अमेरिका ने रिलायंस इंडस्ट्रीज को वेनुजुएला में तेल खरीदने के लिए लाइसेंस दे दिया है. अब रिलायंस बिना किसी अनुमति या सैक्शन के वेनेजुएला में तेल खरीद सकेगी. रॉयटर्स की रिपोर्ट में सोर्स के हवाले से ये जानकारी दी गई है. वहीं जनवरी में ही रिलायंस ने लाइसेंस के लिए अप्लाई किया था और अब लाइसेंस दे दिया गया है.
रिलायंस ने जनवरी में यह लाइसेंस पाने के लिए आवेदन किया था, और इससे पहले कंपनी ने करीब 2 मिलियन बैरल वेनेजुएला से कच्चा तेल खरीदा था, जो कि अप्रैल में डिलीवरी होने की उम्मीद है, ये खरीद व्यापारिक कंपनियों Vitol और Trafigura से हुई थी, जिन्होंने इसी तरह के लाइसेंस प्राप्त किए थे.
महीने की शुरुआत में अमेरिका द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार करने के बाद, अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि वाशिंगटन कराकास और वाशिंगटन के बीच 2 अरब डॉलर के तेल आपूर्ति समझौते और देश के तेल उद्योग के लिए एक महत्वाकांक्षी 100 अरब डॉलर की पुनर्निर्माण योजना को सुविधाजनक बनाने के लिए वेनेजुएला के ऊर्जा उद्योग पर लगाए गए प्रतिबंधों में ढील देगा.
इस फैसले के बाद अब भारत को तेल बेचने के लिए रिलायंस को लाइसेंस देने की खबर आई है. अमेरिकी लाइसेंस मिलने का मतलब है कि अब रिलायंस इडस्ट्रीज वेनेजुएला से भारी मात्रा में तेल बिना रोक-टोक के खरीद सकती है.
वेनेजुएला के तेल से रूसी तेल की भरपाई
रिलायंस को लाइसेंस देने से वेनेजुएला के तेल निर्यात में तेजी आ सकती है और दुनिया के सबसे बड़े रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स के संचालक के लिए कच्चे तेल की लागत कम हो सकती है. रॉयटर्स की रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि वेनेजुएला के तेल खरीदकर रिलायंस रूसी तेल की भरपाई करेगा.
सस्ते भाव पर मिल सकता है कच्चा तेल
RIL को यह लाइसेंस अमेरिका द्वारा वेनेजुएला के एनर्जी सेक्टर में लगे प्रतिबंधों को ढील देने की कड़ी में मिला है. जो कि वेनेजुएला और अमेरिकी सरकार के बीच एक बड़े तेल सप्लाई डील और ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर को डेवलेप करने की योजना के तहत है. इससे रिलायंस को सस्ते भाव पर कच्चे तेल मिल सकता है, क्योंकि वेनेजुएला का तेल आमतौर पर ब्रेंट रेफरेंस के मुकाबले डिस्काउंट पर मिलता है.
अमेरिका ने हटाया 25% टैरिफ
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस महीने की शुरुआत में भारत पर लगाए गए 25% दंडात्मक टैरिफ को हटा दिया था और कहा था कि भारत वेनेजुएला से अधिक तेल खरीदेगा. रिपोर्र्ट्स का दावा है कि रिलायंस समेत भारतीय रिफाइनरियां अप्रैल में डिलीवरी के लिए रूसी तेल की खरीद से बच रही हैं. रिफाइनिंग एवं व्यापार सूत्रों के अनुसार, वे लंबे समय तक ऐसे व्यापार से दूर रहने की उम्मीद कर रही हैं, एक ऐसा कदम जो नई दिल्ली को वाशिंगटन के साथ व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने में मदद कर सकता है.