मिडिल ईस्ट में जंग छिड़ने के बाद सोना और चांदी के दाम (Gold-Silver Price) में उछाल देखी जा रही है, लेकिन Gold-Silver ईटीएफ के भाव में बड़ी गिरावट आई है. गोल्ड ईटीएफ के दाम में 3 से 4 फीसदी तक गिर गए हैं, जबकि सिल्वर ईटीएफ के दाम में 7 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई है. यह गिरावट जियो-पॉलिटिकल टेंशन के बीच आई है और एक्सपर्ट्स उम्मीद लगा रहे थे कि इन ईटीएफ के दाम में तेजी आई है.
हालांकि, मल्टी कमोडिटी मार्केट (MCX) में होली के दिन यानी 4 मार्च को सोने और चांदी के भाव में तेजी देखी जा रही है. 2 अप्रैल वायदा के लिए 10 ग्राम सोने का भाव 2381 रुपये चढ़कर 1,63,511 रुपये पर है. वहीं मार्च वायदा के लिए एक किलो चांदी का भाव 7000 रुपये चढ़कर 2,72,400 रुपये पर है. अब सवाल उठता है कि जब सोने और चांदी के भाव में तेजी है तो फिर क्यों इन असेट से जुड़े ETFs में भारी गिरावट आई है.
क्यों आई गोल्ड-सिल्वर ईटीएफ में गिरावट?
दरअसल, यह गिरावट मंगलवार को ग्लोबल बुलियन मार्केट में आई गिरावट के कारण है और मंगलवार को भारतीय बुलियन मार्केट बंद था. 3 मार्च को सोने की कीमत 4 प्रतिशत से अधिक गिर गई थी और यह एक सप्ताह से अधिक के अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई थी. इसी तरह, चांदी में भी गिरावट रही, जो करीब 8 फीसदी तक थी. यह गिरावट मजबूत अमेरिकी डॉलर और निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों के कम होने के कारण आई थी.
सोने और चांदी के ईटीएफ कितना गिरे?
चांदी से जुड़े ईटीएफ में सबसे तेज गिरावट देखी गई. शुरुआती कारोबार में ICICI प्रूडेंशियल सिल्वर ईटीएफ में 7.33 प्रतिशत, निप्पॉन इंडिया सिल्वर ईटीएफ में 7.12 प्रतिशत, SBI सिल्वर ईटीएफ में 7.18 प्रतिशत और टाटा सिल्वर ईटीएफ में 7.43 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई.
गोल्ड ईटीएफ में भी गिरावट दर्ज की गई. ICICI प्रूडेंशियल गोल्ड ईटीएफ में 3.87 प्रतिशत, निप्पॉन इंडिया ईटीएफ गोल्ड में 3.3 प्रतिशत, SBI गोल्ड ईटीएफ में 3.52 प्रतिशत और टाटा गोल्ड ईटीएफ में लगभग 3.09 प्रतिशत की गिरावट आई.
इंटरनेशनल मार्केट में सोने का भाव
इंटरनेशनल मार्केट में सुधार के बावजूद, घरेलू सोने की कीमतें हाल के रिकॉर्ड स्तर 5,300 डॉलर प्रति औंस से नीचे गिरने के बाद भी स्थिर बनी हुई हैं. वहीं दिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत लगभग 2,800-2,900 रुपये प्रति 10 ग्राम गिर गई है, जिससे कीमतें 1.67 लाख रुपये के करीब पहुंच गई हैं.
एक्सपर्ट्स का कहना है कि कीमती धातुओं में हालिया अस्थिरता भू-राजनीतिक तनावों से प्रेरित सुरक्षित मांग और मजबूत डॉलर के दबाव व ऊर्जा की बढ़ती कीमतों से जुड़ी महंगाई संबंधी चिंताओं के बीच उतार-चढ़ाव को दिखाती है. इसमें किसी भी तरह की खरीदारी से पहले सतर्कता बरतने की आवश्यकता है.
(नोट- किसी भी शेयर में खरीदारी से पहले योग्य वित्तीय सलाहकार की मदद जरूर लें.)