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रातोंरात बंद होने जा रही अमेरिका की ये कंपनी, ट्रंप भी बचाने में फेल

अमेरिका की एक दिग्‍गज एयरलाइंस बंद होने की कगार पर आ चुकी है. ट्रंप सरकार ने आर्थिक मदद नहीं दी है, जिस कारण इसको रातोंरात बंद करने पर विचार करना पड़ा है.

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अमेरिकी एयरलाइंस होने जा रही बंद. (Photo: File/Reuters)
अमेरिकी एयरलाइंस होने जा रही बंद. (Photo: File/Reuters)

कम बजट में फ्लाइट की सुविधा देने वाली अमेरिका की एक एयरलाइन कंपनी बंद होने की कगार पर आ गई है. आर्थिक तंगी से जूझ रही अमेरिकी एयरलाइन Spirit, शुक्रवार को सरकार से आवश्यक वित्तीय सहायता न मिलने के बाद बंद होने के कगार पर पहुंच गई.

राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप भी इसे बचाने के प्रयास में विफल रहे हैं. ट्रंप का कहना है कि उनकी सरकार ने बजट एयरलाइन को दिवालिया होने से बचाने के लिए टैक्‍सपेयर्स के पैसे से अधिग्रहण का 'अंतिम प्रस्ताव' दिया था, लेकिन समझौता नहीं हो पाने के कारण एयरलाइन के भविष्य को संदेह में डाल दिया है.

रॉयटर्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि अब कंपनी शटडाउन की तैयारियां की जा रही है. स्पिरिट एयरलाइंस या ट्रंप प्रशासन की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि यह दो साल में दूसरी बार है, जब एयरलाइन दिवालियापन की कार्यवाई में फंसी है, लेकिन इस बाद ऑपरेशन बंद होने जा रहा है. ट्रंप ने पिछले सप्‍ताह एयरलाइन को फाइनेंशियल मदद देने का विचार किया था, लेकिन अब इस कंपनी आर्थिक मदद नहीं मिली है. 

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17,000 से ज्‍यादा नौकरियों पर संकट
स्पिरिट एयरलाइन के वकील मार्शल ह्यूब्नर ने कहा कि एयरलाइन बंद होने से लगभग 17,000 नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं. इस कंपनी की स्थिति कोविड महामारी के बाद से ही खराब चल रही है. ऑपरेशनल कॉस्‍ट और कर्ज में भारी बढ़ोतरी के कारण कंपनी पर बोझ बढ़ता जा रहा है. 

2020 से 2.5 अरब डॉलर से ज्‍यादा नुकसान 
नवंबर 2024 में दिवालियापन से बचने के लिए चैप्टर 11 के तहत आवेदन करने तक, स्पिरिट को 2020 की शुरुआत से 2.5 अरब डॉलर से अधिक का नुकसान हो चुका था. कोर्ट के दस्‍तावेज के अनुसार, बजट एयरलाइन ने अगस्त 2025 में एक बार फिर दिवालियापन से सुरक्षा की मांग की, जब उसने बताया कि उस पर 8.1 बिलियन डॉलर का कर्ज और 8.6 बिलियन डॉलर की संपत्ति है. 

लगातार बढ़ रहीं ईंधन की कीमतें
इस एयरलाइंस की आर्थिक तंगी की समस्‍या ऐसे समय में और भी ज्‍यादा हो गई हैं, जब ईंधन की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं. कच्‍चे तेल की कीमतें 126 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर जाने के बाद से लगातार ईंधन की कीमतों में इजाफा हुआ है. ऐसे में एयरलाइंस कंपनियों को घाटा हो रहा है. कई एयरलाइंस कंपनियों ने तो सरकार से ईंधन की कीमतों को कंट्रोल करने के लिए गुहार भी लगाई हैं.

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