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निशांत के लिए जून होगा डिसाइडर, सत्ता में जाएंगे या संगठन में होगा रोल?

नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार के सियासी भविष्य को लेकर अटकलें लगाई जा रही है. लेकिन निशांत ने खुद फैसला किया है सरकार और संगठन में कोई रोल अदा करने से पहले अपना पावर ग्राउंड तैयार करेंगे. ऐसे में निशांत कुमार के लिए जून का महीना राजनीतिक रूप से अहम होना है.

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नीतीश कुमार की राह पर निशांत कुमार (Photo-PTI)
नीतीश कुमार की राह पर निशांत कुमार (Photo-PTI)

बिहार में इन दिनों सबसे ज्यादा सियासी चर्चा में नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार है, जो सियासत के पिच पर कदम तो रख दिए हैं, लेकिन सरकार में कोई भी जिम्मेदारी न लेने का फैसला किया है. निशांत कुमार 3 मई से बिहार की यात्रा पर निकल रहे हैं, लेकिन उनके राजनीतिक भविष्य का फैसला जून में होगा. इसके बाद ही तय होगा कि उनका भूमिका सत्ता में होगा या फिर संगठन में होगा अहम रोल? 

निशांत कुमार 3 मई से बिहार की यात्रा पर निकल रहे हैं और इसकी शुरुआत पश्चिमी चंपारण से करेंगे. यह वही क्षेत्र है, जहां से पहले भी नीतीश कुमार अपनी कई प्रमुख यात्राएं शुरू करते रहे हैं. चंपारण से यात्रा शुरू करना निशांत के लिए सिर्फ संयोग नहीं, बल्कि रणनीतिक प्रयोग माना जा रहा है. 

निशांत कुमार अपने पिता के राजनीतिक मॉडल को ही आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं. नीतीश कुमार लंबे समय तक 'यात्रा' के जरिए सीधे जनता से जुड़ते रहे हैं, और अब निशांत कुमार उसी रास्ते पर चल रहे हैं. यात्रा के एक महीने गुजर जाने के बाद निशांत के सियासी भविष्य और रोल को लेकर फैसला होगा?

निशांत यात्रा से तैयार करेंगे 'पावर ग्राउंड'
नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार 3 मई से राज्यव्यापी यात्रा पर निकलेंगे. खास बात यह है कि वे इस दौरे पर किसी बड़े पदाधिकारी के तौर पर नहीं, बल्कि एक साधारण जेडीयू कार्यकर्ता के रूप में उतरेंगे. उनकी इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य पार्टी के ज़मीनी कार्यकर्ताओं से सीधा संपर्क स्थापित करना है.

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निशांत कुमार यात्रा के दौरान पंचायत, प्रखंड और जिला स्तर के पदाधिकारियों से मुलाकात करेंगे और संगठन की जमीनी हकीकत को समझने की कोशिश करेंगे. बताया जा रहा है कि यह यात्रा तीन से चार महीने तक चलेगी, जिससे उन्हें पूरे राज्य में संगठन की स्थिति का व्यापक अनुभव मिल सके.इसलिए यह यात्रा उनके लिए पावर से पहले ग्राउंड तैयार करने की रणनीति के रूप में देखी जा रही है. 

राजनीतिक जानकारों की नजर में यह सिर्फ एक सामान्य यात्रा नहीं है, बल्कि राजनीतिक लॉन्च का अगला चरण, संगठन को मजबूत करने की कोशिश और बिहार में नए नेतृत्व की तैयारी है.  नीतीश कुमार ने पिछले कई दशकों में देश-प्रदेश की राजनीति में अपनी जो साख बनाई है, निशांत कुमार उसे ही आगे बढ़ाने की तैयारी पर बढ़ रहे हैं. 

जून होगा निशांत के राजनीति का डिसाइडर
नीतीश कुमार के सीएम पद से इस्तीफा देने के बाद से चर्चा थी कि निशांत कुमार को बिहार सरकार में कोई बड़ा पद मिल सकता है. सम्राट सरकार में डिप्टीसीएम बनाने के भी कयास लगाए जा रहे थे, जिसके लिए तैयार नहीं हुए. निशांत ने फिलहाल सरकार में कोई ज़िम्मेदारी न लेने का फैसला किया है. सूत्रों का कहना है कि यह निर्णय उनका व्यक्तिगत है और वे किसी पद को संभालने से पहले खुद को पूरी तरह तैयार करना चाहते हैं. इसीलिए उन्होंने यात्रा के जरिए संगठन और जमीनी काम पर फोकस करने का रास्ता चुना है. 

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राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि निशांत कुमार जून महीने में विधान परिषद के सदस्य बन सकते हैं. जून में बिहार में 9 एमएलसी की सीटों पर चुनाव हैं, जिसमें से तीन सीटें जेडीयू के खाते में आ सकती हैं. इन्हीं में से एक सीट को निशांत कुमार को एमएलसी के लिए चुना जा सकता है. इसके बाद  निशांत कुमार खुद यह तय करेंगे कि उनकी भूमिका सरकार में होगी या संगठन में रोल अदा करेंगे.

पहले संगठन पर फोकस करेंगे निशांत
निशांत कुमार जिस तरह से कोई पद लेने से पहले यात्रा का रास्ता चुना है, उससे उनके राजनीतिक प्लान को बहुत आसानी से समझा जा सकता है. सत्ता के बजाय संगठन शक्ति पर भरोसा. निशांत का मानना है कि अगर जनता के बीच सीधे पैठ बना ली जाए, तो सत्ता खुद-ब-खुद कदम चूमेगी. चंपारण से शुरुआत करना यह बताता है कि वे अपने पिता के उसी 'गांधीवादी और विकासवादी' मॉडल को 2.0 वर्जन में पेश करने जा रहे हैं. 

नीतीश कुमार की नक्शेकदम पर चलते हुए निशांत कुमार तीन से चार महीने तक बिहार के अलग-अलग इलाके की यात्रा करेंगे. जेडीयू के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि निशांत पार्टी का भविष्य हैं और आने वाले समय में उनकी भूमिका बेहद अहम हो सकती है. ऐसे में सरकार और संगठन में किसी पद को लेने से पहले अपनी सियासी जमीन को तैयार करने का प्लान बनाया है. 

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एनडीए में मंत्रिमंडल का फॉर्मूला तय
सम्राट चौधरी के अगुवाई में बिहार सरकार बनने के बाद अभी सीएम और दो डिप्टीसीएम है. बिहार में अधिकतम 36 मंत्री बन सकते हैं. ऐसे में सम्राट के कैबिनेट विस्तार को लेकर भी हलचल तेज है. सूत्रों के मुताबिक पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के बाद कैबिनेट विस्तार हो सकता है. इसके लिए 4 से 10 मई के बीच मंत्रिमंडल विस्तार संभव है

बिहार में एनडीए की सरकार है, मंत्रिमंडल में 16-16 सीटें बीजेपी और जेडीयू को मिल सकती हैं. इसके अलावा 2 पद चिराग पासवान की पार्टी को, जबकि जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी को एक-एक पद दिए जाने की संभावना है.राज्य की राजनीति में इन घटनाक्रमों को आगामी चुनावों से पहले बड़े रणनीतिक बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है.

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