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राहत की बात: पेट्रोल-डीजल के 15 दिन बाद घटे दाम, जानें प्रमुख शहरों के रेट 

गुरुवार को दिल्ली में पेट्रोल प्रति लीटर 16 पैसे और डीजल 14 पैसे प्रति लीटर सस्ता हो गया. इससे पहले लगातार 15 दिनों तक पेट्रोल-डीजल के दाम में कोई बदलाव नहीं हुआ था.

ईंधन के दाम में कमी (फाइल फोटो) ईंधन के दाम में कमी (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • तेल कंपनियों ने आज राहत दी
  • पेट्रोल-डीजल के दाम में कटौती

करीब 15 दिन के बाद गुरुवार को तेल कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल की कीमत में कटौती कर लोगों को राहत दी है. गुरुवार को दिल्ली में पेट्रोल प्रति लीटर 16 पैसे और डीजल 14 पैसे प्रति लीटर सस्ता हो गया. 

इससे पहले लगातार 15 दिनों तक पेट्रोल-डीजल के दाम में कोई बदलाव नहीं हुआ था. कल कच्चे तेल के अंतरराष्ट्रीय  बाजार में कल करीब 5 फीसदी की तेजी दर्ज की गई. ब्रेंट क्रूड 66.52 डॉलर प्रति बैरल के आसपास और WTI क्रूड 63.03 डॉलर प्रति बैरल के आसपास चल रहा है. 

ये हैं प्रमुख शहरों के रेट 

गुरुवार को दिल्ली में पेट्रोल प्रति लीटर 16 पैसे सस्ता हो कर 90.56 रुपये से 90.40 रुपये पर आ गया. डीजल भी 14 पैसे प्रति लीटर सस्ता होकर 80.87 रुपये से घट कर 80.73 रुपये प्रति लीटर पर आ गया. इसी तरह मुंबई में पेट्रोल 96.82 रुपये और डीजल 87.81 रुपये लीटर, कोलकाता में पेट्रोल 90.62 रुपये और डीजल 83.61 रुपये लीटर तथा चेन्नै में पेट्रोल 92.43 रुपये और डीजल 85.73 रुपये लीटर हो गया है. 

गौरतलब है कि इसके पहले फरवरी में पेट्रोल, डीजल लगातार महंगे हुए थे. देश के कई राज्यों में जब विधानसभा चुनाव का समय आया तब पेट्रोल-डीजल में कुछ राहत मिलती मार्च में दिखी. फरवरी में करीब 16 बार पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाए गए थे और इससे पेट्रोल 4.74 रुपये महंगा हो गया था. इसी तरह डीजल 4.52 रुपये तक महंगा हो गया. लेकिन इसके बाद इनके दाम में तीन बार कटौती हुई जिससे पेट्रोल 61 पैसे और डीजल 60 पैसे सस्ता हो गया. 

जीएसटी में शामिल करने की मांग 

पेट्रोल, डीजल के दाम आसमान छूने लगे तो इस बात के लिए मांग बढ़ने लगी थी कि इन्हें जीएसटी में शामिल किया जाए ताकि इनके दाम में भारी कटौती हो सके. एक अनुमान के अनुसार पेट्रोल के दाम जीएसटी में आए तो यह अचानक 75 रुपये लीटर तक आ सकता है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने तो यहां तक कह दिया है कि वह इसके लिए तैयार हैं कि जीएसटी कौंसिल में चर्चा हो. लेकिन अभी यह इतना आसान नहीं लगता और इस पर अंतिम निर्णय जीएसटी कौंसिल को ही लेना है.

 

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