इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 2026 का आयोजन नई दिल्ली स्थित ताज होटल में हो रहा है. इसमें शामिल होने के लिए वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल भी पहुंचे. उन्होंने माइनिंग सेक्टर में बढ़ते कदम, इसमें आने वाली दिक्कतों के बारे में खुलकर बात की. इसके साथ ही ईरान युद्ध के चलते मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण तेल-गैस संकट से उबरने के तरीकों के बारे में भी बताया. उन्होंने कहा कि भारत के पास सोना-चांदी, कॉपर-बॉक्साइट से लेकर तेल-गैस सब कुछ है और हमारी कंपनियों के पास संकट के समय में प्रोडक्शन बढ़ाने की पर्याप्त क्षमता है.
'सब कुछ मौजूद, जरूरत सिर्फ ये'
ईरान युद्ध के चलते दुनिया में तेल-गैस की सप्लाई बाधित होने और भारत जैसे बड़े देश में गैस की किल्लत आने के सवाल पर अनिल अग्रवाल ने बड़ी बात कही. उन्होंने कहा कि भारत में Oil-Gas, Gold-Copper सब कुछ मौजूद है और इन सेक्टर्स के जुड़ी जो कंपनियां हैं, उनमें ऐसे हालातों के दौरान 10-20 गुना प्रोडक्शन बढ़ाने की क्षमता भी है.
वेदांता चेयरमैन ने कहा कि आज भारत के कुल आयात में 60 फीसदी जमीन के नीचे की चीजों का इंपोर्ट हो रहा है. हमारे पास सब मौजूद है और भारत के लोग सक्षम भी हैं, लेकिन काम करने वालों में भय का माहौल नहीं होना चाहिए. अनिल अग्रवाल के मुताबिक, सरकार अच्छी मंशा से काम कर रही है, लेकिन माइनिंग सेक्टर को लेकर सिस्टम में कुछ चेंज करना जरूरी है. इससे जुड़े बिजनेस को आगे बढ़ाने की क्षमता भारतीय लोगों में है, लेकिन इसके लिए सेल्फ सर्टिफिकेशन होने जरूरी है. आज जो माइन्स की बोली लगती है वो खुलते खुलते ही पांच साल लग जाते हैं.
'दुनिया चाहती है भारत सिर्फ बाजार रहे'
Anil Agarwal ने एक बड़ी बात बोलते हुए कहा कि दुनिया चाहती है कि भारत सिर्फ एक मार्केट बना रहे. मिडिल ईस्ट के देश किसी भी हालत में ऐसा नहीं चाहते हैं भारत ऑयल और गैस प्रोडक्शन में आगे बढ़े, इसके पीछे उनकी चिंता ये है कि अगर ऐसा होगा, तो वो क्या करेंगे, उनके तेल-गैस का क्या होगा. भारत के माइनिंग सेक्टर को आगे बढ़ाने पर जोर देते हुए वेदांता चेयरमैन ने कहा कि आज सबसे बड़ी जरूरत है इंपोर्ट कम करना, रोजगार बढ़ाना, गरीबी कम करना है और इसमें सबसे अहम रोल माइनिंग का हो सकता है.
अगर ऐसा न किया तो खरीदार बने रहेंगे
भारत सरकार को ऑयल गैस सेक्टर में प्राइवेट कंपनियों की भागीदारी बढ़ाने पर विचार करने के सवाल पर अनिल अग्रवाल ने कहा कि इसके अलावा कोई और चारा नहीं है. अगर ऐसा नहीं किया जाता है, तो फिर हमें मिडिल ईस्ट से ही तेल खरीदना जारी रखना होगा. भारत निवेश के लिए सबसे बेहतर ठिकाना बना हुआ है. ऐसा करके हम अपने उत्पादन को बढ़ा सकते हैं और युद्ध जैसी स्थिति में अपनी एनर्जी सिक्योरिटी को सुनिश्चित कर सकते हैं.
सेल्फ सर्टिफिकेशन पर जोर
अनिल अग्रवाल ने कहा कि हमारे पास तेल, गैस, सोना, कॉपर सब है और मौजूद संसाधन के जरिए उत्पादन बढ़ाने पर जोर देना होगा. हमारे पास जहां ह्यूमन रिसोर्सेज की कमी नहीं है, तो भारत के पास पर्याप्त मात्रा में अल्टरनेटिव एनर्जी प्रोडक्ट भी हैं, जैसे कोयला. इस बीच वेदांता चेयरमैन ने माइनिंग सेक्टर में सेल्फ सर्टिफिकेशन पर जोर देते हुए कहा कि इसका फायदा मिलेगा और उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा.
भारत के एंटरपेन्योर्स को सरकार का पूरा सपोर्ट होना चाहिए, उन्हें जितना आगे बढ़ाया जाएगा, भारत आगे बढ़ेगा. माइनिंग सेक्टर को पूरी तरह से खोला जाना चाहिए. अग्रवाल के मुताबिक, भारत में तेल-गैस की खपत आने वाले समय में डबल होगी, क्योंकि आबादी ज्यादा है. ऐसे में जरूरी है कि छोटे-मिडिल क्लास और बड़े कारोबारियों के लिए सेल्फ सर्टिफिकेशन सुविधा होना जरूरी है यानी सरकारी दखल कम से कम हो और इससे हम एनर्जी सेक्टर्स में आगे बढ़ सकते हैं.