दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे उत्तर भारत में प्रॉपर्टी की कीमतों को बढ़ाने वाला एक मुख्य जरिया बनकर उभर रहा है. जानकारों का मानना है कि इस 210 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर के आसपास प्रॉपर्टी के दाम बढ़ने का एक लंबा दौर पहले ही शुरू हो चुका है.
दिल्ली और देहरादून के बीच यात्रा का समय घटकर अब करीब 2.5 घंटे रह जाने वाला है, और इसी बड़े बदलाव की वजह से दिल्ली-एनसीआर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में जमीनों और घरों की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल रहा है.
रियल एस्टेट विशेषज्ञों का कहना है कि यह 210 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे न केवल कनेक्टिविटी सुधार रहा है, बल्कि दिल्ली-एनसीआर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में जमीन और रिहायशी संपत्तियों की कीमतों को नए सिरे से तय कर रहा है. सबसे बड़ा ट्रेंड यह है कि अगले 18-24 महीनों में कई प्रमुख जगहों पर कीमतों में 15–25% की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है, जबकि कुछ इलाकों में तो अभी से ही इससे भी ज्यादा उछाल देखा जा रहा है.
यह भी पढ़ें: दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे, उत्तर भारत के रियल एस्टेट का 'गेम चेंजर', इन शहरों में बरसेगा पैसा!
दिल्ली से मसूरी तक असर
इन्वेस्टोएक्सपर्ट एडवाइजर्स (InvestoXpert Advisors) के संस्थापक और प्रबंध निदेशक विशाल रहेजा के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर के कई माइक्रो मार्केट जिनमें लोनी, मंडोली, नरेला, बवाना, साहिबाबाद और पूर्वी दिल्ली के इलाके जैसे शाहदरा, सीमापुरी, करावल नगर, सोनिया विहार और यमुना विहार शामिल हैं वहां अगले 18-24 महीनों में कीमतों में 15–25% का उछाल आने की संभावना है. इसके साथ ही ट्रोनिका सिटी जैसे बाहरी हब में भी कीमतों में इसी तरह की बढ़ोतरी देखी जा सकती है.
एनसीआर से परे, इस एक्सप्रेसवे का असर उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के अन्य हिस्सों में भी फैल रहा है. बागपत, बड़ौत, शामली, मुजफ्फरनगर के बाहरी इलाके, सहारनपुर, छुटमलपुर, मोहंड, डोईवाला, ऋषिकेश बाईपास, राजपुर रोड और मसूरी जैसे क्षेत्र इसी तरह की बढ़त के लिए तैयार हैं.
महत्वपूर्ण बात यह है कि इस तेजी के शुरुआती संकेत अभी से दिखने लगे हैं. इन्वेस्टोएक्सपर्ट एडवाइजर्स के विशाल रहेजा ने बताया, "2024 में ही बागपत में कीमतों में 20-30% की वृद्धि देखी गई है, जो यह दर्शाता है कि बुनियादी ढांचे से जुड़ी मांग कितनी तेजी से रियल एस्टेट की कीमतों में तब्दील हो सकती है." उन्होंने यह भी कहा कि शुरुआत में निवेश करने वाले लोगों को सबसे ज्यादा मुनाफा होने की संभावना है.
बढ़ती वैल्यूएशन
विशेषज्ञ इस बात पर पूरी तरह सहमत हैं कि यह एक्सप्रेसवे केवल कनेक्टिविटी में सुधार नहीं कर रहा है, बल्कि बुनियादी तौर पर मांग की दिशा बदल रहा है. एनरॉक ग्रुप (ANAROCK Group) के वाइस चेयरमैन संतोष कुमार ने कहा, "दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर उत्तर भारत में रियल एस्टेट की वैल्यूएशन को काफी बढ़ावा देगा. बड़े कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स के अपग्रेड होने से यात्रा का समय कम हो जाता है, जिससे पूरे कॉरिडोर के किनारे आवासीय (Residential) और व्यावसायिक (Commercial) रियल एस्टेट की मांग को नई ऊर्जा मिलती है.'
