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बिज़नेस न्यूज़

अगर होर्मुज पूरी तरह हुआ बंद, तो सिर्फ ये रास्‍ते तय करेंगे दुनिया का भविष्‍य!

बंद होने पर सप्‍लाई में भारी गिरावट
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अभी भी होर्मुज को लेकर को लेकर अस्थिरता बनी हुई है. अगर ये मार्ग पूरी तरह से ठप हो जाता है तो ग्‍लोबल ऑयल सप्‍लाई में भारी रुकावट आएगी. सीमित पाइपलाइनें, महंगे वैकल्पिक मार्ग और आपातकालीन भंडार ऊर्जा बाजारों पर पड़ने वाले इस झटके की पूरी तरह से भरपाई नहीं कर पाएंगे. 

20 फीसदी ग्‍लोबल सप्‍लाई
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20 फीसदी ग्‍लोबल सप्‍लाई: अमेरिकी ऊर्जा सूचना विभाग के अनुसार, वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20% हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है. अगर इसमें रुकावट आती है, तो यह केवल जहाजरानी का मुद्दा नहीं होगा, बल्कि एक वैश्विक आर्थिक संकट आ सकता है. 

ये रास्‍ता भी नहीं आएगा काम
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ये रास्‍ता भी नहीं आएगा काम: सऊदी अरब की पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन कच्चे तेल को लाल सागर तक पहुंचाकर एक छोटा सॉल्‍यूशन प्रोवाइड कराती है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इसकी अतिरिक्त क्षमता होर्मुज से होने वाली सप्‍लाई की पूरी तरह से भरपाई नहीं कर सकती, जिससे संकट की स्थिति में आपूर्ति में एक महत्वपूर्ण अंतर रह जाएगा.

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UAE ने भी बनाया बाईपास
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UAE ने भी बनाया बाईपास: संयुक्त अरब अमीरात ने पहले ही एक बाईपास बना लिया है - अबू धाबी की पाइपलाइन जो होर्मुज के बाहर फुजैराह बंदरगाह तक जाती है. विश्लेषकों का कहना है कि यह प्रतिदिन लगभग 1.5 से 1.8 मिलियन बैरल तेल ले जा सकती है, जो एक रणनीतिक लेकिन सीमित रास्‍ता देता है.

इस मार्ग पर ज्‍यादा लागत
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इस मार्ग पर ज्‍यादा लागत: जहाज लंबे समुद्री मार्गों से होकर जा सकते हैं, लेकिन इसकी कीमत चुकानी पड़ती है. एक्‍सपर्ट्स का कहना है कि इन मार्गों से ईंधन, बीमा और परिवहन समय में वृद्धि होती है , जिससे आपूर्ति की कमी से पहले ही वैश्विक तेल की कीमतें बढ़ जाती हैं.
 

होर्मुज बंद होने पर कहां से आएगा तेल? 
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होर्मुज बंद होने पर कहां से आएगा तेल? 
अगर होर्मुज पूरी तरह से बंद हो जाता है, तो देश अन्य रास्‍तों की ओर जाएंगे जैसे अमेरिका, रूस, पश्चिम अफ्रीका. लेकिन ऊर्जा एजेंसियां ​​चेतावनी देती हैं कि ये सोर्स तुरंत कमी को पूरा नहीं कर सकते, जिससे शॉर्टटर्म कमी और कीमतों में उछाल आ सकता है. 

क्‍या होगा असर? 
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क्‍या होगा असर? 
देश इमरजेंसी तेल भंडार का उपयोग कर सकते हैं. IEA ने पहले भी तेल छोड़ने की मांग की है, लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि यह एक अस्थायी उपाय है , लंबे समय का समाधान नहीं है. ऐसे में दुनिया भर में  प्लास्टिक, रसद और खाद्य पदार्थों तक, हर क्षेत्र पर इसका असर पड़ेगा और महंगाई तेजी से बढ़ सकती है. 

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