बिहार में एनडीए सरकार के विश्वासमत के दौरान सत्ताधारी विधायकों की खरीद-फरोख्त के मामले में तेजस्वी यादव के करीबी नेताओं की मुश्किलें बढ़ने की संभावना है. इस साल फरवरी में, जेडीयू के विधायक सुधांशु शेखर की शिकायत पर शुरू हुई जांच में कई अहम खुलासे हुए हैं.
बिहार की आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने इस मामले की जांच के दौरान गहरी छानबीन की है. EOU के DIG मानवजीत सिंह ढिल्लो के मुताबिक, शुरुआती जांच में मनी ट्रेल के अहम सबूत मिले हैं. जांच के दौरान, कई लोगों के बयान भी दर्ज किए गए, जो इस मामले की गुत्थियों को सुलझाने में सहायक साबित हो सकते हैं.
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एनडीए सरकार गिराने के लिए हॉर्स ट्रेडिंग
सूत्रों के मुताबिक, विधायकों की हॉर्स ट्रेडिंग के लिए बड़ी रकम दिए जाने की तैयारी थी. इन विधायकों को एनडीए सरकार को गिराने के लिए पैसों का लालच दिया जा रहा था और विपक्ष द्वारा उन्हें अपने पाले में करने की तैयारी थी. बताया जा रहा है कि इस तरह की लेनदेन के लिए हवाला के जरिए पैसा झारखंड, उत्तर प्रदेश और नेपाल से व्यवस्था किया जाना था.
मनी ट्रेल की जांच कर रही ईडी
इस मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी अपने स्तर से कर रही है, जो इस हॉर्स ट्रेडिंग के मनी ट्रेल को गहराई से खंगाल रही है. इस मामले में शामिल आरोपियों पर जल्द ही एक्शन लिया जाएगा.
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हॉर्स ट्रेडिंग में शामिल थे 10 लोग
जेडीयू विधायक सुधांशु शेखर के मुताबिक, इस हॉर्स ट्रेडिंग में कुल मिलाकर 10 लोग शामिल थे. वहीं, जेडीयू के एक अन्य विधायक डॉक्टर संजीव कुमार ने झारखंड में सत्ताधारी विधायकों के लिए रूम बुक कराया था. यह भी पता चला है कि सरकार बदलने की स्थिति में कुछ विधायकों को पैसा देने की भी योजना थी.