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सरकार राज्यों को 5 विश्वविद्यालय टाउनशिप के लिए मदद करेगी- निर्मला सीतारमण

सरकार भारत को बायोफार्मा के क्षेत्र में दुनिया का बड़ा केंद्र बनाने की तैयारी कर रही है. इसके लिए बायोफार्मा शक्ति योजना के तहत कई कदम उठाए जाएंगे.

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 9वीं बार बजट पेश कर रही हैं. ( Photo: PTI)
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 9वीं बार बजट पेश कर रही हैं. ( Photo: PTI)

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लगातार नौवीं बार देश का बजट पेश किया. बजट भाषण में उन्होंने कहा कि सरकार ने आम लोगों तक सुविधाएं पहुंचाने पर खास ध्यान दिया है. हमारी सरकार राज्यों को 5 विश्वविद्यालय खोलने में मदद करेगी. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी 2026 को संसद में पेश किए गए बजट भाषण में कहा कि केंद्र सरकार राज्यों को सहयोग करेगी ताकि पांच नई 'यूनिवर्सिटी टाउनशिप' बनाई जा सकें.

यूनिवर्सिटी टाउनशिप क्या होंगे?
ये टाउनशिप एकीकृत शैक्षणिक केंद्र होंगी जिनमें कई विश्वविद्यालय, कॉलेज और अनुसंधान संस्थान होंगे.स्किल‑डेवलपमेंट सेंटर होंगे. छात्रावास और निवास सुविधाएं शामिल होंगी. उद्योग और शिक्षा के बीच मज़बूत कनेक्शन बनाया जाएगा. यानी, शिक्षा को औद्योगिक और आर्थिक विकास से जोड़ा जाएगा ताकि छात्रों को बेहतर अवसर मिले.

राज्यों को मदद कैसे मिलेगी?
निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार “VGF (Viability Gap Funding) या पूंजी सहायता (capital support) जैसे वित्तीय साधनों से राज्यों को सहयोग देगी, ताकि ये शैक्षणिक टाउनशिप विकसित हो सकें.

क्यों यह कदम महत्वपूर्ण है?
यह योजना उच्च शिक्षा को स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार से जोड़ने में मदद करेगी. इससे नए क्षेत्रों में शोध और कौशल विकास को बढ़ावा मिलेगा. छात्रों को बीमा‑सहित पूरी शिक्षा समुदाय के साथ सही वातावरण मिलेगा.

केंद्र के अन्य शिक्षा‑सम्बन्धी ऐलान
निर्मला सीतारमण ने बजट में यह भी कहा कि हर जिले में कम से कम एक गर्ल्स हॉस्टल बनाया जाएगा, खासकर STEM (विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग, गणित) शिक्षा में लड़कियों की पढ़ाई और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए शिक्षा क्षेत्र में अन्य नये संस्थान व उन्नयन योजनाएं जैसे कि फार्मा, डिजाइन और अनुसंधान‑समर्थन के प्रावधान भी शामिल हैं.

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 में यह स्पष्ट किया कि केंद्र राज्यों के साथ मिलकर पांच विश्वविद्यालय‑टाउनशिप विकसित करेगा. ये टाउनशिप आधुनिक शिक्षा और उद्योग की मांग के अनुरूप होंगी, जिससे छात्रों को बेहतर अवसर मिलेंगे. 

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बायोफार्मा के क्षेत्र में दुनिया का बड़ा केंद्र बनाने की तैयारी
निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार भारत को बायोफार्मा के क्षेत्र में दुनिया का बड़ा केंद्र बनाने की तैयारी कर रही है. इसके लिए बायोफार्मा शक्ति योजना के तहत कई कदम उठाए जाएंगे. इस योजना के तहत देश में तीन नए फार्मा संस्थान खोले जाएंगे, जिन्हें नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (NIPER) कहा जाएगा. यहां दवाइयों और बायोफार्मा से जुड़ी पढ़ाई और रिसर्च होगी. इसके साथ ही, देश में पहले से मौजूद 7 फार्मा संस्थानों को और बेहतर बनाया जाएगा. उन्हें नई सुविधाएं, आधुनिक तकनीक और बेहतर संसाधन दिए जाएंगे, ताकि पढ़ाई और रिसर्च का स्तर ऊंचा हो सके. सरकार का लक्ष्य है कि इन कदमों से भारत को ग्लोबल बायोफार्मा मैन्युफैक्चरिंग हब बनाया जाए और इस क्षेत्र में रोजगार के नए मौके पैदा हों.

लगभग 7% की हाई ग्रोथ रेट मिली
वित्त मंत्री ने साफ किया कि सरकार चाहती है कि विकास का फायदा सीधे किसानों, आदिवासियों, महिलाओं और युवाओं तक पहुंचे, ताकि हर वर्ग को आगे बढ़ने का मौका मिल सके. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, "आत्मनिर्भरता को अपना मार्गदर्शक मानते हुए, हमने घरेलू मैन्युफैक्चरिंग क्षमता, ऊर्जा सुरक्षा बनाई है और ज़रूरी आयात पर निर्भरता कम की है. साथ ही, हमने यह भी सुनिश्चित किया है कि सरकार के हर काम से नागरिकों को फायदा हो. रोज़गार पैदा करने, कृषि उत्पादकता, परिवारों की खरीदने की शक्ति और लोगों को यूनिवर्सल सर्विस देने के लिए सुधार किए गए हैं. इन उपायों से लगभग 7% की हाई ग्रोथ रेट मिली है और हमें गरीबी कम करने और हमारे लोगों के जीवन को बेहतर बनाने में काफी मदद मिली है."

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टेक्नोलॉजी प्रोडक्शन सिस्टम को बदल रही
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, "आज हम एक ऐसे बाहरी माहौल का सामना कर रहे हैं जिसमें व्यापार और बहुपक्षवाद खतरे में हैं और संसाधनों और सप्लाई चेन तक पहुंच बाधित है. नई टेक्नोलॉजी प्रोडक्शन सिस्टम को बदल रही हैं, जबकि पानी, ऊर्जा और ज़रूरी खनिजों की मांग तेज़ी से बढ़ रही है. भारत विकसित भारत की ओर आत्मविश्वास से कदम बढ़ाता रहेगा, जिसमें महत्वाकांक्षा और समावेश को संतुलित किया जाएगा. बढ़ती अर्थव्यवस्था और बढ़ते व्यापार और पूंजी की ज़रूरतों के साथ, भारत को वैश्विक बाजारों के साथ गहराई से जुड़ा रहना चाहिए, ज़्यादा निर्यात करना चाहिए और स्थिर लंबे समय के निवेश को आकर्षित करना चाहिए."

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