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'ईंधन के लिए बड़ा संकट...' इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी को वर्ल्‍ड में बड़े खतरे की आशंका

इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी को विश्‍व में बड़े खतरे की आशंका है. IEA ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि तेल की मांग में भारी कमी होने का अनुमान है, जो कोविड के बाद सबसे बड़ी कमी होगी.

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तेल की मांग में भारी कमी की आशंका. (Photo: Reuters)
तेल की मांग में भारी कमी की आशंका. (Photo: Reuters)

इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) ने तेल को लेकर बड़ी चेतावनी दी है और कहा है कि ईरान वॉर के कारण रुकावट आने से ग्‍लोबल तेल की मांग में कमी आने की संभावना है. एनर्जी एजेंसी का कहना है कि तेल की मांग में इस साल 80 किलो बैरल प्रति दिन की गिरावट आने की अशंका है, जो कोविड महामारी के बाद से सबसे तेज गिरावट हो सकती है. 

IEA की रिपोर्ट में कहा गया है कि मार्च में ग्‍लोबल तेल आपूर्ति में 10.1 मिलियन बैरल हर दिन की भारी गिरावट आई और यह घटकर 97 मिलियन बैरल प्रति दिन रह गई, जिसे इतिहास की सबसे बड़ी रुकावट बताया गया है. वेस्‍ट एशिया में एनर्जी इंफ्रा पर लगातार हमलों और होर्मुज से टैंकरों की आवाजाही पर बैन के कारण यह गिरावट आई. 

OPEC+ देशों का उत्पादन तेजी से गिरा, जबकि रुकावटों के कारण Non-OPEC+ देशों की आपूर्ति में भी गिरावट आई. कच्चे तेल की कमी और बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान के कारण कच्चे तेल के उत्पादन में गिरावट आई है, जिससे रिफाइनर्स भी प्रभावित हुए हैं. पश्चिम एशिया और एशिया की रिफाइनरियों ने उत्पादन में काफी कटौती की है, जिससे वैश्विक उत्पाद बाजारों में प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है और लाभ मार्जिन में कमी हुई है. 

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इसी दौरान, मार्च में वैश्विक तेल भंडार में 85 मिलियन बैरल की गिरावट आई, पश्चिम एशिया के बाहर भारी कमी देखी गई, जबकि एक्‍सपोर्ट रुख में रुकावट होने के कारण इस क्षेत्र के भीतर फ्लोटिंग स्टोरेज में तेजी हुई है. आपूर्ति में आए अचानक बदलाव के कारण तेल की कीमतों में उछाल आया और मार्च में मंथली बेस पर अब तक की सबसे बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई. 

तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी
एजेंसी ने कहा कि बेंचमार्क कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर लगभग 130 डॉलर प्रति बैरल हो गईं, जो संघर्ष के पहले से कहीं अधिक है, जबकि कच्चे तेल की ग्राउंड लेवल पर 150 डॉलर के करीब पहुंच गईं क्योंकि रिफाइनर आपूर्ति सुरक्षित करने के लिए कम्‍पिट कर रहे हैं. एजेंसी ने आगे कहा कि रिफाइन उत्पादों में और भी तेज वृद्धि देखी गई, जो आपूर्ति में गंभीर बाधाओं को दर्शाती है. 

होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर माल ढुलाई में आई बाधा इस संकट का मुख्य कारण रही है. अप्रैल की शुरुआत में इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से तेल का प्रवाह तेजी से गिर गया, जिससे शिपमेंट संघर्ष के एक अंश तक कम हो गया. हालांकि वैकल्पिक निर्यात मार्गों ने कुछ हद तक इसकी भरपाई की है, लेकिन तेल निर्यात में कुल नुकसान काफी अधिक है और आपूर्ति में आई कुल बाधाओं से करोड़ों बैरल तेल का नुकसान हुआ है. 

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एनर्जी और इकोनॉमी के लिए बड़ा खतरा 
इसका असर मांग पर भी दिखने लगा है, खासकर मिडिल ईस्‍ट और एशिया प्रशांत क्षेत्र में, जहां कमी और बढ़ती कीमतों ने नेफ्था, एलपीजी और जेट ईंधन की खपत को बुरी तरह प्रभावित किया है. इनकी कीमतों में भारी बढ़ोतरी देखी  गई है. उड़ानों के रद्द होने और औद्योगिक गतिविधियों में कमी ने ईंधन के उपयोग पर और भी दबाव डाला है. अनुमान है कि हाल के महीनों में वैश्विक मांग में भारी गिरावट आई है. 

आईईए ने आगे चेतावनी देते हूए कहा कि भविष्य की संभावनाएं अत्यधिक अनिश्चित बनी हुई हैं और यह इस बात पर निर्भर करता है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर होने वाला जहाजरानी संचालन सामान्य हो पाता है या नही. आईईए का मानना ​​है कि मध्‍य के साल में कुछ सुधार होगा, हालांकि यह लड़ाई से पहले वाले स्तर तक नहीं पहुंचेगा, लेकिन उसने चेतावनी दी कि लंबे समय तक चलने वाला संघर्ष वैश्विक ऊर्जा बाजारों और व्यापक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी रुकावट पैदा कर सकता है. 

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