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आज शाम अमेरिका में बड़ी बैठक, दुनिया की टिकी नजर... US बाजार पस्त, भारत भी दबाव में

एक साल से अधिक समय हो गया है जब यूएस फेड ने महंगाई के खिलाफ सबसे आक्रामक युद्ध शुरू किया था. फेडरल फंड की दर हाई है, लेकिन फेड यहा रुकने के मूड में नहीं है. फेड का फोकस महंंगाई को कंट्रोल करने पर रह सकता है.

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दबाव में अमेरिकी मार्केट.
दबाव में अमेरिकी मार्केट.

अमेरिकी मार्केट (US Market) में गिरावट देखने को मिल रही है. डाओ जोन्स, S&P 500 और टेक बेस्ड नैस्डैक इंडेक्स लाल निशान में बीते दिन नजर आए. बोइंग और इंटेल जैसी कंपनियों के शेयरों में दो फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. इस बीच शुक्रवार यानी आज अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Fed Reserve) के अध्यक्ष जेरोम पॉवेल (Jerome Powell) जैक्सन होल सिम्पोजियम (Jackson Hole) को संबोधित करेंगे. माना जा रहा है कि वो महंगाई और इंटरेस्ट रेट ट्रैजेक्टरी को लेकर कुछ संकेत दे सकते हैं. इस वजह से मार्केट सहमा हुआ नजर आ रहा है. 

मार्केट को हो सकती है परेशानी

हालांकि, फेड के लिए बाजार की अपेक्षाओं के अनुरूप बोलना अनिवार्य नहीं है. फेड की ओर से एक कठोर संकेत संभावित रूप से बाजार को परेशान कर सकता है. न्यूज एजेंसी रायटर्स ने बैंक ऑफ अमेरिका के एनालिस्ट के हवाले से कहा कि मार्केट जेरोम पॉवेल के एग्रेसिव संदेश के लिए तैयार नहीं हो सकता. उन्होंने बताया कि हाल के मजबूत अमेरिकी आर्थिक आंकड़े नीति निर्माताओं को मुद्रास्फीति फिर से बढ़ने के बारे में अधिक चिंतित कर सकते हैं.

हाई लेवल पर महंगाई दर

रॉयटर्स ने बैंक ऑफ अमेरिका के हवाले से कहा कि मंदी की कमजोर होती आशंका ने मुद्रास्फीति और सख्त फेड पर ध्यान केंद्रित कर दिया है. हमारा मानना है कि बाजार में मूल्य निर्धारण की तुलना में इक्विटी को माइक्रो-ड्रिवेन झटके का अधिक खतरा है. एक साल से अधिक समय हो गया है जब यूएस फेड ने महंगाई के खिलाफ सबसे आक्रामक युद्ध शुरू किया था. महंगाई को दो फीसदी के लक्ष्य स्तर पर लाने के उद्देश्य से यूएस फेड मार्च 2022 से ब्याज दरें बढ़ा रहा है. फेड ने मार्च 2022 के बाद से 11वीं बार दरें बढ़ाकर 26 जुलाई को 5.25 फीसदी से 5.5 फीसदी के बीच कर दी. ये 22 वर्षों में सबसे उच्चतम स्तर है.

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क्या बढ़ सकती हैं दरें?

फेडरल फंड की दर हाई है, लेकिन फेड यहा रुकने के मूड में नहीं है. आसान भाषा में कहें, तो अभी आगे भी बढ़ोतरी संभव है. अगर इजाफा नहीं भी होता है, तो हाई स्तर पर दरें लंबे समय तक बरकरार रह सकती हैं. जेरोम पॉवेल उन चुनौतियों से अवगत हैं जिनसे उन्हें निपटना है. जबकि अमेरिकी अर्थव्यवस्था लचीली बनी हुई है, चीन और यूरोप में तनाव के संकेत हैं, जिसका अमेरिका पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है. अभी के लिए ऐसा लगता है कि पॉवेल डेवलपमेंट को समर्थन देने के बजाय मुद्रास्फीति को कैसे नियंत्रण में रखा जाए, इस पर अधिक ध्यान केंद्रित करेंगे.

हालांकि, ये कोई नहीं जानता कि पॉवेल आज क्या कहेंगे. उनके भाषण आक्रामक हो सकता है. उम्मीद जताई जा रही है कि फेड हाल के व्यापक आर्थिक रुझानों को ध्यान में रखेगा जो दर्शाता है कि अमेरिकी श्रम बाजार मुश्किल स्थिति में है. साथ ही महंगाई दर अभी भी अपने 2 प्रतिशत लक्ष्य से काफी ऊपर है.

दबाव में भारतीय बाजार

अमेरिकी बाजार के कमजोर संकेत की वजह से भारतीय स्टॉक मार्केट भी दबाव में है. आज बीएसई और निफ्टी दोनों ही इंडेक्स लाल निशान में नजर आ रहे हैं. दोपहर एक बजे सेंसेक्स 249.85 अंक या 0.38 फीसदी टूटकर 65,002.49 पर और निफ्टी 87.60 अंक या 0.45 फीसदी गिरकर 19,299.10 पर था. लगभग 1254 शेयर ऊपर चढ़े, 1812 शेयरों में गिरावट देखने को मिली और 95 शेयरों में किसी भी तरह बदलाव नजर नहीं आया.

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