अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध का असर पूरी दुनिया में देखने को मिल रहा है. इस जंग से खड़े हुए तेल-गैस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित ऐसे देश नजर आ रहे हैं, जो इनके आयात पर पूरी तरह से निर्भर हैं. खासतौर पर पाकिस्तान, बांग्लादेश से लेकर श्रीलंका तक में हालात लगातार खराब होते नजर आ रहे हैं. पाकिस्तान में तो शहबाज शरीफ सरकार ने ठीक वैसे ही नियम लागू किए हैं, जैसे कोरोना महामारी के समय में देखने को मिले थे. पेशेवरों को वर्क फ्रॉम होम दे दिया गया है, बच्चों की पढ़ाई ऑनलाइन कर दी गई है, तो पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तगड़ा इजाफा किया गया है.
तेल संकट में फंसा PAK बेहाल
Pakistan Oil Crisis की बात करें, तो ईरान युद्ध से होर्मुज स्ट्रेट में आई रुकावट के चलते पाकिस्तान को तेल की सप्लाई ठप पड़ गई है और Crude Oil Price Hike ने शहबाज सरकार की टेंशन को चरम पर पहुंचा दिया है. हालात ये हैं कि पाकिस्तान की सरकार ने कोरोना काल जैसे नियम लागू कर दिए हैं और ये सब तेल-गैस संरक्षण के लिए किए गए हैं. सरकार ने पहले ही पेट्रोल की कीमत में 55 PKR प्रति लीटर का इजाफा करके इसे 335.86 रुपये प्रति लीटर कर दिया है, तो वहीं हाई स्पीड डीजल की कीमत करीब 20% इजाफे के साथ 280.86 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर हो चुकी है.
रिपोर्ट्स की मानें, तो PM Shahbaz Sharif ने तेल की खपत घटाने और ऊर्जा संकट से निपटने के लिए स्कूल-कॉलेज से लेकर सरकारी दफ्तरों तक के लिए नए नियमों की घोषणा की है. इनमें दो हफ्तों के लिए स्कूल-कॉलेज बंद करना, हायर एजुकेशन क्लासेस को ऑनलाइन मोड में शिफ्ट करना, सरकारी दफ्तरों में 4-Day Work Week और 50% कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम (Work From Home) शामिल है. यही नहीं पेट्रोल-डीजल की बचत के लिए सरकारी वाहनों के यूज में 60% तक और फ्यूल अलाउंस में 50% तक कटौती पर विचार हो रहा है. यहां तक कि सांसदों की सैलरी में भी कटौती किए जाने की तैयारी से जुड़ी खबरें चर्चा में हैं. सबसे चौंकाने वाला फैसला ये है कि सरकार ने इफ्तार पार्टियों पर भी लगाम लगाने का फैसला भी कर लिया है.

बांग्लादेश में तेल पर हाहाकार
न सिर्फ पाकिस्तान, बल्कि बांग्लादेश में भी मिडिल ईस्ट की जंग का असर दिखा और तेल संकट से हाहाकार मचा हुआ है. बांग्लादेश सरकार ने Petrol-Diesel की बिक्री को कंट्रोल करने के लिए कड़े कदम उठाते हुए राशनिंग सिस्टम लागू कर दिया है और इसमें तय मात्रा के मुताबिक ही फ्यूल दिया जाएगा. इसके अलावा रिपोर्ट्स की मानें तो पेट्रोल पंपों पर वाहनों की लंबी कतारें लगी हैं, जो तेल संकट से खड़ी हुई परेशानी को दर्शाती हैं. हालांकि, Bangladesh Oil Crisis के बीच भारत ने बांग्लादेश से हुए पाइपलाइन समझौते के तहत डीजल की आपूर्ति शुरू की है और फिलहाल 5,000 टन की पहली खेप भेजी है.
वियतनाम में भी बुरे हैं हालात
खाड़ी देशों में संकट से पैदा हुए Oil Crisis की चपेट में वियतनाम भी आया है और देश में तेल बचाने के लिए यहां भी लोगों से घर से काम करने के लिए कहा गया है. बिजनेस टुडे पर छपी रिपोर्ट के मुताबिक, वियतनामी व्यापार मंत्रालय ने व्यवसायों को यात्रा और परिवहन की आवश्यकता को कम करने के लिए कहा गया है. जहां तक संभव हो घर से काम करने को प्रोत्साहित किया गया है. इसके अलावा पेट्रोल-डीजल समेत अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की जमाखोरी या सट्टेबाजी रोकने के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं.

श्रीलंका में भी संकट का असर
बात श्रीलंका की करें, तो यहां भी Middle East War के चलते पैदा हुए तेल संकट का असर दिखा है और इससे आम लोग बुरी तरह प्रभावित हुए हैं. सरकार ने Fuel Price Hike के साथ ही और भी बड़े फैसले लिए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश में ऑटो डीजल 22 बांग्लादेशी रुपये (टका) की वृद्धि के साथ 303 टका प्रति लीटर, सुपर डीजल 24 टका बढ़कर 353, पेट्रोल 25 टका की बढ़ोतरी के बाद 365 और केरोसिन 13 टका बढ़कर 195 टका हो गया है. Daily Mirror के मुताबिक, कई स्कूलों में ट्रांसपोर्ट फीस में 5% तक की बढ़ोतरी कर दी है.
भारत में LPG की किल्लत गहराई
अब बात भारत की करें, तो मिडिल ईस्ट टेंशन के बीच सरकार ने पर्याप्त तेल रिजर्व होने का दावा किया है, लेकिन एलपीजी की किल्लत नजर आने लगी है. देश में घरेलू और कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में पहले ही इजाफा देखने को मिल चुका है. हालांकि, पेट्रोलियम मंत्रालय की ओर से इस संकट से निपटने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं. LPG Cylinder Booking Rule Change किया है और इसकी लिमिट को 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है. इसके साथ ही सरकार ने एलपीजी प्रोडक्शन बढ़ाने और इसे घरेलू व अन्य जरूरी क्षेत्रों में पहले आपूर्ति सुनिश्चित करने के आदेश दिए हैं.