शेयर बाजार में शुक्रवार को भी भारी गिरावट देखी जा रही है, जबकि एक दिन पहले भी शेयर बाजार बुरी तरह से टूटा था और निवेशकों के 8 लाख करोड़ से ज्यादा की वेल्थ कम हो गई थी. सप्ताह के आखिरी दिन भी गिरावट जारी रही. BSE Sensex 604 अंक गिरकर 83,576 पर बंद हुआ. वहीं Nifty 193 अंक टूटकर 25,683 पर पहुंच गया.
बीएसई टॉप 30 के 9 शेयरों को छोड़कर बाकी 21 शेयर गिरावट रही. एनटीपीसी में 2.35 फीसदी की गिरावट आई, जबकि ICICI Bank और सनफार्मा जैसे शेयर 2 फीसदी गिर गए. सेक्टर्स के हिसाब से बात करें तो सबसे ज्यादा असर रियल्टी, कंज्यूमर ड्यूरेबल, प्राइवेट बैंक, आईटी और हेलथकेयर सेक्टर्स में हुआ. इस गिरावट के मुख्यतौर पर 3 बड़े कारण सामने आए हैं.
500% ट्रंप टैरिफ का असर
सबसे ज्यादा असर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 500 फीसदी टैरिफ के प्रस्ताव को समर्थन देने के कारण आया है. अगर ये प्रस्ताव पास होता है तो रूस आयतक देशों पर 500 फीसदी तक टैरिफ अमेरिका लगा सकता है. इसी कारण शेयर बााजर का सेंटिमेंट बिखरा है. कई एक्सपोर्ट सेक्टर की कंपनियों में इसका ज्यादा असर भी दिखाई दे रहा है.
भारत-अमेरिका व्यापार समझौता रुका
इस टैरिफ प्रस्ताव के कारण व्यापारिक तनाव बढ़ा है. अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक ने एक इंटरव्यू में दावा किया कि भारत के साथ व्यापार समझौता इसलिए पूरा नहीं हो पाया, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन नहीं किया. लटनिक ने कहा कि पूरा समझौता तैयार हो चुका था, लेकिन इसे अंतिम रूप देने के लिए मोदी को ट्रंप को फोन करना जरूरी था.
उन्होंने कहा कि सबकुछ तय हो चुका था. दोनों देशों के बीच सहमति बन चुकी थी, बस मोदी को ट्रंप से बात करनी थी. लेकिन उनका फोन नहीं आया. वे ऐसा करने में असहज महसूस कर रहे थे. मोदी ने बात नहीं की. हमने इंडोनेशिया, फिलीपींस और वियतनाम के साथ व्यापारिक समझौते किए. हमने उनसे पहले भारत के साथ भी व्यापारिक समझौते की उम्मीद की थी.
अमेरिकी कोर्ट का फैसला
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार ने कहा कि कल राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा अनुमोदित रूस प्रतिबंध अधिनियम के प्रावधानों के तहत भारत पर लगभग 500 प्रतिशत टैरिफ लगाए जाने की संभावना के कारण बाजार में आई भारी गिरावट के बाद, बाजार का ध्यान आज अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रंप के टैरिफ की वैधता पर आने वाले फैसले पर फोकस है.
एक्सपर्ट्स का कहना है कि ट्रंप के खिलाफ फैसला आने की प्रबल संभावना है, लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि क्या फैसला आंशिक रूप से टैरिफ को रद्द करेगा या उन्हें पूरी तरह से अवैध घोषित करेगा. बाजार की प्रतिक्रिया इन विवरणों पर निर्भर करेगी.
(नोट- किसी भी शेयर में निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की मदद जरूर लें.)