यह भी पढ़ें: स्पेन में मिल रहा है मुफ्त में घर, जॉब का भी ऑफर, बस पूरी करनी होगी एक शर्त
हर सेगमेंट में बढ़ रही मांग
प्रॉपर्टी की कीमतों में यह बढ़त हर तरह के सेगमेंट में देखी जा रही है. प्लॉट्स और फार्मलैंड जिनकी कीमत फिलहाल ₹12,000 से ₹20,000 प्रति वर्ग गज के बीच है उनमें निवेशक खासी दिलचस्पी दिखा रहे हैं, खासकर वे जो शुरुआत में निवेश कर मोटा मुनाफा कमाना चाहते हैं.
मध्यम आय वर्ग के लिए बने 'बिल्डर फ्लोर्स' की मांग स्थिर बनी हुई है, जबकि ₹80 लाख से ₹1.5 करोड़ की कीमत वाले विला अमीर खरीदारों और एनआरआई (NRI) को आकर्षित कर रहे हैं. उत्तराखंड में हॉलिडे होम्स (₹30-70 लाख) और स्टूडियो अपार्टमेंट्स (₹20-35 लाख) भी तेजी से उभरते हुए सेगमेंट के रूप में सामने आ रहे हैं.
सेकंड होम और हॉस्पिटलिटी सेक्टर
बेहतर कनेक्टिविटी से लाइफस्टाइल से जुड़े निवेश को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. स्क्वायर यार्ड्स (Square Yards) के को-फाउंडर और मुख्य व्यवसाय अधिकारी अनुपम रस्तोगी ने कहा, "दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे रियल एस्टेट के कायाकल्प में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. देहरादून में सेकंड होम, प्लॉट्स और विला कम्युनिटीज की मांग में भारी उछाल आएगा."
इसी बात को दोहराते हुए कोलियर्स इंडिया (Colliers India) के नेशनल डायरेक्टर विमल नादर ने कहा, "हम आने वाले वर्षों में इन छोटे बाजारों में 10 से 20 लाख वर्ग फुट 'ग्रेड ए' सप्लाई आने की उम्मीद कर रहे हैं. हरिद्वार, ऋषिकेश और देहरादून में हॉस्पिटलिटी (और सेकंड होम मार्केट को भी इसका बड़ा लाभ मिलने की संभावना है."
इस कॉरिडोर का प्रभाव एक्सप्रेसवे के आस-पास के क्षेत्रों से भी आगे तक फैल रहा है. लोहिया वर्ल्डस्पेस (Lohia Worldspace) के प्रबंध निदेशक पीयूष लोहिया ने बताया कि मुरादाबाद जैसे टियर-2 शहर भी अब प्लॉट्स के विकास और 'सेकंड-होम' निवेश के लिए लोगों का ध्यान खींच रहे हैं. उन्होंने आगे कहा, "विकास की यह रफ्तार बेहतर कनेक्टिविटी, आसान पहुंच और सामाजिक व भौतिक बुनियादी ढांचे के धीरे-धीरे विस्तार के कारण और बढ़ेगी." हालांकि, उन्होंने निवेशकों को सलाह दी कि इन बाजारों में प्रवेश करते समय कागजी कार्रवाई की जांच, डेवलपर की विश्वसनीयता और भविष्य में वहां रहने की सुविधाओं पर विशेष ध्यान देना चाहिए.
यह भी पढ़ें: ईंट-सीमेंट की छुट्टी! ₹1.5 लाख में बनेगा अपना घर, भूकंप भी बेअसर
विशेषज्ञों का मानना है कि तेज कनेक्टिविटी, बढ़ती मांग और कीमतों में शुरुआती उछाल जैसा कि बागपत जैसे बाजारों में पहले ही दिख रहा है. यह संकेत देता है कि यह पूरा क्षेत्र अब प्रॉपर्टी के दामों में निरंतर बढ़ोत्तरी के दौर में प्रवेश कर रहा है.
(रिपोर्ट: बसुधा दास)