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JDU अपने सांसद की सदस्यता क्यों कराना चाहती है खत्म? स्पीकर को सौंपा नोटिस

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के जेडीयू अध्यक्ष चुने जाते ही एक्शन शुरू हो गया है. बांका लोकसभा सीट से पार्टी सांसद गिरधारी यादव की सदस्यता को खत्म कराने की नोटिस लोकसभा स्पीकर को सौंपी गई है. सवाल उठता है कि जेडीयू अपने ही सांसद की सदस्यता क्यों खत्म कराना चाहती है?

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जेडीयू सांसद गिरधारी यादव पर नीतीश कुमार का एक्शन (Photo-ITG)
जेडीयू सांसद गिरधारी यादव पर नीतीश कुमार का एक्शन (Photo-ITG)

बिहार की सियासत में जेडीयू के अंदर सियासी चिंगारी अब शोला बनती दिख रही है. जेडीयू ने अपने ही सांसद की सदस्यता को खत्म करने के एक्शन प्लान पर काम शुरू कर दिया है. बांका से जेडीयू के लोकसभा सांसद गिरधारी यादव की सदस्यता पर तलवार लटक गई है. 

जेडीयू के लोकसभा सांसद गिरधारी यादव की सदस्यता रद्द करने के लिए पार्टी के संसदीय दल के नेता और सुपौल से सांसद दिलेश्वर कामत ने लोकसभा अध्यक्ष को नोटिस सौंपी है. नोटिस में उन्होंने गिरधारी यादव को पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण अयोग्य घोषित करने की मांग की है. ऐसे में सवाल यह उठता है कि जेडीयू अपने ही सांसद की सदस्यता क्यों खत्म करना चाहती है? 

जेडीयू के सूत्रों ने बताया कि बांका से सांसद गिरधारी यादव पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त रहे हैं. उन्होंने SIR के मुद्दे पर भी पार्टी की आधिकारिक राय के खिलाफ रुख अपनाया. जेडीयू के इस कदम को लेकर बिहार का सियासी 
तापमान गर्मा गया है. 

लोकसभा स्पीकर को नोटिस 
जेडीयू संसदीय दल के नेता और सुपौल से सांसद दिलेश्वर कामत ने मंगलवार को लोकसभा स्पीकर को औपचारिक नोटिस सौंपकर गिरधारी यादव की सदस्यता खत्म करने की मांग की है. इसे पार्टी में अनुशासन को बनाए रखने की सख़्त कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है. नीतीश कुमार के राज्यसभा सांसद चुने जाने के बाद अब दिलेश्वर यादव  के सदस्यता खत्म करने के एक्शन प्लान पर काम शुरू हुआ है. 

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जेडीयू ने गिरधारी यादव की सदस्यता को रद्द कराने के लिए लोकसभा स्पीकर को सबूत के तौर पर कई दस्तावेज भी सौंपे हैं. बिहार विधानसभा चुनाव में गिरधारी यादव के बेटे आरजेडी के टिकट पर चुनाव लड़े थे, उस समय वो बेटे के लिए प्रचार किया था.जेडीयू ने स्पीकर से अनुरोध किया है कि पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण उनकी सदस्यता समाप्त कर दी जाए.

अपने सांसद के खिलाफ क्यों हुई जेडीयू ?
बांका से सांसद गिरिधारी यादव जेडीयू के बड़े नेता माने जाते हैं और नीतीश कुमार के करीबी माने जाते हैं. 2025 के विधानसभा चुनाव में  गिरधारी यादव के बेटे चाणक्य प्रकाश रंजन ने आरजेडी का दामन थामकर चुनावी मैदान में उतर गए थे. जेडीयू नेताओं का आरोप है कि सांसद ने अपनी पार्टी के खिलाफ जाकर अपने बेटे के लिए चुनाव प्रचार किया.पार्टी इसे अनुशासनहीनता मानते हुए उनकी सदस्यता खत्म कराने का दांव चला है, लेकिन 

विधानसभा चुनाव के बाद से पार्टी उनसे खफा है, लेकिन मामला उस वक्त तूल पकड़ा, जब सांसद गिरधारी यादव ने एसआईआर से जुड़े एक अहम फैसले पर पार्टी लाइन से हटकर बयान दे दिया. उन्होंने इस फैसले को तुगलकी फरमान करार देते हुए इसे जल्दबाजी में लिया गया गलत क़दम बताया था. अब इसी बयान को लेकर उनकी सांसद की सदस्यता को खत्म करने का दांव चला है. 

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पहले नोटिस और सदस्यता खत्म कराने का दांव
गिरिधारी यादव को पहले ही पार्टी की तरफ से कारण बताओ नोटिस जारी कर अगल 15 दिनों के भीतर जवाब देने को कहा गया था, लेकिन अब मामला सिर्फ़ नोटिस तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सीधे उनकी संसदीय सदस्यता पर ख़तरे की तलवार लटक गई है. 

जेडीयू ने अपने सांसद गिरिधारी यादव की लोकसभा सदस्यता समाप्त करने की आधिकारिक मांग की है. पार्टी ने उन पर 'पार्टी विरोधी गतिविधियों' में शामिल होने का गंभीर आरोप लगाया है.जेडीयू संसदीय दल के नेता दिलेश्वर कामैत ने इस संबंध में लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर उन्हें औपचारिक नोटिस सौंपा है. ऐसे में साफ है कि पार्टी अब फ्रंटफुट पर उतरकर अपने नेताओं संदेश देना शुरू कर दिया है कि जेडीयू में अनुशासन को लेकर कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी.
 

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