्ग के खरीदारों के बीच असुरक्षा की भावना पैदा कर दी है. ओरेकल जैसी दिग्गज कंपनियों द्वारा की गई बड़ी छंटनी और अप्रैल 2026 में सक्रिय टेक नौकरियों में आई 8% की गिरावट ने इस संकट को और गहरा दिया है.
विशेषज्ञों का मानना है कि आईटी सेक्टर में छंटनी और एआई (AI) के कारण हो रहे बदलावों ने खरीदारों के बीच 'EMI ट्रैप' का डर पैदा कर दिया है. 30 से 45 वर्ष की आयु के प्रोफेशनल्स, जो पहले रियल एस्टेट के सबसे बड़े खरीदार थे, अब बड़े निवेश से बच रहे हैं.
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8 प्रमुख शहरों में सुस्ती
नाइट फ्रैंक इंडिया के ताजा आंकड़ों के अनुसार, साल 2026 की पहली तिमाही में भारत के आठ प्रमुख शहरों के आवासीय बाजार में सुस्ती के संकेत मिले हैं. इस दौरान घरों की बिक्री में सालाना आधार पर 4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जो घटकर 84,827 यूनिट रह गई है. केवल बिक्री ही नहीं, बल्कि नए प्रोजेक्ट्स की लॉन्चिंग में भी 2 प्रतिशत की कमी आई है, जिससे यह साफ होता है कि महामारी के बाद रियल एस्टेट सेक्टर में आया जबरदस्त उछाल अब धीरे-धीरे कम हो रहा है.
बाजार में बिना बिके घरों (अनसोल्ड इन्वेंट्री) का आंकड़ा भी 3 प्रतिशत बढ़कर करीब 5.2 लाख यूनिट तक पहुंच गया है, जिसमें दिल्ली-एनसीआर और पुणे जैसे शहरों का प्रदर्शन सबसे कमजोर रहा है. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आईटी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर हो रही छंटनी, नई नौकरियों को लेकर अनिश्चितता और घरों की बढ़ती कीमतों के कारण पैदा हुए वित्तीय दबाव ने खरीदारों के भरोसे को कम किया है.