राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी और अमेरिकी राजदूत नामित सर्जियो गोर 9 जनवरी को भारत पहुंच गए. वे द्विपक्षीय संबंधों में बढ़ते तनाव के बीच अपने कार्यकाल की शुरुआत करेंगे. सोशल मीडिया पर जानकारी शेयर करते हुए उन्होंने कहा कि भारत वापस आकर बहुत अच्छा लग रहा है.
एक्स पर अपनी पोस्ट में उन्होंने लिखा कि भारत आकर अच्छा लगर रहा है और हमारे दोनों देशों के लिए आगे अविश्वसनीय अवसर हैं. भारत और अमेरिका में बढ़ते टैरिफ तनाव के बीच उनका यह पोस्ट पॉजिटिव संकेत है. 38 साल गोर व्हाइट हाउस में कार्मिक निदेशक के पद पर कार्यरत थे, जब राष्ट्रपति ट्रंप ने अगस्त में उन्हें भारत के अगले अमेरिकी राजदूत के रूप में नामित किया था.
भारत अमेरिका में डील सबसे बड़ी चुनौती
ट्रंप के करीबी और प्रशासन में अपने प्रभाव के लिए मसहूर गोर से इस संवेदनशील दौर में वाशिंगटन की भारत नीति को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की उम्मीद है. अमेरिकी राजदूत के रूप में, उनकी प्राथमिक चुनौती संभवतः भारत-अमेरिका संबंधों को फिर से मजबूत करना होगा, जो राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा भारतीय वस्तुओं पर शुल्क में भारी वृद्धि के निर्णय के बाद काफी तनावपूर्ण हो गए हैं.
अमेरिका ने हाल ही में भारतीय निर्यात पर शुल्क को दोगुना करके 50 प्रतिशत कर दिया है, जिसमें भारत द्वारा रूसी कच्चे तेल की निरंतर खरीद से जुड़ा 25 प्रतिशत का अतिरिक्त शुल्क भी शामिल है. इस कदम के कारण दोनों देशों के बीच व्यापार तनाव बढ़ा हुआ है
500 फीसदी टैरिफ का खतरा
सर्जियो गोर की भारत में एंट्री ऐसे वक्त में हुई है, जब अमेरिका में एक नया प्रस्ताव सामने आया है और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसको मंजूरी भी दे दी है. इसके तहत अगर रूस-यूक्रेन के बीच शांति प्रस्ताव पर सहमति नहीं होती है तो रूस से तेल और यूरेनियम जैसी एनर्जी खरीदने वाले देशों पर 500 फीसदी तक टैरिफ लगाया जा सकता है. इस प्रस्ताव के कारण भारत, चीन और ब्राजील जैसे देशों में हलचल तेज हो गई है.
पिछले साल नवंबर में ली थी शपथ
गोर ने नवंबर के मध्य में भारत में अमेरिकी राजदूत के रूप में शपथ ली, इससे पहले अक्टूबर में अमेरिकी सीनेट ने उनकी नियुक्ति की पुष्टि कर दी थी, जिससे नई दिल्ली में उनकी तैनाती का रास्ता साफ हो गया था. गोर की यह यात्रा ऐसे वक्त में हो रही है जब भारत को रूस से कच्चे तेल की निरंतर खरीद पर भारी शुल्क वृद्धि के खतरे का सामना करना पड़ रहा है. अब देखना दिलचस्प होगा कि गोर भारत में किस तरह की रणनीति अपनाते हैं...