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एक तरफ कुआं, एक तरफ खाई... खान सर vs रौशन आनंद विवाद तेजस्वी के लिए कैसे बनी चुनौती?

खान सर और रौशन आनंद के बीच का विवाद अब बिहार में सिर्फ एक कानूनी या सामाजिक मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि इसने राजद नेता तेजस्वी यादव के लिए भी चुनौती बढ़ा दी है. प्रिंस यादव की मौत के मामले में सीबीआई जांच की मांग के बीच तेजस्वी यादव बेहद संतुलित रुख अपनाए हुए हैं. मुस्लिम और यादव, दोनों ही राजद के पारंपरिक वोट बैंक माने जाते हैं. ऐसे में किसी एक पक्ष का खुला समर्थन तेजस्वी के लिए राजनीतिक जोखिम पैदा कर सकता है.

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पटना के दो मशहूर शिक्षकों फैजल खान (L) और रौशन आनंद (R) के बीच आरोप प्रत्यारोप का दौर जारी है. (Photo: PTI)
पटना के दो मशहूर शिक्षकों फैजल खान (L) और रौशन आनंद (R) के बीच आरोप प्रत्यारोप का दौर जारी है. (Photo: PTI)

छात्रों के बीच खान सर के नाम से लोकप्रिय, शिक्षक फैसल खान और ज्ञान बिंदु कोचिंग संस्थान के डायरेक्टर रौशन आनंद से जुड़ा विवाद, अब राजद नेता और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के लिए राजनीतिक चुनौती बनता जा रहा है. उनके लिए एक तरफ कुआं, एक तरफ खाई वाली स्थिति बन गई है. यह मामला उस समय और अधिक चर्चा में आ गया, जब रौशन आनंद ने अपने भाई प्रिंस यादव की मौत के मामले में न्याय की मांग उठाई.

तेजस्वी यादव ने इस प्रकरण की सीबीआई जांच की मांग करते हुए कहा है कि सच्चाई सामने लाने के लिए स्वतंत्र जांच जरूरी है. हालांकि, केंद्रीय एजेंसी से जांच की मांग करने के बावजूद उन्होंने अब तक खुलकर न तो खान सर का समर्थन किया है और न ही रौशन आनंद के पक्ष में कोई स्पष्ट रुख अपनाया है. तेजस्वी यादव की यह सतर्क रणनीति बिहार की जातीय और सामुदायिक राजनीति के संदर्भ में देखी जा रही है.

खान सर छात्रों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं और मुस्लिम समुदाय के एक बड़े वर्ग में उनका प्रभाव माना जाता है. वहीं, रौशन आनंद यादव समुदाय से आते हैं और उन्हें उस समाज के लोगों का समर्थन मिल रहा है. स्थिति इसलिए भी जटिल हो गई है, क्योंकि तेजस्वी यादव के बड़े भाई और पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव इस मुद्दे पर लगातार मुखर रहे हैं. तेज प्रताप ने कई बार प्रिंस यादव की मौत की परिस्थितियों पर सवाल उठाए हैं और सार्वजनिक रूप से खान सर को निशाने पर लिया है.

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तेज प्रताप ने खान सर के खिलाफ खोला मोर्चा

उन्होंने यहां तक आरोप लगाया कि प्रिंस यादव की मौत के लिए खान सर जिम्मेदार हैं. तेज प्रताप के इन बयानों ने ऐसे समय में तेजस्वी यादव पर अतिरिक्त दबाव बढ़ा दिया है, जब पार्टी किसी एक पक्ष के समर्थन में दिखाई देने से बचना चाहती है. बता दें कि मुस्लिम और यादव समुदाय लंबे समय से राष्ट्रीय जनता दल के पारंपरिक वोट बैंक रहे हैं. ऐसे में तेजस्वी यादव अगर किसी एक पक्ष के समर्थन में खुलकर आते हैं, तो उनके सामने दूसरे वर्ग की नाराजगी झेलने का खतरा हो सकता है.

यदि तेजस्वी यादव खुलकर खान सर के समर्थन में दिखाई देते हैं, तो यादव समुदाय के कुछ नेता और समर्थक उनके रुख पर सवाल उठा सकते हैं, खासकर तब जब रौशन आनंद लगातार अपने भाई की मौत को लेकर जवाब मांग रहे हैं. दूसरी ओर, यदि वह रौशन आनंद के पक्ष में और खान सर के खिलाफ दिखाई देते हैं, तो इससे मुस्लिम मतदाताओं के एक वर्ग में असहजता पैदा हो सकती है, जो बिहार में राजद के राजनीतिक ताकत के महत्वपूर्ण आधार माने जाते हैं. फिलहाल तेजस्वी यादव ने संतुलित रणनीति अपनाई हुई है.

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विवाद में संतुलित रुख अपना रहे तेजस्वी यादव

किसी एक पक्ष का समर्थन करने के बजाय उन्होंने निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग पर जोर दिया है. उनके सार्वजनिक बयान मुख्य रूप से सीबीआई जांच और प्रिंस यादव की मौत से जुड़े सभी तथ्यों को सामने लाने तक सीमित रहे हैं. यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब बिहार में चुनावी झटके के बाद राजद के लिए अपने पारंपरिक 'M-Y' यानी मुस्लिम-यादव सामाजिक समीकरण को बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

संभवतः यही वजह है कि तेजस्वी यादव इस पूरे विवाद में किसी भी पक्ष में खुलकर बयान देने से बच रहे हैं. जैसे-जैसे विवाद आगे बढ़ रहा है और जांच की प्रक्रिया जारी है, तेजस्वी यादव पर राजनीतिक दबाव भी बढ़ने की संभावना है. जहां तेज प्रताप यादव पहले ही आक्रामक रुख अपना चुके हैं, वहीं तेजस्वी फिलहाल इस विवाद से दूरी बनाए रखते हुए केवल स्वतंत्र जांच की मांग पर फोकस करते नजर आ रहे हैं.

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