भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) की रफ्तार तेज है और ये दुनिया में सबसे तेजी से आगे बढ़ती हुई इकोनॉमी में बना हुआ है. वर्ल्ड बैंक से लेकर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) तक ने इसका लोहा माना है. लेकिन तेजी से बढ़ते देश में, क्या आप जानते हैं कि कौन से राज्य सबसे ज्यादा कर्ज में डूबे हुए हैं? तो भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों पर नजर डाल लें, जिनसे पता चलता है कि कई बड़े राज्यों को कर्ज के बोझ तले दबकर अपने रेवेन्यू का एक बड़ा हिस्सा इनके ब्याज के भुगतान में खर्च करना पड़ता है.
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के FY2025 के आंकड़ों से पता चलता है कि कई बड़े राज्यों में कर्ज के ब्याज का भुगतान उसके अपने टैक्स और नॉन-टैक्स रेवेन्यू का 42% तक हिस्सा ले लेता है. इस तगड़े ब्याज भुगतान की वजह से इन राज्यों के पास सड़क, स्कूल, हेल्थ सर्विसेज और नए प्रोजेक्ट्स पर खर्च करने के लिए पैसों की कमी हो जाती है. कर्ज की मार झेल रहे भारत के 10 टॉप राज्यों के बारे में बात करें, तो...
पश्चिम बंगाल
वित्त वर्ष 2025 में पश्चिम बंगाल पर ब्याज भुगतान का बोझ अन्य राज्यों की तुलना में सबसे ज्यादा था. राज्य को टैक्स और नॉन टैक्स रेवेन्यू से 1.09 लाख करोड़ रुपये मिले थे, लेकिन सिर्फ ब्याज भुगतान पर 45 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए. इसका मतलब हुआ कि उसके राजस्व का 42% हिस्सा तो ब्याज चुकाने में ही चला गया.
पंजाब-बिहार
दूसरे पायदान पर पंजाब रहा, जिसने अर्जित रेवेन्यू का 34% हिस्सा ब्याज भुगतान करने में खर्च कर दिया. Punjab का राजस्व कलेक्शन 70,000 करोड़ रुपये था और इसने कर्ज के ब्याज भुगतान पर करीब 24,000 करोड़ रुपये खर्च किए. इसके बाद तीसरे नंबर पर Bihar का नाम आता है, जिसने 62,000 करोड़ रुपये के रेवेन्यू में से लगभग 21 हजार करोड़ रुपये का ब्याज भुगतान किया और ये इसका 33% रहा.
केरल-तमिलनाडु
केरल द्वारा FY2025 में 1.03 लाख करोड़ रुपये का रेवेन्यू कलेक्शन किया गया था और इसका 28% या करीब 29,000 करोड़ रुपये तो ब्याज के पेमेंट में ही चला गया. पांचवे नंबर पर तमिलनाडु रहा, जिसने अपने कलेक्शन में से 62,000 करोड़ रुपये या 28% का ब्याज पेमेंट किया था. इसके टैक्स रेवेन्यू सबसे अधिक रहा, लेकिन कर्ज की मार से ये राज्य भी बेहाल रहा.
हरियाण-राजस्थान और आंध्र प्रदेश
Top-10 कर्ज के तले दबे राज्यों में अगला नंबर हरियाणा का है और इसने 94,000 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाने के बाद इसमें से 27% या करीब 25,000 करोड़ रुपये का ब्याज भुगतान किया. सातवें पायदान पर राजस्थान था और राज्य ने 1.48 लाख करोड़ रुपये के राजस्व में से 38,000 करोड़ रुपये का ब्याज चुकाया. इसके अलावा आंध्र प्रदेश ने 1.2 लाख करोड़ रुपये के राजस्व पर 29 हजार करोड़ रुपये ब्याज भरा था.
MP-कर्नाटक
लिस्ट में नौवें स्थान पर मध्य प्रदेश शामिल हैं और इसका वित्त वर्ष 2025 में टैक्स और नॉन-टैक्स रेवेन्यू 1.23 लाख करोड़ रुपये रहा था, जिसमें से ब्याज के भुगतान पर 27,000 करोड़ रुपये या कुल कलेक्शन का करीब 22% खर्च हुआ. बात दसवें पायदान की करें, तो यहां पर कर्नाटक है, जिसका कलेक्शन 2.03 लाख करोड़ रुपये का था और ब्याज भुगतान 19% यानी 39,000 करोड़ रुपये रहा.