बिहार की राजनीति में पिछले दो दशकों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की विभिन्न यात्राएं केवल दौरा नहीं, बल्कि सत्ता और जनसंवाद का सबसे प्रभावी माध्यम रही हैं.
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पिछले 20 सालों में अपनी हर एक यात्रा को राजनीतिक मॉडल में बदल दिया है. 2005 की ‘न्याय यात्रा’ से शुरू हुआ यह सिलसिला 2026 की ‘समृद्धि यात्रा’ तक पहुंच चुका है, जिसे अब उनके मुख्यमंत्री कार्यकाल की संभावित आखिरी बड़ी यात्रा के रूप में देखा जा रहा है.
नीतीश कुमार यात्राओं का 20 साल का सफर
बिहार में सत्ता संभालने के बाद करीब दो दशकों में नीतीश कुमार ने कुल 16 यात्राएं की हैं, जो बिहार के प्रशासनिक और राजनीतिक नैरेटिव का अहम हिस्सा बन चुकी हैं.
नीतीश कुमार की 16 यात्राएं: एक नजर
1. न्याय यात्रा (2005) - फरवरी 2005 में कांग्रेस के कथित गैर संवैधानिक कदम के विरोध में नीतीश कुमार ने न्याय यात्रा की शुरुआत की थी.
2. विकास यात्रा (2009) - मुख्यमंत्री बनने के बाद विकास यात्रा उनकी पहली बड़ी यात्रा थी, जिसमें उन्होंने सड़कों, स्कूलों और स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा की.
3. धन्यवाद यात्रा (2010) - विधानसभा चुनाव में जीत के बाद जनता का आभार जताने के लिए यह यात्रा निकाली गई.
4. प्रवास यात्रा (2011) - सभी जिलों में रात्रि प्रवास कर जमीनी हालात समझने की कोशिश की गई.
5. सेवा यात्रा (2011-12) - सरकारी योजनाओं की मॉनिटरिंग और अधिकारियों की जवाबदेही तय करने पर जोर रहा.
6. अधिकार यात्रा (2012-13) - बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर यह यात्रा निकाली गई.
7. संकल्प यात्रा (2014) - लोकसभा चुनाव में हार के बाद विकास के संकल्प को दोहराने के लिए यह यात्रा की गई.
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8. संपर्क यात्रा (2014-15) - विधानसभा चुनाव से पहले जनता से सीधा संवाद स्थापित करने के लिए.
9. निश्चय यात्रा (2016) - “सात निश्चय योजना” की समीक्षा के लिए यह यात्रा हुई.
10. समीक्षा यात्रा (2017-18) - सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन का आकलन किया गया.
11. विकास समीक्षा यात्रा (2018-19) - बड़े प्रोजेक्ट्स की प्रगति का मूल्यांकन किया गया.
12. जल-जीवन-हरियाली यात्रा (2019-20) - पर्यावरण और जल संरक्षण पर फोकस किया गया.
13. समाज सुधार अभियान (2020-21) - शराबबंदी, बाल विवाह और दहेज के खिलाफ अभियान चलाया गया.
14. समाधान यात्रा (2023) - जनता की शिकायतों के समाधान पर फोकस रहा.
15. प्रगति यात्रा (2024) - विकास योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई.
16. समृद्धि यात्रा (2026) - यह यात्रा प्रशासनिक ऑडिट और राजनीतिक संदेश दोनों के रूप में देखी जा रही है.
समृद्धि यात्रा: समापन या नई शुरुआत
2026 की समृद्धि यात्रा 16 जनवरी को पश्चिम चंपारण से शुरू होकर पटना में समाप्त हुई. इसका उद्देश्य योजनाओं की समीक्षा, नई परियोजनाओं का उद्घाटन और जनता से संवाद था.
यह यात्रा केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि पिछले दो दशकों के विकास का ऑडिट भी मानी जा रही है.
राज्यसभा के लिए चुने जाने के बाद भी नीतीश कुमार ने इस यात्रा को जारी रखा, जिससे यह संदेश गया कि वह अंत तक सक्रिय मुख्यमंत्री बने रहना चाहते हैं.
बदलते दौर के साथ कैसे बदले नीतीश
पिछले 20 सालों में नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर लगातार बदलाव से भरा रहा है. उनका राजनीतिक करियर जेपी आंदोलन से शुरू हुआ और बाद में उन्होंने समता पार्टी बनाई. 2005 में एनडीए के साथ सत्ता में वापसी के बाद उनका स्थायी दौर शुरू हुआ.
2005-2013: सुशासन बाबू की छवि - इस दौर में कानून व्यवस्था, महिला सशक्तिकरण और प्रशासनिक सुधार पर जोर रहा.
2013-2015: सेकुलर राजनीति की ओर झुकाव - बीजेपी से अलग होकर उन्होंने खुद को सेकुलर नेता के रूप में पेश किया.
2015-2017: महागठबंधन का दौर - लालू प्रसाद और कांग्रेस के साथ मिलकर सत्ता में वापसी की.
2017-2022: एनडीए में वापसी - राजनीतिक पकड़ कमजोर हुई और गठबंधन की राजनीति प्रमुख हो गई.
2022-2024: विपक्ष का चेहरा - महागठबंधन में लौटकर विपक्षी राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई.
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2024: फिर एनडीए में वापसी - लोकसभा चुनाव से पहले एक बार फिर राजनीतिक समीकरण बदले.
नीतीश कुमार की राजनीति के पांच बड़े बदलाव
1. विचारधारा से ज्यादा गठबंधन की राजनीति
2. विकास से जातीय समीकरण की ओर झुकाव
3. स्थिरता से अस्थिरता की ओर बदलाव
4. बिहार से राष्ट्रीय महत्वाकांक्षा
5. सुशासन बाबू से पलटू राम की छवि तक सफर