रियल एस्टेट में निवेश की जब बात आती है, तो अक्सर लोग रेजिडेंशियल फ्लैट्स के मुकाबले कमर्शियल प्रॉपर्टी में निवेश फायदे का सौदा मानते हैं. लोगों का यही मानना है कि ऐसी प्रॉपर्टीज में शानदार रेंटल इनकम मिलता है, लेकिन क्या कमर्शियल प्रॉपर्टी में एंट्री जितनी आसान है, वहां से निकलना भी उतना ही सरल है. अगर आप भी दुकान, ऑफिस स्पेस या स्टूडियो अपार्टमेंट में पैसा लगाने की सोच रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए काम की साबित हो सकती है.
आजतक रेडियो के कार्यक्रम 'प्रॉपर्टी से फायदा' में रियल एक्सपर्ट मनुज गाखर ने आगाह किया है कि कमर्शियल निवेश में 'रिटर्न' हमेशा 'रिस्क' के सीधे अनुपात में होता है. वो कहते हैं- 'रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी में सालाना रेंटल रिटर्न महज 2% से 3% होता है, जबकि कमर्शियल प्रॉपर्टी में यह 6% से 9% तक जा सकता है. यही बड़ा अंतर निवेशकों को खींचता है. लेकिन यहां एक बुनियादी सिद्धांत काम करता है ज्यादा रिटर्न मतलब ज्यादा जोखिम. कमर्शियल प्रॉपर्टी में खाली रहने का डर और लिक्विडिटी की समस्या रेजिडेंशियल से कहीं अधिक होती है. '
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'एंट्री' आसान, पर 'एग्जिट' है बड़ी चुनौती
ज्यादातर निवेशक प्रॉपर्टी खरीदते समय 'एंट्री'और 'अश्योर्ड रिटर्न' के वादों पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन 'एग्जिट प्लान' को भूल जाते हैं. फ्लैट को जरूरत पड़ने पर जल्दी बेचा जा सकता है, लेकिन कमर्शियल प्रॉपर्टी को बेचने में सालों लग सकते हैं. एक्सपर्ट की सलाह है कि अगर आप कमर्शियल में उतर रहे हैं, तो कम से कम 5 से 10 साल का नजरिया रखें. इसे शॉर्ट-टर्म प्रॉफिट के लिए खरीदना जोखिम भरा हो सकता है.
आजकल बिल्डर्स निवेशकों को लुभाने के लिए 12% तक के 'अश्योर्ड रिटर्न' या 'लीज गारंटी' का वादा करते हैं. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, रेरा (RERA) के नियमों के बाद ये वादे कई बार कानूनी रूप से पेचीदा हो जाते हैं. निवेश से पहले यह जरूर देखें कि बिल्डर की क्रेडिबिलिटी क्या है और क्या उसके पास वाकई किसी बड़े ब्रांड का 'लेटर ऑफ इंटेंट'. सिर्फ कागजों पर लिखे रेंटल के भरोसे निवेश न करें.
निवेश के 3 सबसे सुरक्षित विकल्प
छोटे निवेशकों के लिए 'REITs' है बेहतर रास्ता
अगर आपके पास 50 लाख या 1 करोड़ रुपये नहीं हैं, तो भी आप कमर्शियल प्रॉपर्टी का मुनाफा ले सकते हैं. (REITs (Real Estate Investment Trusts) के जरिए आप मात्र ₹400 से ₹1000 जैसी छोटी राशि से निवेश शुरू कर सकते हैं. यह म्यूचुअल फंड की तरह काम करता है और सेबी (SEBI) द्वारा रेगुलेटेड होने के कारण काफी सुरक्षित माना जाता है.
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