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बिज़नेस न्यूज़

₹7000Cr की कंपनी... कमान संभालती है ये महिला, कभी पिता के बिजनेस को बोल दिया था 'No'

जयंती चौहान है बिसलेरी की वाइस चेयरपर्सन
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घर से बाहर निकलते हैं और साथ में पानी की बोतल ने जाना भूल जाते हैं, फिर दुकान से पानी खरीदते समय आपके मुंह से भी निकलता होगा, 'भैया बिसलेरी की बोतल देना', जी हां, ये नाम किसी पहचान का मोहताज नहीं है. देश की सबसे बड़ी पैकेज्ड वाटर कंपनी बिसलेरी इंटरनेशनल (Bisleri) का बड़ा कारोबार है. इसकी बागडोर संभाल रही हैं, जयंती चौहान, जो पहले अपने इस पारिवारिक बिजनेस को संभालने के लिए तैयार नहीं थीं और इसके चलते Bisleri बिकने वाली थी. (Photo: Bisleri.Com)

Tata ने कर ली थी खरीदने की तैयारी
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Tata ने कर ली थी खरीदने की तैयारी
बिसलेरी के चेयरमैन रमेश चौहान ने अपनी बढ़ती उम्र और उत्तारिधिकारी की कमी से जूझते हुए बिसलेरी को बेचने का फैसला कर लिया था. साल 2022 में ये पूरा मामला देखने को मिला था. 7000 करोड़ रुपये मार्केट वैल्यू वाली इस कंपनी के बिकने की सारी तैयारी हो चुकी थी और Tata के साथ डील पूरी होने ही वाली थी, लेकिन अचानक वैल्यूएशन को लेकर पेंच फंसा और ये सौदा ना हो सका. (Photo: Reuters)

इटली से है Bisleri का कनेक्शन
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इटली से है Bisleri का कनेक्शन
बिसलेरी के इतिहास पर नजर डालें, तो इसका कनेक्शन इटली (Italy) से है और सबसे खास बात ये है कि शुरुआत में कंपनी पानी नहीं बेचती थी, बल्कि ये एक फार्मा कंपनी थी, जो मलेरिया (Maleria) की दवा बनाती थी. इसके फाउंडर Felice Bisleri थे. जब उनका निधन हो गया, तो उनके फैमिली फैमिली डॉक्टर रॉसी ने कमान संभाल ली. उन्होंने कारोबार विस्तार करते हुए इसकी एंट्री भारत में कराई. यहां पेशे से वकील खुसरो संतुक (Khusroo Suntook) ने डॉ रॉसी संग मिलकर 1965 में मुंबई के ठाणे में पहला बिसलेरी पानी का प्लांट लगाया. (File Photo)

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कब हुई रमेश चौहान की एंट्री? 
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कब हुई रमेश चौहान की एंट्री? 
जब 60 के दशक में भारत में बिसलेरी पैकेज्ड वाटर बेचने की तैयारी की गई, तो उस समय ये प्लान किसी पागलपन जैसा ही था. लोगों को लगता था कि बोतल बंद पानी क्यों और कौन खरीद कर पीएगा? लेकिन रॉसी अपने प्लान से डगमगाए नहीं और प्लांट स्थापित किया. शुरुआत में मुंबई में प्लास्टिक नहीं, बल्कि कांच की बोतलों में पानी बेचना शुरू किया गया था. 1969 में पारले (Parle) ने बिसलेरी (इंडिया) लिमिटेड खरीदी और फिर PVC नॉन-रिटर्न बोतलों, PET Conteners में पानी बेचा जाने लगा. 1995 में रमेश चौहान ने इसकी कमान संभाली. (File Photo)

क्यों Bisleri बेचने जा रहे थे रमेश चौहान?
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क्यों Bisleri बेचने जा रहे थे रमेश चौहान?
यहां जान लेना जरूरी है कि आखिर रमेश चौहान क्यों अपने इस बड़े कारोबार को बेचने जा रहे थे? इसकी बड़ी वजह ये थी कि रमेश चौहान की इकलौती बेटी जयंती चौहान की इस बिजनेस में दिलचस्पी ही नहीं थी. रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब पिता ने उनसे कंपनी संभालने के लिए पूछा तो जयंती ने No कह दिया था. यहीं से इसे बेचने की तैयारी शुरू कर दी गई थी. (File Photo: ITG)

अचानक बदला मूड और ले ली जिम्मेदारी
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अचानक बदला मूड और ले ली जिम्मेदारी
टाटा के साथ बिसलेरी की डील टूटते ही जयंती चौहान का मन बदल गया और पिता के बिसलेरी बिजनेस को आगे बढ़ाने का जिम्मा उन्होंने अपने कंधों पर उठा लिया. फिलहाल, जयंती कंपनी में वाइस चेयरपर्सन की भूमिका में हैं और नई स्ट्रेटजी के तहत लगातार कारोबार विस्तार में जुटी हैं. उनके नेतृत्व में बिसेलरी कार्बोनेटेड कोल्ड ड्रिंक मार्केट में भी एंट्री ले चुकी है और कंपनी के रेवेन्यू में भी लगातार उछाल देखने को मिला है. (Photo: Insta/@missjaychauhan)

अमेरिका से की है जयंती चौहान ने पढ़ाई
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अमेरिका से की है जयंती चौहान ने पढ़ाई
अमेरिका के लॉस एंजिल्स में फैशन इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन एंड मर्चेंडाइजिंग में प्रोडक्ट डेवलपमेंट की पढ़ाई कर चुकीं जयंती चौहान की देखरेख में कंपनी आगे बढ़ रही है. पैकेज्ड वाटर के बाजार में बिसलेरी आज भी सबसे बड़ी हिस्सेदार है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसका सालाना ऑपरेशनल रेवेन्यू अनुमानित 2,600 करोड़ रुपये से ज्यादा है. (File Photo: ITG)

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