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UP के रियल एस्टेट में ₹16,865 करोड़ का निवेश, इन शहरों की चमकेगी किस्मत

उत्तर प्रदेश के प्रमुख धार्मिक शहर जैसे अयोध्या, काशी और प्रयागराज अब केवल तीर्थस्थल ही नहीं रह गए हैं, बल्कि ये रियल एस्टेट निवेश के सबसे बड़े केंद्र बनकर उभरे हैं, इन शहरों में छोटे से लेकर बड़े मकानों तक की मांग बढ़ रही है.

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यूपी में रियल एस्टेट निवेश से बदलेगी अर्थव्यवस्था की तस्वीर (Photo-ITG)
यूपी में रियल एस्टेट निवेश से बदलेगी अर्थव्यवस्था की तस्वीर (Photo-ITG)

उत्तर प्रदेश के विकास पथ पर रियल एस्टेट सेक्टर एक नया कीर्तिमान रचने को तैयार है. आगामी ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी-5 (GBC-5) के जरिए प्रदेश के बुनियादी ढांचे और शहरी विकास को 16,865 करोड़ रुपये की नई ऊर्जा मिलने वाली है. योगी सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत न केवल बड़े महानगरों, बल्कि अयोध्या और प्रयागराज जैसे धार्मिक केंद्रों का भी कायाकल्प होगा. यह निवेश न केवल प्रदेश की सूरत बदलेगा, बल्कि लाखों लोगों के लिए 'अपने घर' के सपने और रोजगार के नए अवसरों के द्वार भी खोलेगा.

ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी-5 (GBC-5) के तहत प्रदेश में करीब 16,865 करोड़ रुपये के निवेश से आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाएं शुरू होगीं. आवास विभाग निवेश प्रस्तावों को अंतिम रूप देने में जुटा है और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में और भी प्रस्ताव मिलने से निवेश का आंकड़ा बढ़ सकता है.

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कई शहरों का होगा कायाकल्प

धार्मिक पर्यटन के हब बन रहे शहरों अयोध्या, प्रयागराज, वाराणसी और चित्रकूट में अब बुनियादी ढांचे का कायाकल्प होने जा रहा है, जहां नामी बिल्डरों ने बड़े प्रोजेक्ट्स में अपनी दिलचस्पी दिखाई है. इसके समानांतर मेरठ, गाजियाबाद और गोरखपुर जैसे तेजी से बढ़ते औद्योगिक शहरों में भी नई रेजिडेंशियल स्कीम लॉन्च की जाएंगी. योगी सरकार की इस पहल से न केवल शहरी आबादी के लिए घर की उपलब्धता आसान होगी, बल्कि यह बढ़ते शहरीकरण की चुनौतियों का भी एक ठोस समाधान साबित होगा. 

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यूपी सरकार अब ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी-5 के निवेश प्रस्तावों को हकीकत में बदलने की तैयारी में है. हाल ही में प्रमुख सचिव आवास की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में प्रोजेक्ट्स की प्रगति जांची गई. बैठक में पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर देते हुए विकास प्राधिकरणों को हिदायत दी गई कि वे परियोजनाओं का रेरा पंजीकरण सुनिश्चित करें, प्रमुख सचिव ने 'सिंगल विंडो' की तर्ज पर समयबद्ध तरीके से नक्शे पास करने के निर्देश दिए हैं, जिससे विकास की इन योजनाओं को जल्द से जल्द जमीन पर उतारा जा सके.

यह निवेश केवल ईंट-पत्थर का ढांचा खड़ा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह यूपी की बदलती अर्थव्यवस्था का प्रतिबिंब है. इन आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाओं के शुरू होने से बुनियादी सुविधाओं का विस्तार होगा और स्थानीय स्तर पर व्यापक रोजगार पैदा होगा. प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि छोटे शहरों में बढ़ते शहरीकरण के कारण घरों की मांग में जो उछाल आया है, उसने उत्तर प्रदेश को निवेशकों का पसंदीदा ठिकाना बना दिया है.

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