बिहार के नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का काफिला एक बार फिर चर्चा में है. बुधवार को सचिवालय में कैबिनेट बैठक खत्म होने के बाद जब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी बाहर निकले तो उनके साथ करीब दो दर्जन गाड़ियों का लंबा काफिला दिखाई दिया. इस दृश्य को लेकर राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक खूब चर्चा हो रही है. कई लोग इसे प्रधानमंत्री के सीमित दो गाड़ियों वाले काफिले से तुलना करते हुए सवाल उठा रहे हैं.
हालांकि, इस बीच एक अहम बदलाव भी देखने को मिला. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने आज से पेट्रोल-डीजल वाली गाड़ियों को छोड़कर इलेक्ट्रिक वाहन को अपनाया है. बताया जा रहा है कि उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के संदेश के तौर पर यह कदम उठाया है.
सचिवालय से निकलते समय काफिले की तस्वीर आई सामने
कैबिनेट बैठक के बाद सचिवालय से निकलते समय उनके काफिले की तस्वीर सामने आई, जिसमें बड़ी संख्या में सुरक्षा और प्रशासनिक गाड़ियां शामिल दिखीं. इसी तस्वीर के वायरल होने के बाद विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया है. विपक्षी दलों का कहना है कि सादगी और खर्च में कटौती की बात करने वाली सरकार को अपने काफिले पर भी ध्यान देना चाहिए.
वहीं, सरकार की ओर से कहा जा रहा है कि मुख्यमंत्री के काफिले में शामिल गाड़ियों की संख्या सुरक्षा प्रोटोकॉल और प्रशासनिक जरूरतों के मुताबिक तय होती है. साथ ही इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने का फैसला राज्य में हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में एक सकारात्मक पहल है.
सरकार से जुड़े लोगों और जनता से अपील
सीएम सम्राट चौधरी ने सरकार से जुड़े लोगों और जनता से कई अपील की. उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डीजल और पेट्रोल की बचत के लिए वाहनों के कम से कम उपयोग की अपील की है, जिसके तहत कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं. मुख्यमंत्री कारकेड में वाहनों की संख्या को न्यूनतम करने का निर्णय लिया गया है, साथ ही सभी मंत्री, निगम बोर्ड के अध्यक्ष और सदस्य, पदाधिकारी तथा जनप्रतिनिधियों से बिना अतिरिक्त वाहन के सार्वजनिक कार्यक्रमों में शामिल होने की अपील की गई है.
सम्राट चौधरी ने X पर लिखा, राज्य की जनता से मेट्रो, बस, ऑटो और अन्य सार्वजनिक परिवहन के अधिक उपयोग का आग्रह किया गया है. सभी विभागों को निर्देश दिया गया है कि बैठकें और कॉन्फ्रेंस वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित की जाएं.
सरकारी दफ्तरों की कैंटीन में पाम ऑयल के उपयोग को कम करने का निर्देश भी दिया गया है, जबकि सरकारी और निजी कार्यालयों में वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा देने की सलाह दी गई है. इसके अलावा सप्ताह में एक दिन 'नो व्हीकल डे' मनाने का भी आग्रह किया गया है.