अमेरिका-ईरान युद्ध की चौतरफा मार देखने को मिल रही है. मिडिल ईस्ट टेंशन और होर्मुज बंद होने से तेल-गैस का संकट पहले से ही विकराल रूप ले चुका है, तो वहीं अन्य सेक्टर्स पर भी इसका सीधा और बुरा असर देखने को मिल रहा है. राजस्थान के बीकानेर के स्नैक्स की दुनिया में डिमांड है, लेकिन युद्ध के चलते इसका निर्यात करने वाले व्यापारी भी संकट में हैं और ये जंग लंबी खिंचने से उनकी परेशानी बढ़ती ही जा रही हैं. भुजिया से लेकर पापड़ तक के जहाजों का निर्यात लगातार महंगा होता जा रहा है.
बीकानेरी स्नैक्स निर्यातकों ने कहा कि कंटेनरों की आवाजाही काफी धीमी हो गई है और जो शिपमेंट पहले लगभग 30 दिनों में पहुंच जाते थे, अब अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच लंबे और सुरक्षित रूट्स को अपनाने के कारण 60 दिनों तक का समय लग रहा है. इससे लागत में तगड़ा इजाफा हो रहा है.
खाड़ी से यूरोपीय बाजारों तक संकट
पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का असर राजस्थान के बीकानेर क्षेत्र के निर्यातकों पर पड़ना शुरू हो गया है, जिसके चलते खाड़ी और यूरोपीय बाजारों में बीकानेर की मशहूर भुजिया, पापड़ और मसालों जैसे लोकप्रिय फूड प्रोडक्ट्स की खेप पहुंचने में काफी दिक्कतें पेश आ रही हैं.
नमकीन उद्योग के लिए फेमस बीकानेर खाड़ी क्षेत्र के देशों के साथ-साथ यूरोप के कुछ हिस्सों में बड़ी मात्रा में स्नैक्स, मसाले और अन्य प्रोडक्ट का निर्यात करता है. पीटीआई की एक रिपोर्ट में स्नैक्स निर्यातकों के हवाले से कहा गया है कि US-Iran संघर्ष की वजह से माल ढुलाई में देरी, माल ढुलाई शुल्क में वृद्धि और कंटेनरों की कमी हो गई है, जिससे निर्यात और आयात दोनों प्रभावित हुए हैं.
कच्चे माल के दाम में बंपर उछाल
ईरान युद्ध से संकट में आए बीकानेर के नमकीन व्यापारियों की मानें, तो बढ़ती माल ढुलाई शुल्क और कच्चे माल की बढ़ती कीमतों ने उद्योग पर दबाव डाला है. भीखाराम समूह से जुड़े नमकीन व्यापारी आशीष अग्रवाल ने बताया कि ईरान युद्ध के कारण पिछले एक महीने में खाद्य तेल की लागत में लगभग 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जिसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ रहा है.
निर्यातकों ने कहा कि कंटेनरों की आवाजाही धीमी होने से जहाजों को लंबे और सुरक्षित मार्ग अपनाने पर रहे हैं, जिससे लागत बढ़ रही है. राजेश जिंदल (निर्यातक) ने कहा कि आने और जाने वाले दोनों प्रकार के माल में देरी हो रही है, जिससे व्यापारियों पर वित्तीय संकट का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने बताया कि अरब देशों में बीकानेरी स्नैक्स और मसालों की मांग मजबूत बनी हुई है, लेकिन सप्लाई चेन में रुकावट के कारण नुकसान हो रहा है.
व्यापारियों का कहना है कि निर्यात के अलावा, ताड़ के तेल और सोयाबीन जैसे प्रमुख कच्चे माल के आयात भी प्रभावित हुए हैं. पेट्रोलियम की बढ़ती कीमतों ने पैकेजिंग लागत को 30-40 फीसदी तक बढ़ा दिया है, जिससे निर्माताओं पर बोझ और बढ़ गया है.
इन देशों के साथ बड़ा है कारोबार
स्नैक्स उद्योग के अनुमानों के अनुसार, बीकानेर से हर महीने भुजिया, पापड़ और नमकीन के लगभग 15 से 20 कंटेनर निर्यात किए जाते हैं. इसके साथ ही अन्य सामानों के लगभग 60 कंटेनर भी एक्सपोर्ट होते हैं. फिलहाल, मिडिल ईस्ट युद्ध से चलते चरम पर पहुंची ग्लोबल टेंशन की वजह से इस व्यापार में काफी मंदी आई है और करोड़ों रुपये के माल बंदरगाहों पर या रास्ते में अटके हुए हैं.
बीकानेर से माल की खेप मुख्य रूप से समुद्र के रास्ते ईरान, इराक, ओमान, यूएई, कतर और बहरीन जैसे देशों के साथ-साथ ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस, इटली और स्पेन जैसे यूरोपीय देशों को भेजी जाती है.