दिग्गज ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म फ्लिपकार्ट (Flipkart) में बड़ी हिस्सेदारी बेचने पर टाइगर ग्लोबल पर टैक्स लगना चाहिए या नहीं, इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला आया है. अदालत ने Tiger Global को झटका देते हुए साफ कहा है कि उसे टैक्स देना होगा. बता दें कि टाइगर ग्लोबल ने ई-कॉमर्स कंपनी में अपनी 1.6 अरब डॉलर (करीब 14440 करोड़ रुपये से ज्यादा) की हिस्सेदारी वॉलमार्ट को बेची है.
'ये सौदा टैक्स छूट का हकदार नहीं'
सुप्रीम कोर्ट ने इसे लेकर फैसला सुनाते हुए कहा कि कंपनी भारत-मॉरिशस संधि (India-Mauritius Treaty) के तहत टैक्स लाभ पाने की हकदार नहीं है. टाइगर ग्लोबल और वॉलमार्ट के बीच इस सौदे को लेकर हुए लेन-देन से होने वाले कैपिटल गेन्स पर भारत में टैक्स लागू होगा, क्योंकि देश के बाहर से होने वाली इनकम पर टैक्स लगाना उस देश का एक स्वाभाविक सॉवरेन अधिकार होता है.
फ्लिपकार्ट में टाइगर ग्लोबल की हिस्सेदारी बेचने से जुड़े इस मामले में गुरुवार को फैसला जस्टिस जेबी परदीवाला और आर महादेवन की बेंच ने सुनाया. सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि टाइगर ग्लोबल और वॉलमार्ट के बीच शेयर बिक्री समझौता टैक्स चोरी का एक तरीका था और इसलिए इसे किसी भी सूरत में टैक्स लाभ नहीं दिया जा सकता है.
राजस्व विभाग को बड़ी राहत
Supreme Court के इस फैसले को भारत के राजस्व विभाग के लिए एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है. यह उन सीमा पार लेन-देनों पर कर लगाने के मामले में सरकार की स्थिति को मजबूत करता है, जहां मूल वित्तीय गतिविधियां भारत में होती हैं.
रेवेन्यू अधिकारियों का भी लंबे समय से यह तर्क रहा है कि किसी भी संधि के लाभों का दुरुपयोग वैध कर दायित्वों से बचने के लिए नहीं किया जाना चाहिए, खासकर भारतीय कंपनियों से जुड़े बड़े सौदों के मामले में. लीगल एक्सपर्ट्स का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला भविष्य में विदेशी निवेशों की संरचना और भारतीय संपत्तियों से निकासी को प्रभावित कर सकता है.
अमेरिकी इन्वेस्टमेंट फर्म है टाइगर ग्लोबल
गौरतलब है कि ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट (Flipkart) में वालमार्ट (Walmart) ने लगातार अपनी हिस्सेदारी में बढ़ोतरी की है. इस क्रम में कंपनी ने हेज फंड टाइगर ग्लोबल (Tiger Global) की फ्लिपकार्ट में पूरी हिस्सेदारी खरीदी थी. टाइगर ग्लोबल एक अमेरिकी इन्वेस्टमेंट फर्म है और फ्लिपार्ट में सबसे बड़ी निवेशक रही है. मई 2018 में वॉलमार्ट द्वारा इससे खरीदी गई हिस्सेदारी करीब 77% थी.