कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, केरल और तेलंगाना, दक्षिण भारत के ये पांच राज्य (Southern Indian States) देश के आर्थिक विकास (Economic Growth) में प्रमुख रूप से योगदान करने वाले प्रदेशों में से एक हैं. भारत की जीडीपी (GDP) में इन पांच राज्यों की हिस्सेदारी 30 फीसदी है. भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) से उपलब्ध डेटा, और इन राज्यों के आर्थिक सर्वेक्षणों (Economic surveys) से पता चलता है कि FY23 में तमिलनाडु, मौजूदा कीमतों पर 24.8 लाख करोड़ रुपये की GSDP के साथ, दक्षिण भारत की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है. इसके बाद कर्नाटक 22.4 लाख करोड़ रुपये, तेलंगाना 13.3 लाख करोड़ रुपये, आंध्र प्रदेश 13.2 लाख करोड़ रुपये और केरल 10 लाख करोड़ रुपये की GSDP के साथ ये 5 राज्य देश की इकोनॉमी की ग्रोथ में मजबूत भूमिका निभा रही हैं.
प्रति व्यक्ति आय
भारत के सबसे मजबूत अर्थव्यवस्था वाले राज्यों की प्रति व्यक्ति आय, राज्य ऋण, टैक्स रेवेन्यू, ब्याज भुगतान अनुपात और राजकोषीय घाटे के आंकड़ों को भी जान लेते हैं. प्रति व्यक्ति आय के मोर्चे पर FY22 में तेलंगाना टॉप पर रहा. तेलंगाना ने 2,75,443 रुपये की उच्चतम प्रति व्यक्ति आय दर्ज की. कर्नाटक 2,65,623 रुपये के साथ दूसरे स्थान पर है. इसके बाद 2,41,131 रुपये के साथ तमिलनाडु तीसरे, 2,30,601 रुपये के साथ केरल चौथे और 2,07,771 रुपये के साथ आंध्र प्रदेश पांचवें नंबर पर है. इन सभी राज्यों की प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत 1,50,007 रुपये से अधिक है.
सबसे कम कर्ज वाला राज्य
जीएसडीपी अनुपात में राज्यों के कर्ज के रेश्यों के आंकड़े पर नजर डालें, तो पांचों प्रमुख दक्षिण भारतीय राज्यों में से जीएसडीपी अनुपात में सबसे कम कर्ज तेलंगाना का 25.3 फीसदी है. इसके बाद सूची में कर्नाटक (27.5 फीसदी), तमिलनाडु (27.7 फीसदी), आंध्र प्रदेश (32.8 फीसदी) और केरल (37.2 फीसदी) है.
टैक्स रेवेन्यू के मोर्चे पर कौन आगे
FY22 में राज्यों के टैक्स रेवेन्यू के मोर्चे पर तमिलनाडु टॉप पर है. बजट अनुमान (BE) से पता चलता है कि 1,26,644 करोड़ रुपये के उच्चतम टैक्स रेवेन्यू के साथ तमिलनाडु शीर्ष स्थान पर है. इसके बाद कर्नाटक (1,11,494 करोड़ रुपये) का स्थान है. तेलंगाना का टैक्स रेवेन्यू 92,910 करोड़ रुपये, आंध्र प्रदेश का 85,265 करोड़ रुपये और केरल का 71,833 करोड़ रुपये है. हाई टैक्स रेवेन्यू इस बात के संकेत देता है कि राज्य बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य और शिक्षा में सुधार पर अधिक खर्च कर सकता है.
ग्रॉस राजकोषीय घाटा (Gross Fiscal Deficit)
कम राजकोषीय घाटे का अनुपात राज्य की आर्थिक ताकत को दर्शाता है, क्योंकि सरकार को राज्य के खर्चों को पूरा करने के लिए कम पैसा उधार लेना पड़ता है. इस मामले में कर्नाटक नंबर एक है. इसका राजकोषीय घाटा सबसे कम (2.8 प्रतिशत) है. इसके बाद आंध्र प्रदेश (3.2 प्रतिशत), तमिलनाडु (3.8 प्रतिशत), तेलंगाना (3.9 प्रतिशत) का स्थान है. केरल 4.2 प्रतिशत के राजकोषीय घाटे के साथ अंतिम स्थान पर है.
राजस्व प्राप्तियों के अनुपात में ब्याज भुगतान
राजस्व प्राप्तियों के अनुपात में ब्याज भुगतान (Interest Payments to Revenue Receipts ratio) इस बात के संकेत देता है कि कर्ज चुकाने के लिए कितने पैसों की आवश्यकता है. क्योंकि यदि ब्याज का भुगतान अधिक है तो राज्य के पास विकास के कार्यों पर खर्च करने के लिए कम पैसा है.
इस मामले में दक्षिण भारत के राज्यों में तेलंगाना (11.3 प्रतिशत) का सबसे कम ब्याज भुगतान अनुपात है. इसके बाद कर्नाटक (14.3 प्रतिशत), आंध्र प्रदेश (14.3 प्रतिशत), केरल (18.8 प्रतिशत) और पांचवें स्थान पर तमिलनाडु (21 प्रतिशत) है. इन पांच दक्षिण भारतीय राज्यों के बीच कड़ा मुकाबला है. वहीं, तेलंगाना और कर्नाटक अधिकांश आर्थिक मापदंडों पर टॉप परफॉर्मर हैं. बाकी के अन्य तीन राज्य भी बहुत पीछे नहीं हैं. ये सभी राज्य देश की आर्थिक प्रगति के इंजन हैं.