बिहार के रोहतास जिले में ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट को लाखों रुपये का नुकसान पहुंचाने वाले एक शातिर गिरोह का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है. यह गिरोह महंगे इलेक्ट्रॉनिक सामान और अन्य कीमती उत्पाद ऑनलाइन मंगवाकर उन्हें नकली सामान से बदल देता था और फिर रिटर्न के नाम पर कंपनी को वापस भेज देता था.
मामला डेहरी इलाके का है, जहां फ्लिपकार्ट के स्थानीय संचालक द्वारा लगातार मिल रही शिकायतों के बाद पुलिस ने जांच शुरू की. जांच में एक संगठित फ्रॉड रैकेट का खुलासा हुआ, जो लंबे समय से ई-कॉमर्स कंपनियों को निशाना बना रहा था.
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पुलिस के अनुसार, आरोपी डिलीवरी बॉय के साथ मिलीभगत कर इस पूरे खेल को अंजाम देते थे. महंगे सामान की डिलीवरी लेने के बाद वे असली उत्पाद अपने पास रख लेते थे और उसकी जगह नकली या कम कीमत वाला सामान रखकर रिटर्न कर देते थे.
शिकायत के बाद शुरू हुई जांच
फ्लिपकार्ट कंपनी की ओर से बार-बार इस तरह की शिकायतें सामने आ रही थीं. कंपनी को लगातार नुकसान हो रहा था और रिटर्न किए जा रहे सामानों में गड़बड़ी पाई जा रही थी.
इसके बाद मामले की जानकारी पुलिस को दी गई. पुलिस ने तकनीकी और मानवीय साक्ष्यों के आधार पर जांच शुरू की तो पूरे नेटवर्क का खुलासा हो गया.
जांच में पता चला कि समस्तीपुर जिले के कुछ युवक डेहरी में रहकर इस धोखाधड़ी को अंजाम दे रहे थे. गिरोह का संचालन बेहद योजनाबद्ध तरीके से किया जा रहा था.
मास्टरमाइंड समेत 5 आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए गिरोह के सरगना सत्यकाम चौधरी को गिरफ्तार कर लिया. वह समस्तीपुर जिले के उजियारपुर का रहने वाला है.
सत्यकाम की निशानदेही पर पुलिस ने अमर राजा, चंदन कुमार, प्रदीप कुमार और हर्षल कुमार को भी गिरफ्तार कर लिया. सभी आरोपी समस्तीपुर जिले के रहने वाले बताए जा रहे हैं.
पुलिस अब इन सभी से पूछताछ कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस फ्रॉड नेटवर्क का दायरा कितना बड़ा था और उन्होंने कितनी कंपनियों को नुकसान पहुंचाया है.
कैमरा, मोबाइल, लैपटॉप और कार बरामद
गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से पुलिस ने कई कीमती सामान बरामद किए हैं. इनमें एक महंगा कैमरा, सात मोबाइल फोन, दो लैपटॉप और एक कार शामिल है.
पुलिस को आशंका है कि बरामद सामान भी इसी तरह की धोखाधड़ी के जरिए हासिल किए गए हो सकते हैं. सभी सामानों की जांच की जा रही है.
जांच एजेंसियां आरोपियों के बैंक खातों और ऑनलाइन लेन-देन की भी पड़ताल कर रही हैं, ताकि इस फ्रॉड से अर्जित धनराशि का पूरा ब्योरा सामने आ सके.
40 हजार रुपये महीने पर रखा था एक्सपर्ट
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह ने इस धोखाधड़ी को अंजाम देने के लिए एक विशेषज्ञ व्यक्ति को भी अपने साथ रखा हुआ था.
उसे हर महीने करीब 40 हजार रुपये दिए जाते थे. उसका काम रिटर्न प्रक्रिया में तकनीकी खामियां तलाशना और गिरोह को धोखाधड़ी के नए तरीके बताना था.
इस खुलासे के बाद पुलिस अब उस व्यक्ति की भूमिका की भी जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कहीं इस नेटवर्क से अन्य लोग भी तो जुड़े नहीं हैं.
ASP ने क्या कहा?
डेहरी के एएसपी अतुलेश झा ने बताया कि फ्लिपकार्ट से जुड़ी धोखाधड़ी की शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई की गई थी. जांच के दौरान पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है.
उन्होंने कहा कि आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है और मामले के हर पहलू की जांच की जा रही है. पुलिस यह भी पता लगा रही है कि इस गिरोह ने अब तक कितनी बार और कितनी कंपनियों के साथ ऐसी धोखाधड़ी की है.
पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं.