बिहार में तकरीबन दो दशक तक मुख्यमंत्री रहने के बाद नीतीश कुमार अब संसद के उच्च सदन यानि राज्यसभा जाने का फैसला किया है. उन्होंने खुद सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखकर राज्यसभा चुनाव लड़ने की बात कही है. इस तरह से बिहार की सियासत में बड़ा बदलाव होने जा रहा है, लेकिन नीतीश के राज्यसभा जाने की बात जेडीयू के नेताओं को ही हजम नहीं हो रही है.
नीतीश कुमार ने भले ही राज्यसभा सदस्य बनकर अपनी अधूरी ख्वाहिश को पूरा करने की बात कर रहे हों, लेकिन यह बात जेडीयू नेताओं के गले नहीं उतर रही है. जेडीयू के स्थानीय नेता सड़क पर उतरकर अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं. उन्हें इस बात का यकीन ही नहीं हो रहा है कि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद छोड़कर राज्यसभा जाएंगे, लेकिन अब जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने खुद ही फैसला कर लिया तो पार्टी दो गुटों में बंट गई है.
नीतीश के राज्यसभा जाने का जेडीयू में विरोध
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने को लेकर जेडीयू नेता रंजन पटेल ने कहा कि मेरे पास रोने के सिवा कुछ नहीं है. हमने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाने के लिए लाठीचार्ज और लात-घूंसे सहन किए. 2025 में हमने नीतीश कुमार के लिए घर-घर जाकर वोट मांगे, अगर वे मुख्यमंत्री नहीं रहे, तो बिहार की जनता कहां जाएगी?
रंजन पटेल ने कहा कि जेडीयू के कार्यकर्ताओं की एकमात्र मांग है कि निशांत (नीतीश कुमार के बेटे) को राज्यसभा भेजा जाए. अगर कोई मुख्यमंत्री बदलना चाहता है, अगर उन्हें लगता है कि उनके पास नेतृत्व बदलने की शक्ति है, अगर उनके चेहरे में इतनी ताकत है, तो उन्हें चुनाव कराना चाहिए और बहुमत हासिल करना चाहिए, हम कुछ नहीं कहेंगे. हम यहीं रहेंगे और उन्हें (नीतीश कुमार) को किसी भी सूरत में नामांकन दाखिल करने नहीं देंगे. निशांत कुमार को नामांकित किया जाए और हम नीतीश कुमार को जाने नहीं देंगे.
जेडीयू नेताओं के निशाने पर संजय झा, ललन सिंह
जेडीयू में रंजन पटेल अकेले नहीं है, जो नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने का विरोध कर रहे हैं बल्कि पार्टी नेताओं की पूरी लंबी फेहरिश्त है. जेडीयू के एक दूसरे नेता ने कहा कि 2025 का जनादेश नीतीश कुमार के नाम पर मिला है, उन्हें बिहार छोड़कर दिल्ली नहीं जाना चाहिए. नीतीश कुमार अपनी जगह किसी दूसरे नेता को राज्यसभा भेंजे.
उन्होंने कहा कि ललन सिंह और संजय झा जेडीयू को खत्म करने के लिए नीतीश कुमार को राज्यसभा भेज रहे हैं. कहना था कि नीतीश कुमार को यही दोनों नेता राज्यसभा भेज रहे हैं, उन्हीं की सारी साजिश है. जेडीयू को खत्म करना चाहते हैं. इतना ही नहीं जेडीयू के कार्यकर्ता तोड़फोड़ कर रहे हैं. जेडीयू एमएलसी संजय गांधी भी नीतीश के राज्यसभा जाने के समर्थन में नहीं है.
नीतीश के मुद्दे पर जेडीयू में क्या दो फाड़ हो गए?
नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने को लेकर बुधवार रात जेडीयू नेताओं की एक बैठक हुई थी. संजय झा और ललन सिंह सहित तमाम नेताओं ने नीतीश कुमार के साथ मीटिंग की थी. इसके बाद ही नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने पर फाइनल हुई. इसे लेकर जेडीयू दो गुटों में बंट गई है. एक धड़ा नीतीश कुमार का राज्यसभा जाने के पक्ष में है तो दूसरा गुट विरोध कर रहा है.
जेडीयू में वरिष्ठ नेता विजय चौधरी ने ही सबसे पहले कहा था कि नीतीश कुमार राज्यसभा जाना चाहते हैं. बुधवार को दोपहर में मीडिया से बात करते हुए कहा था. केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने कहा कि नीतीश कुमार की पार्टी है, वो जब चाहेंगे राज्यसभा चले जाएंगे. माना जाता है कि विजय चौधरी से लेकर ललन सिंह और संजय झा सहित कई नेता नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के पक्ष में है.
नीतीश के राज्यसभा जाने से जेडीयू के नेता क्यों खफा
नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले को लेकर जेडीयू के नेता और कार्यकर्ता जो नाराज हैं, उन्हें अपने सियासी भविष्य का खतरा मंडर रहा है, उनके अपने राजनीतिक कैरियर का संकट दिख रहा है. उन्हें लगता है कि बिहार में पावर ट्रास्फर होने से जेडीयू की सियासी अहमियत कमजोर होगी और बीजेपी की ताकत बढ़ेगी.
जेडीयू के बिखरने का खतरा
जेडीयू की पूरी राजनीति नीतीश कुमार के इर्द-गिर्द सिमटी हुई है. पार्टी के भीतर फिलहाल ऐसा कोई दूसरा नेता नहीं है जिसकी स्वीकार्यता पूरे बिहार में नीतीश जैसी हो. ऐसे में जेडीयू नेताओं को लगता है कि नीतीश दिल्ली जाते हैं, तो पार्टी के पास 'वोट बैंक' को एकजुट रखने वाला चेहरा नहीं बचेगा. ऐसे में नेताओं को डर है कि उनके जाते ही पार्टी ताश के पत्तों की तरह बिखर न जाए.
'विलय' का सता रहा डर
बिहार की राजनीति में यह माना जाता है कि नीतीश कुमार ही वो 'दीवार' हैं जो जेडीयू को बीजेपी या आरजेडी जैसी बड़ी पार्टियों में समाहित होने से रोके हुए हैं. जेडीयू नेताओं को लगता है कि अगर नीतीश केंद्र की राजनीति में चले गए, तो पार्टी का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा और अंततः उसे किसी बड़ी पार्टी के साथ विलय (Merge) करना पड़ेगा. इससे कई नेताओं का राजनीतिक करियर खत्म हो सकता है
'पावर सेंटर' का खिसकना
नीतीश कुमार पिछले दो दशकों से बिहार की सत्ता के केंद्र रहे हैं. जेडीयू के सांसद, विधायक और छोटे कार्यकर्ता जानते हैं कि जब तक नीतीश सीएम की कुर्सी पर हैं, उनकी ताकत बरकरार है.राज्यसभा जाने का मतलब है 'रिटायरमेंट मोड' या 'मार्गदर्शक मंडल' की ओर कदम बढ़ाना. कोई भी सत्ताधारी दल का नेता अपने सबसे मजबूत मोहरे को बोर्ड से हटाना नहीं चाहता.
गठबंधन की साख का सवाल
नीतीश कुमार को गठबंधन की राजनीति का माहिर खिलाड़ी माना जाता है. चाहे एनडीए हो या महागठबंधन, नीतीश के बिना गठबंधन में जेडीयू की मोलभाव करने की शक्ति शून्य हो जाएगी. नेताओं को पता है कि नीतीश के बिना बीजेपी या आरजेडी उन्हें उतनी तवज्जो नहीं देगी.