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ईरान जंग के बीच बड़ी बैठक, बुधवार को फैसला, आपके Loan की EMI से जुड़ा है मामला

US-Iran War से बढ़ी ग्लोबल टेंशन के बीच RBI MPC बैठक हो रही है और इसका फैसला 8 अप्रैल को आएगा, जिसमें पता चलेगा कि आपके लोन की ईएमआई घटेगी या बढ़ेगी.

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बुधवार को आएगा रेपो रेट पर बड़ा फैसला. (Photo: PTI)
बुधवार को आएगा रेपो रेट पर बड़ा फैसला. (Photo: PTI)

अमेरिका-इजरायल और ईरान में युद्ध चल रहा है. होर्मुज बंद होने से तेल-गैस का संकट गहराया हुआ है और इसके चलते दुनिया की तमाम अर्थव्यवस्थाओं पर असर पड़ता नजर आ रहा है. Iran War के बीच भारतीय रिजर्व बैंक की मॉनिटरिंग कमेटी की बैठक शुरू हो गई है, जिसमें ग्लोबल टेंशन, क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल, महंगाई समेत अन्य अहम मुद्दों पर चर्चा होगी और रेपो रेट को लेकर बड़ा फैसला लिया जाएगा. Repo Rate पर लिया जाने वाला कोई भी निर्णय सीधे आपके होम लोन, ऑटो लोन की ईएमआई (Loan EMI) पर असर डालने वाला साबित होगा. 

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा के नेतृत्व में छह सदस्यीय समिति FY2026-27 की पहली एमपीसी बैठक के बाद बुधवार को फैसला सुनाएगी और पता चलेगा आपके लोन पर ईएमआई का बोझ घटने वाला है या फिर बढ़ने वाला. 

रेपो रेट पर बुधवार को फैसला
बीते साल आरबीआई ने एक के बाद एक कई बार रेपो रेट में कटौती कर लोन लेने वालों को तोहफा दिया था और Repo Rate में कुल 125 अंकों की कटौती की गई थी. लेकिन, इस साल फरवरी 2026 में कटौती के सिलसिले पर ब्रेक लग गया और केंद्रीय बैंक ने कोई बदलाव नहीं करते हुए 5.25 फीसदी पर इसे स्थिर रखा था. इस बार भी तमाम अर्थशास्त्री Repo Rate Unchanged रहने का अनुमान जाहिर कर रहे हैं. 

रेपो रेट में कटौती की उम्मीद नहीं
इकोनॉमिस्ट का कहना है कि आरबीआई वर्तमान हालातों में वित्तीय बाजारों को स्थिर करने, रुपये को समर्थन देने और बॉन्ड यील्ड को कंट्रोल करने के लिए लिक्वीडिटी बढ़ाने पर फोकस करेगा. पॉलिसी मेकर्स वेस्ट एशिया संघर्ष के प्रभावों का लगातार आकलन कर रहे हैं. उनका कहना है कि बुधवार को आरबीआई रेपो रेट को एक बार फिर से स्थिर रखने का फैसला ले सकता है. 

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रॉयटर्स द्वारा 23 से 26 मार्च के बीच किए गए एक सर्वे में 71 में से 69 अर्थशास्त्रियों ने रेपो दर को 5.25% पर स्थिर रहने का अनुमान लगाया. रेपो रेट स्थिर रहने का मतलब है कि आपके लोन की ईएमआई पर कोई असर नहीं होगा. 

ईरान युद्ध और एनर्जी संकट का असर
HSBC की चीफ इकोनॉमिस्ट प्रांजुल भंडारी की मानें, तो अगर ऊर्जा संकट (Energy Crisis) जारी रहता है, तो इसकी वजह से ग्रोथ रेट में मंदी महंगाई के दबाव से कहीं अधिक हो सकती है, जो कोरोना महामारी के दौरान देखी गई स्थितियों के समान होगी. उन्होंने ऐसी नीति अपनाने की अपील की, जो कि डिमांड को प्रोत्साहित करे और न ही उसे सीमित करे.

बहुत कुछ तेल की कीमतों के अनुमानों पर निर्भर करेगा और आपूर्ति में रुकावट की अवधि के आधार पर आउटलुक अलग हो सकते हैं. एचएसबीसी का अनुमान है कि अगर क्रूड की औसत कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल रहती है, तो India GDP Growth Rate 7% से घटकर 6.3% हो सकती है और कीमतें 100 डॉलर के आस-पास बनी रहने पर ये 6% तक गिर सकती है.

जेपी मॉर्गन के मुख्य भारत अर्थशास्त्री सज्जिद चिनॉय का कहना है कि बढ़ती महंगाई से यह विश्वास बढ़ रहा है कि आरबीआई रेपो रेट को स्थिर रखेगा. इसके अलावा SBI रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत, वेस्ट एशिया संकट के परिणामों का सामना कर रहा है. रुपया 93 डॉलर प्रति डॉलर से ऊपर और कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं. इस स्थिति से आयातित महंगाई में बढ़ोतरी हुई है. इकोनॉमिस्ट ने उम्मीद जाहिर की कि केंद्रीय बैंक यथास्थिति बनाए रखेगा.

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